पुरुष…

ना छल है दिल में,
ना ही कपट किसी के लिए,
बस ढूँढता है दिल उसे,
जो समझ पाए कभी मुझे।

दिन बदले,
बदले महीने और साल,
ऋतु बदलते गए यूँ ही,
पर ना मिल पाया किसी अपने का साथ।

क्या ज़्यादा चाहा था दिल मेरा,
चाहता था बस सच्चाई भरा साथ,
पर आपको शायद ज़्यादा की चाहत थी,
इसीलिए किया आपने अनेकों से प्यार।

कुणाल कुमार
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कौन…

यों पास आते है लोग,
प्यार करने का दिखावा करते है अनेक,
जब दिल चाहने लगता है उन्हें,
तभी असलियत से पहचान करवाते है वो हमें।

इज़्ज़त और अभिमान,
जीना था हमें लिए स्वामिभान,
पहले तो किया आपने प्यार,
फिर कुचल दिया हैं मेरा स्वामिभान।

क्यों निरीह सा बनूँ मैं,
नहीं झुकना है मुझे कभी,
सर उठा कर जीना है मुझे,
चाहे जीवन जीना परे अकेले अभी।

कुणाल कुमार
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उपहार…

कवि बना,
भूल गया मैं सब कुछ,
प्यार तो हुआ नहीं तुम्हें मुझसे,
पर सोच क्यों हुई खोटी तुम्हारी मेरे लिए।

मैंने तो जीना सिखा,
तुम्हारे अहसास के अनुभूति से,
तुमने क्यों नहीं सोचा कभी,
मेरे दिल में सिर्फ़ प्यार था तेरे लिए।

आज मैंने वादा किया खुदसे,
भूल जाऊँगा तुम्हारी याद को खुदसे,
बस थोड़ा समय दो तुम मुझे,
ताकि दफ़न कर दूँ हर याद को अपने दिल में।

यही है मेरे जन्मदिन का तोहफ़ा तेरे लिए…..

कुणाल कुमार
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उपहार…

कवि बना,
भूल गया मैं सब कुछ,
प्यार तो हुआ नहीं तुम्हें मुझसे,
पर सोच क्यों हुई खोटी तुम्हारी मेरे लिए।

मैंने तो जीना सिखा,
तुम्हारे अहसास के अनुभूति से,
तुमने क्यों नहीं सोचा कभी,
मेरे दिल में सिर्फ़ प्यार था तेरे लिए।

आज मैंने वादा किया खुदसे,
भूल जाऊँगा तुम्हारी याद को दिलसे,
बस थोड़ा समय दो तुम मुझे,
ताकि दफ़न कर दूँ हर याद को अपने दिल में।

यही है मेरे जन्मदिन का तोहफ़ा तेरे लिए…..

कुणाल कुमार
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दर्द…

तुम्हारे दर्द का अहसास,
मुझसे बेहतर कौन जानेगा,
जो जी रहा हैं तेरे याद में,
तुमसे दूर रहने का दर्द दिल लिए।

शायद ये सोच की दिवार है,
जो दूर रखा है आपको मुझसे,
वैसे तो मैं तैयार था,
और आज भी तैयार हूँ समझने को तुम्हें।

कभी कभी होता हैं,
कुछ लोगों को हम समझते हैं अपने,
पर जो तुम्हें अपने हाल पे छोड़ दे,
उनके लिए तकलीफ़ क्यों है दिल में तेरे।

भी सोचो तुम ज़रा,
शायद सच्चाई हो तुम्हारे खड़ा,
चाहता है तुम्हें सच्चे दिल से,
पर तुम्हें ना जाने क्यों मतलब दिखता है उसमें।

बस इतना करना है आज तुम्हें,
भूल जाओ जो नहीं हैं तुम्हारे अपने,
अब खुद का वजूद बनाओ तुम,
ताकि पराए भी तरसे तुम्हें बनाने को अपने।

कुणाल कुमार
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भोली सी सूरत…

भोली सी सूरत में,
तुम समेटे हो कितने राज,
कभी तुम मुझसे दूर हो,
कभी तुम हों मेरे पास।

कभी इकरार कभी इंकार,
ये नाटक देखा मैंने सौ सौ बार,
मान लिया तुम्हें खुद से है प्यार,
पर काश तुम समझ पाती औरों का भी प्यार।

अभी तक सोचती हो,
तुम जी सकती हो दोहरी ज़िंदगी,
जिसके लिए दिल में है तुम्हें प्यार,
उसके लिए तुम हो बस एक अतिरिक्त यार।

अब थोड़ा आगे का सोचो,
अपने सोच के परिप्रेक्ष्य से निकलो,
जो तुम्हारे लिए नहीं छोड़ सकता अपनी ख़ुशी,
उसकी सोच लेकर क्यों जी रही हो तुम अपनी ज़िंदगी।

कुणाल कुमार
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अतिरिक्त ख़ुशी…

सर्द हवाओं के थपेड़ों से,
मेरे यादों के झरोखे खुल से गए,
जिन यादों को बंद रखा था दिल में,
वो आँखों से चुप चाप बह निकले।

सच्चाई बयान नहीं कर सकता,
दूर रहने का ग़म छुपा भी नहीं सकता,
इसी कशमकस में कट रही है ज़िंदगी,
इंतज़ार हैं काश तुम समझ पाती मुझे कभी।

नहीं जीना हैं मुझे,
बनकर तुम्हारी अतिरिक्त ख़ुशी,
बस जीना है मुझे,
बनकर तुम्हारी हर ख़ुशी।

कुणाल कुमार
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तुम ख़ुश तो हो ना ?

तुम ख़ुश तो हो ना ?
अपने सोच के परिपेक्ष से संतुष्ट हो ना ?
हर ग़म के साया से दूर हो ना ?
अपनी बनाई दुनिया में परिपूर्ण हो ना ?

अपनों के ख़ुशी के लिए,
तुमने अपनों को भूला दिया,
इससे बड़ा त्याग,
और किसी ने क्या कभी किया होगा ।

बस इतना ही कहूँगा मैं आज,
आप जीयो ख़ुशियों के साथ,
जिसके दिल में सच्चाई हो,
वही रहे आपके पास बनकर आपका प्यार।

कुणाल कुमार
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विरह…

विरह तो एक सोच हैं उनका,
जो करते है क्षणिक प्यार,
दिल से जो प्यार करते है,
उन्हें विरह से भी होता है लगाव।

सुबह हो या शाम हो,
बस करते रहते है उनका ध्यान,
वो पास ना रहना चाहे तो क्या,
अपनी याद तो छोड़ गयी हैं जीने के लिए।

एक दिन वो समझ जाए,
बस यही है दिल में मेरे ख़्याल,
वापस लौट कर वो आ जाए,
बन कर सिर्फ़ मेरा प्यार।

उनके आँचल के छाँव में,
बस कुछ सासें मैं काट लूँ,
यहीं है तमन्ना मेरे दिल में,
उनके साथ रहकर अपना जीवन सुधार लूँ।

कुणाल कुमार
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ज़िंदगी…

कुछ लोग है,
जिनसे बनती है ज़िंदगी,
उनके पास आने से मिलती हैं ख़ुशी,
और दूर जाने से अश्रु हैं बह निकलती।

समझ से दूर,
अहसास से परे,
अपने ही सोच में डूबे हुए,
वो जी रहे है अपनी ज़िंदगी।

क्या ख़याल नहीं आया कभी,
या अहसास नहीं हुआ उन्हें मेरे तड़प की,
चल दिए मुँह मोड़ कर यूँ ही,
जब चाहत थी मेरे दिल में और बढ़ने लगी।

ये तो कड़वी सच्चाई है,
मेरे क़िस्मत में प्यार नहीं सिर्फ़ जुदाई है,
संग जीने की क़समें खाता हुआ दिल में,
दो कदम साथ नहीं चल पाया उनके कभी।

कुणाल कुमार
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प्यार और ममता…

ना जाने क्यों दिल मचल रहा है आज बार बार,
बस एक बार प्यार से तुम पुकार लो मेरा नाम,
अपने ममता के छाँव में पनाह दे दो तुम मुझे,
ताकि भूल जाऊँ वो दर्द जो जमाने ने दिए है मुझे।

मुझे याद हैं वो लम्हे,
जब जागी थी तुम रात भर,
अपने आँचल में छुपा कर,
मेरे हर दर्द को परे किए थे तुमने।

एक बार याद करके आज पुकार लो तुम मुझे,
भूलने की बीमारी से कुछ लम्हे चुरा लो मेरे लिए,
समेट लो मुझे अपने आलिंगन में तुम मेरी माँ,
मेरी सजा कम कर दो पास आ जाओ तुम मेरे।

जाने के बाद याद में तड़पता हैं ये दिल,
फिर पास रहने के लिए क्यों नहीं मचलता है ये दिल,
शायद पास रहने से अपनापन बढ़ता है,
इसीलिए पास आने से डरता है मेरा दिल।

एक ही तमन्ना हैं दिल में मेरे,
बस तुम ही माँ बनो हर जन्मों में मेरे,
तुम्हारी ममता से मुझे जीने की शक्ति मिले,
अपनों परायों को समझने के लायक़ जो बनाया हैं तुमने।

कुणाल कुमार
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इंसान…

इंसान के रूप में राक्षस देखा हैं मैंने,
मौत भरी दरिया से तैर निकला है मैंने,
पर आज भी आगे जब बढ़ते हैं मेरे कदम,
उन यादों के दर्द से अश्रु सैलाब बन बह निकलते है मेरे।

जब भी आगे बढ़ने की कोशिश करता है दिल,

यादें की जकड़ बेड़ियाँ बन जाती है,

अपने कहने वाले तो बहुतेरे मिले है मुझे,

पर मुझे समझने वाले नहीं मिला एक भी।

नहीं समझ हैं मुझे,
किस गलती की सजा हैं मिली,
मैंने तो सिर्फ़ इंसानियत देखनी चाही,
हैवानियत से भरा हिस्सा मेरे तक़दीर ने क्यों दी है मुझे।

अब बढ़ते रहना है मेरी नियति,
अपने भूत से दूर बनाना है भविष्य की निधि,
पर इस दौर में अकेला पड़ गया है मेरा मन,
अब ना कोई साथी है और ना रहा कोई हमदम।

कुणाल कुमार
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