समझ

कैसे समझ लेती हो मेरे दिल हर बात,क्या रिश्ता है मेरा तुम्हारे दिल के साथ,पर इक बात समझ नहीं आयी मुझे कभी,क्यों नहीं जान पाई तुम चाहत को मेरे, क्या इतना ही समझा तुमने मुझे,क्यों बौना कर दिया मेरे क़द को तुमने,तेरे इकरार को खुद में समेट लेता मैं,तुम नहीं चाहती तो इजहार नहीं करताContinue reading “समझ”

इडली या डोसा

Originally posted on मधुर लघु काव्य संग्रह:
संध्या की वेला, मुझे भूक लगी ज़बरदस्त,समझ नहीं आता, खाऊ इडली या डोसा, गोल गोल इडली, देख मन ललचाया,साथ में साम्भर और चटनी भी ले आया, इधर देखूँ , डोसा मायूस नज़र आया,उसे जो लगा, उसे कोई भी नहीं खाया, मायूस डोसा का दर्द सह ना पाया,बड़े चाव से उसे माँग कर…

सुंदरता क्या है?

Originally posted on मधुर लघु काव्य संग्रह:
दिल की खुशी? जब रिस्तो में? उतर? आये,हंशी? खुशी,? जो? जीवन में? बस जाए,हर पल हवा में उड़ता रहु, सपनो की सागर  में  गोते खाऊ,ढून्ढ  लाऊ  ख्वाब का वो पाल,ये पल, जो निश्चल, है सुंदर. कुणाल कुमार

टूट रहा हूँ मैं

क्यों टूट रहा हूँ मैं क्यों टूट रहा हैं मेरा ये दिल,क्या चाहत में मेरी हैं कमी या तेरा साथ छूट रहा,समझाने की कोशिश कर रहा इस बेचारे दिल को,जीवन है क्षणिक ख़ुशी की उम्मीद ना रखो कभी दिल में, हर कोई खोजे यहाँ खुद की मंजिल,मैं भी जी रहा अपनी वीरान सी ज़िंदगी,ज़रा साContinue reading “टूट रहा हूँ मैं”

रिश्ते की उलझन

कुछ रिश्ते दर्द भरे होते हैं,जहाँ तन्हाई लिखी होती हैं,कुछ रिश्ते ख़ुशी के होते हैं,जहाँ प्यार बिछीं होती हैं, रिश्ते की इस उलझन में,क्यों ख़ुशी ढूँढ रहा मैं,दर्द भरी जीवन  में मेरे,क्यों ना करता खुद  से  प्यार, कुछ अनजान राही बन जाते,जीवन के इस सफ़र में,अपना बना यूँ छोड़ जाते, तन्हाई के दर्द को सहने, शायदContinue reading “रिश्ते की उलझन”