अहसास…

क्यों लगती है बुरी,
तुम्हारी चिल्ला कर कहना कोई बात,
शायद ये नहीं थी कभी उम्मीद तुमसे,
क्योंकि प्यार करने वाले चिल्लाते नहीं कभी।

दर्द तो होता हैं दिल में,
अहसास भी रोता हैं कभी कभी,
पर इस दर्द को ज़बान नहीं दे सकता मैं,
क्योंकि शायद यक़ीन नहीं मुझे अपने आप पर।

कुणाल कुमार

मारने मारने की बातें नहीं करते अच्छे लोग,
इसलिए तो जीने का आनंद उठाते हैं सच्चे लोग।

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चुप्पी…

मेरे आवाज़ को चुप कर सकती हो तुम,
पर मेरे अहसास को कैसे चुप करोगी तुम,
हर साँस के साथ तेरी याद धड़कती हैं दिल में,
अब इस साँस को कैसे चुप करोगी तुम।

मेरा अस्तित्वय तुम्हें मेरी याद दिलाएगी,
झकझोर कर पूछेगी तुमसे की क्यों चुप किया तुमने मुझे,
फिर मेरी चुप्पी का दर्द नहीं सह पाओगी तुम,
मेरी तरह याद में अपनी अश्रु को बहाओगी तुम।

एक समय आएगा ऐसा,
जब चाहोगी मैं कुछ बोलूँ तुम्हें,
पर शायद इंतज़ार में तेरे,
मेरी आवाज़ शायद चुप्पी में बदल जाए।

कुणाल कुमार

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जीवन चक्र…

कहते हैं ज़िन्दगी का दूसरा नाम इम्तिहान हैं,
पर क्यूँ, हर इम्तिहान में कोई न कोई क़ुर्बान हैं,
अक्सर टूटे सपनो से बिखर जाया करते है वो लोग,
जो भी यहां जीवन के सच से अनजान रहते है,

अब सपने संजोने वाली उन आखों का क्या कसूर,
नादान दिल की वो तो बस एक छवि या एक पहचान है,
ज़िन्दगी समझते हैं कुछ लोग चंद पलों को,
इश्क़ में कहाँ रहता हैं ज़मीन पर कोई इंसान,

जब मिलती है सजा ज़िन्दगी में,
किसी से दिल लगाने की,
लगे बोझ खुदा का वो तोहफा,
जिसका नाम जान है,

ज़िन्दगी कितना भी दे गम,
हंस के तुम जी लो यारों
मौत भी आज तक कहाँ हुयी किसी पे मेहरबान है,
जीवन सुख दुःख का एक घूमता चक्र है
जो ना समझा ये, वो नादान है, वो नादान है

कुणाल कुमार

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आज वो उदास थी…

पता नहीं क्यों? आज वो उदास थी,
जीवन से निरास थीं,
चेहरे पे गहरी मायूसी थीं छाई,
आँखों से अश्रु निकल आइ।

उसकी मुश्कान कही गुम सी गयी,
चेहरे पे दर्द उभर कर आयीं,
ना चुप रहने वाली थी वो लड़की,
आज क्यों इतना ख़ामोश नजर आई।

दिन ढला रात्रि प्रहर हैं आयी,
चेहरे की उदासी ना हट पाई,
जैसे उसकी खुशी गुम सी गयी,
छोड़ उसे अपने दर्द के सहारे।

क़सूर क्या इस मासूम का,
दोस्तों को ये बात समझ ना आइ,
क्या थी उसके दिल की कसक,
जाने क्यों आज वो मायूस नज़र आई।

रितु बदले इस उम्मीद पर,
होगी क्या उदासी उसकी अब दूर,
ना समझ ना पाया कभी उसका मन,
उसकी ख़ुशी है अपनाना उसके दिल की कही।

कुणाल कुमार

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आज वो उदास थी…

पता नहीं क्यों? आज वो उदास थी,
जीवन से निरास थीं,
चेहरे पे गहरी मायूसी थीं छाई,
आँखों से अश्रु निकल आइ।

उसकी मुश्कान कही गुम सी गयी,
चेहरे पे दर्द उभर कर आयीं,
ना चुप रहने वाली थी वो लड़की,
आज क्यों इतना ख़ामोश नजर आई।

दिन ढला रात्रि प्रहर हैं आयी,
चेहरे की उदासी ना हट पाई,
जैसे उसकी खुशी गुम सी गयी,
छोड़ उसे अपने दर्द के सहारे।

क़सूर क्या इस मासूम का,
दोस्तों को ये बात समझ ना आइ,
क्या थी उसके दिल की कसक,
जाने क्यों आज वो मायूस नज़र आई।

रितु बदले इस उम्मीद पर,
होगी क्या उदासी उसकी अब दूर,
ना समझ ना पाया कभी उसका मन,
उसकी ख़ुशी है अपनाना उसके दिल की कही।

कुणाल कुमार

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काश…

काश तुम सुन पाती,
मेरे दिल की धड़कन,
हर एक धड़कन आज भी,
धड़कता हैं सिर्फ़ तेरे लिए,

काश तुम समझ पाती,
हाल ए दिल मेरा,
मजबूर होकर तड़प रहा,
बस तेरा याद लिए दिल में,

मुझे मालूम है हाल ए दिल तेरा भी,
चाहे कितना खुद को छिपाओ तुम खुद से,
तेरे दिल में समा मैं तेरी धड़कन बन गया हूँ,
चुपके से आकर तेरी यादों में बस गया हूँ,

अब तो सिर्फ़ बस यही बचा है तेरे लिए,
खुद से लड़ना छोड़ कर खुद को अपना बना लो,
जब भी कभी मेरी याद आएगी तुम्हें,
पाओगी मुझे हमेशा तुम अपने दिल के समीप।

कुणाल कुमार

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काश…

काश तुम सुन पाती,
मेरे दिल की धड़कन,
हर एक धड़कन आज भी,
धड़कता हैं सिर्फ़ तेरे लिए,

काश तुम समझ पाती,
हाल ए दिल मेरा,
मजबूर होकर तड़प रहा,
बस तेरा याद लिए दिल में,

मुझे मालूम है हाल ए दिल तेरा भी,
चाहे कितना खुद को छिपाओ तुम खुद से,
तेरे दिल में समा मैं तेरी धड़कन बन गया हूँ,
चुपके से आकर तेरी यादों में बस गया हूँ,

अब तो सिर्फ़ बस यही बचा है तेरे लिए,
खुद से लड़ना छोड़ कर खुद को अपना बना लो,
जब भी कभी मेरी याद आएगी तुम्हें,
पाओगी मुझे हमेशा तुम अपने दिल के समीप।

कुणाल कुमार

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इंतज़ार…

इंतज़ार में मैं तेरे हर घड़ी हर समय,
काट रहा हूँ अकेलेपन से भरा मेरा ये जीवन,
पर देखो अकेलापन भी आज काट रहा हैं मुझे,
और दर्द भी आज हँस रहा देख हाल मेरे दिल का,

सोचता हूँ मैं कभी कभी,
क्यों महसूस नहीं करता मैं अकेला,
शायद ये जो तेरी यादें बसी मेरे दिल में,
तेरे ना चाहने पर भी साथ निभाती है मेरा,

मेरी इंतज़ार भी है कुछ ख़ास,
वो जो हैं मेरे प्राणो के पास,
उसके लिए एक जीवन क्या,
कर सकता मैं अनेक जन्मो का इंतज़ार।

And the waiting for my eternal love soulmate 😍 continues forever ………………………………

कुणाल कुमार

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उधार की गोद…

कभी सोचूँ खुद पे,
या कोसूँ जो अपनी नसीब को,
प्यार की कसक दिल लिए ,
खोजूँ उधार की गोद,

क्या चाह नहीं है मुझमें,
या चाहने की इजाज़त नहीं है मुझे,
क्या जीवन है मेरा,
जैसे तड़पता प्यार को प्यासा रेगिस्तान।

क्या मेरी चाहत है,
कोई काग़ज़ की कस्ती के समान,
जो डूब जाए जब हो मर्ज़ी,
या हो तेरे हुक्म का ग़ुलाम।

क्या मिलेगी मुझे कभी ,
मेरी तड़पती प्यार को इक मुक़ाम,
इक इकरार को तरसता,
दे रहा मेरा प्यार कई कई इम्तिहान।

क्या मुझे हक्क नहीं,
ख़ुशी की छोटी सी प्यार भरी मुस्कान,
मेरा प्यार झूठा नहीं,
खोजे शकुन भरी इक उधर की गोद।

कुणाल कुमार

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दिल बेचारा…

ये दिल बेचारा,
दुश्मनों के हत्थे चढ़ गया,
सोचा था शकुन से जीने का,
भेड़ियों के चाल में फँस गया।

ये जनता का प्यार,
तमाचा है उन भेड़ियों के मुँह पर,
जो भेड़िया चला था शेर बनने,
जनता के दिल से अपना इज़्ज़त गवा बैठा।

मारना तो सभी को है एक दिन,
ख़ुदा ने तय किए हर एक की तारीख़,
पर कुछ हैं जो खुद को ख़ुदा समझ बैठे,
दूसरों की तारीख़ तय करने की गलती कर बैठे।

मत भूलो इंसान,
तुम नहीं हो इतना महान,
अगर दूसरों का ग़लत करोगे,
तो गलती तुम्हारे नसीब में भी घर कर लेगी।

कुणाल कुमार

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दर्द भी दबा भी…

तेरी यादें मेरे जीवन का,
जीने का मक़सद बन गयी,
तेरी चाहत से मिली दर्द का दवा,
तेरे दिए साथ की याद बन गयी।

प्यार से दूर जाने तक का सफ़र,
कुछ लोग मतलब की कश्ती में करते हैं,
कुछ उन पलों में बीते समय को,
यादों में गले लगा कर जीते हैं।

शायद उनके जीवन के सफ़र में,
मेरा जगह कुछ था ही नहीं,
साथ तेरा तो ना मिला मुझे,
पर यादें छोड़ गयी तुम मेरे लिए।

कुणाल कुमार ।

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परिंदा 🕊 और बहेलिया

क़ैद में हैं परिंदा,
उड़ना चाहे ऊँचे गगन में,
पर झूठे माहौल में,
क़ैद ही उसे लगे उसे उचित,

पंख सोच के सलाख़ों से टकरा,
टूट चुका है, जैसे उसका हौसला,
उड़ान की उसके दिल की इक्षा,
मर चुकी हैं अब उसके सोच में,

क्या परिंदा क़ैद में हैं?
तड़प रहा लिए दिल में उड़ने की कसक,
पर लगता है परिंदा वैसे तो आज़ाद है,
पर क़ैद में हैं आज भी उसका सोच,

क्या खूब चली हैं बहेलिया ने चाल,
क़ैद में किया परिंदे की उड़ान,
तन से छोड़ आज़ाद उसे,
सोच से किया परिंदे को अपना ग़ुलाम।

कुणाल कुमार

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