इक मुलाक़ात

इक मुलाक़ात अजनबी दिल से, यूँ ज़िंदगी के सफ़र में हो गया,
फिरसे धड़कना मेरे दिल ने, क्यों हो गया शुरू इसबार,
सोया था ये बेचारा दिल, अल्प विराम में था उसका स्थान,
पर ना जाने क्यों उसे देख, खुद धड़कना शुरू कर लिया,

अजीब माया हैं ये जीवन, सभी खोजे यहाँ अपनी ख़ुशी,
कोई तो बताए मुझे, क्यों ना दे सकता मैं दूसरों को ख़ुशी,
नहीं विश्वास मुझे खुद पे, नहीं मेरे नसीब में कोई ख़ुशी,
पर अपने नसीब को पीछे छोड़, दे सकता हैं सभी को ख़ुशी,

मेरा दर्द अब मैं खुद समझूँ, सुलझाना इसका है मेरा काम,
कुछ लोगों को नहीं मिलती, कभी उनके दिल को ख़ुशी,
कुदरत का यहीं हैं फ़लसफ़ा, हर कोई जी रहा अपनी ज़िंदगी,
बंद कर लूँगा मैं अपने दिल को, भूल कर मैं अपनी ज़िंदगी.

के.के. 

One thought on “इक मुलाक़ात

  1. How much I would like to know Sanskrit, Hindi, Tamil, etc.!! But most of all Marathi, (in order to understand on first hand Nisargadatta speeches).

    Thanks for your visit, brother.

    Liked by 1 person

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