सावन…

क्यों सावन अटक गए है,
मेरे नयनों की क्षितिज पर,
बारिश बन अश्रु बह निकले,
बस सिर्फ़ आपकी यादों में।

आँखों से उतर कर अश्रु,
मेरे दिल को सिंच कर जाती है,
हर बढ़ते दिन के साथ मेरा दिल,
आपको अपना बनाना चाहती है।

जनता हूँ आपकी मजबूरी,
पर कैसे समझाऊँ आपको मैं अपनी मजबूरी,
बस आपसे ही प्यार किया ये दिल,
और मजबूर हैं आपसे दूर रहने के लिए।

क्या बारिश ने रखी है कुछ उम्मीद,
धरती की प्यास बुझाने पर,
वैसे ही है मेरा प्यार हैं आपके लिए,
चाहता हूँ आपको दिल से पर पाने की उम्मीद नहीं हैं दिल में।

कुणाल कुमार

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