बस थोड़ी दूर और जाना हैं…

इस झूठे संसार में,
मतलब से भरे हर बात में,
सच की खोज में मुझे,
बस थोड़ी दूर और जाना हैं।

शायद ही मुझे कोई ऐसा दिखे,
जो कर्तव्य को खुद से आगे पढ़े,
इसी खोज को आगे बढ़ना है,
बस थोड़ी दूर और जाना हैं।

शायद कोई मिल जाए मुझे,
जिन्हें अपनों को परिभाषित करना आता है,
खुद से आगे अपनों की सोचे उन्हें खोजने मुझे,
बस थोड़ी दूर और जाना हैं।

ज़रा सोचो तुम भी औरों का,
जैसे सोचे सैनिक, सेवक और ज्ञानी,
खुद से आगे कर्तव्य को रखने वालों की खोज में मुझे,
बस थोड़ी दूर और जाना हैं॥

कुणाल कुमार

दूरियाँ

तुमसे दूर रहने की,
सजा दी है मैंने खुद को,
सब के साथ रहते हुए भी,
अकेला किया मैंने खुद को।

अपने अश्रुओं से सिंचकर,
कठोर किया हैं मैंने अपने खुद को,
जैसे कोई दीवार बनाते समय,
पानी से भिगोते है हम लोग।

तुम्हें लगेगा मैं भूल गया,
सारे बंधन पीछे छूट गया,
पर भूलने की जगह पे,
मैंने खुद को सिर्फ़ चुप कर लिया।

कुणाल कुमार

Some Time

Sometime in life,
We take ourself for granted,
What is easily available,
We do not ever accept it.

Probably this is our nature,
To look for toughest things,
That is the one of the reason,
We forget those who are near we.

There are limit,
To wait for anything,
All has right,
To evaluate alternatives.

But see how much I feel,
As still I am looking for your feelings,
But I know you will again ignore me,
Because your emotions are not for me.

Kunal Kumar

Hello

Hello my dear,
Why should I have a fear,
I always feel you in me,
Even though you are not near.

All i know this,
that our relationship is not selfish,
I do have feeling for you,
But i refrain in telling this to you.

I will not say anything to you,
And will keep my all feelings in me,
As I have a very bad fear,
Since I cannot afford to have loosing tear.

Kunal

भूल जाऊँ…

कुछ कहते है तुम्हें भूल जाऊँ,
ग़म से भरे समंदर से दूर जाऊँ,
सुंदरता की कसौटी पर नापते है तुम्हें लोग,
भूल जाते है मेरा प्यार जो हैं सिर्फ़ तुम्हारे लिए।

रंग रूप और तन का स्वरूप,
क्यों बोलते है लोग इसके लिए,
मेरा प्यार तो मेरी नज़रों में बसी है,
जो खुली हुई है सिर्फ़ तुम्हारे लिए।

शायद सुंदरता मापने का पैमाना,
अलग है लोगों से मेरी,
मेरे लिए सुंदरता दिल से जुड़ी है,
औरों के लिए शायद तन से।

मेरी यादों मे बसा है साथ तुम्हारा,
नहीं कोई जगह है तुमसे जुड़ी कोई और सुख की,
सुंदरता औरों के लिए मायने रखेगी,
मेरे लिए तो तुम्हारी अहसास काफ़ी है।

तुम रहो ख़ुश बस यही चाहत है मेरी,
जहाँ मिले तुम्हें सकूँ मन की,
मेरे जीने के लिए तुम्हारी अहसास ही काफ़ी है,
जिसमें बसी है सिर्फ़ और सिर्फ़ यादें तेरी।

कुणाल कुमार

सुनो…

सुनो,
अफ़सोस है मुझे,
तुम्हारे दर्द की राह पर,
चाह कर भी साथ नहीं दे पा रहा हूँ मैं।

सुनो,
संकोच ना रखना कभी दिल में,
जब ईक्षा हो दिल में,
एक बार आवाज़ दे कर देखना मुझे।

सुनो,
तुम खुद के दिल की सुनो,
वरना लोग तो यहाँ बैठे ही हैं,
हमदर्द बन दर्द देने के लिए।

सुनो,
शायद ये परीक्षा है हमारी,
कुछ समय की जुदाई तो होगी,
पर प्यार और मज़बूत होगा इस दिल में।

कुणाल कुमार

खुद में…

खुद में जीने की हिम्मत माँगी थी रब से,
रब ने मुझसे मेरी ख़ुदा ही छीन ली,
ना जाने ऐसा क्यों हुआ मेरे साथ,
जिसे ख़ुदा माना वो ही मुझसे रूठ चली गयी।

शायद कुछ कमी रह गयी थी,
मेरे प्यार में,
नहीं तो रब दूर नहीं करता,
मुझे तुम्हारे साथ से।

मैंने सपने में भी नहीं सोचा,
अलग होना पड़ेगा इस तरह,
अब कैस धड़केगा ये दिल मेरा,
जब धड़कन छोड़ चली है मुझे।

मुझे शिकायत है रब से,
क्यों अलग किया हैं मुझे उस से,
मेरी चाहत को छीन कर मुझसे,
मुझे क्यों जीने को छोड़ दिया खुद में।

कुणाल

जान…

आज जब अलग हो रहा है दिल,
जान जा रही है जान जाने से,
कैसे काटूँगा अपनी बेजान सी ज़िंदगी,
जान तो कही दूर होगी मेरी।

अब क्या पाना क्या खोना,
बस बोझ सी लगने लगी है ज़िंदगी,
मेरी ख़ुशी तो कही और जा रही है,
अब कैसे काटूँगा मैं अपनी ज़िंदगी।

काश हम साथ होते,
जी लेते अपनी नयी ज़िंदगी,
लोग तो कहते हैं बहुत कुछ,
पर हम तो जीते अपनी ख़ुशी।

ना दूर जाने का ग़म होता,
ना होती दर्द खोने की,
रहती जो तुम साथ मेरे,
जी लेते हम अपनी हर ख़ुशी।

कुणाल कुमार

सोच…

नहीं सोचा हैं मैंने,
कैसे कटेंगी मेरी ज़िंदगी,
जिसकी झलक देखने को बेचैन हैं दिल,
उसके बिना जीने की ईक्षा नहीं बची है इस दिल।

ये किसकी सोच थी,
किसने जुदा किया हैं दो दिल,
क्या चैन से जी पाएगा वो कभी,
जिसने चैन छीन ली है मेरी।

पर एक बात तो सत्य है,
अब दिखेगा मेरा दूसरा रूप,
जिसके तपिश से नहीं बचेगा कोई,
जिसने रची है गंद भरी मंजिल।

कुणाल कुमार

क्या तुमने मुझसे प्यार किया है?

क्या तुमने मुझसे प्यार किया है?
अपने दिल में मुझे जगह दिया है?
ख़ामोश क्यों हो तुम,
कह दो अगर तुमने प्यार मुझसे नहीं किया है।

तुम्हारी खामोशी करती है मुझे बेचैन,
हाँ और ना के बीच झूलता है मेरा चैन,
बस ये जानने को उत्सुक है मेरा मन,
क्या मेरे प्यार की गहराई तुमने महसूस किया है।

अब छोड़ लज्जा कह दो मुझे,
अपनी चाहत छिपी है तेरे नयन में,
मैं आज फिर बोलता हूँ एक बार तुम्हें,
मेरा प्यार रहेगा सिर्फ़ तुम्हारे लिए।

आज सुन लो मेरा भी ये वादा है,
अब हमेशा से मेरा प्यार बस तुम्हारा है,
चाहे तुम अपना लो या खुद को झूठला लो,
पर मेरे प्यार के हक़ीक़त में तुम्हारा वजूद सदा हैं।

कुणाल कुमार

तुम कौन हों…

तुम कौन हो,
ये समझ नहीं पाया कभी मैंने,
कभी तुम सच्ची दिखती हो,
कभी अच्छी लगती हो मुझे।

ये कौन सा गुनाह किया है मैंने,
जिसकी सजा काट रहा खुद में,
जो दिल तो मैंने दे दिया हैं तुम्हें,
पर प्यार ना मिला कभी मुझे तुमसे।

तुम कौन हो,
जिसके पास आने को मचलता है मेरा दिल,
पर पास आने के बाद ना जाने क्यों,
दर्द में तड़पता है मेरा ये दिल।

सुबह हो या शाम,
बस अब और नहीं है कुछ काम,
भूल गया हूँ मैं खुद को,
पर ना भूल पा रहा है तुम्हें ये दिल।

कुणाल कुमार

समझ की फेर…

जैसे कभी धूप में,
मन चाहे छाँव की चादर,
वैसे द्विविधा लिए मन,
चाहे तुम्हारे साथ अहसास भरी।

पर ये क्या स्वार्थ है मेरा,
जो चाहता रहता है तुम्हें हर घड़ी,
बस एक अनुभूति ही काफ़ी है तुम्हारी,
मुझे अब जीने के लिए।

शायद अपने दिल की बात,
ना समझा पाऊँगा तुम्हें मैं कभी,
इसीलिए अच्छा होगा अगर,
तुम भूल जाओ मुझे अभी।

मैं कुछ ना बोलूँगा,
जी लूँगा जब तक कर्तव्य चाहेगा मेरी,
फिर छोड़ जाऊँगा दूर कहीं,
वापस म लौटने की क़सम दिल लिए।

दूर से ही सही,
ये दिल चाहता रहेगा तुम्हें ही घड़ी,
पर वापस आने की हिम्मत,
अब ये ना जुटा पाएगा कभी।

चलो अलविदा कह दो मेरे दिल,
उसे जीने दो उसकी हर ख़ुशी,
चाहे तुम प्यार करो उससे पर,
अपने अहसास को ना प्रकट होने दो कभी।

कुणाल कुमार