माँ का प्यार…

उन लम्हों को छिपा लूँ, बनाकर रखूँ दिल में यादगार, मेरी दुनिया आज भी तुम्हारे कदमों पे है, पाने को माँ का प्यार। बचपन में तमन्ना थी दिल में, बड़ा हो जाऊँ मैं आज कल ही में, पर ये किधर पता था पीछे छूट जाएगी, माँ के हाथों से किया दुलार। व्यस्त जीवन जवानी का,Continue reading “माँ का प्यार…”

डर लगता हैं…

डर लगता हैं कुछ कहने में, ख़ौफ़ लगता हैं अब जीने में, एक बोल सुनने के लिए मैंने, तंज भरे अनेक वाणी बाण सहे। कहते हैं वो किसने कहा की उनसे प्यार करे, जैसे प्यार उनसे पूछ कर करना था हमें, प्यार तो अहसास हैं जो मेरे दिल में है बस गयी, चाहे आप प्यारContinue reading “डर लगता हैं…”

ख़्वाब और तमन्ना…

अगर ख़्वाब हो परिपूर्ण, तो तमन्ना होगी और चाहत की, संतुष्टि किधर मिलती हैं जीवन में, जिसे दिल से चाहत के फ़साने लिखने हों। यहाँ तो लोग अधूरी ख्वाहिशों में, जीवन जीने का मज़ा ढूँढते है, मैं तो अपने अधूरी ख़्वाबों को, मुकम्मल करने का सोचता हूँ। अगर सच में हिम्मत है दिल में, औरContinue reading “ख़्वाब और तमन्ना…”

निशब्द …

निशब्द सा देख रहा, अपनों के द्वारा कहे बोल, अपनापन जता रहे हैं वो, पर मुझे अपना बनाने से क्यों डर रहे वो। झूठी आशा की गोद बना, प्यार भरी लोरी सुनाते रहते, जब दिल की बात होती है तो, दिल तोड़ मुँह मोड़ चले जाते हैं वो लोग। निशब्द सा रह गया मैं, खुदContinue reading “निशब्द …”

विश्वास…

विश्वास हमें क्यों नहीं होता हैं, वो ख़ुदगर्ज़ी में मुझे छोड़ बढ़ चले, अपनी दिल के किसी कोने में, मेरी याद वो वो दफ़न कर बैठे। बस गुस्ताखी इतनी हुई मुझसे, चाहा आपको मैंने खुद से बढ़कर, आपसे ज़्यादा चाहने की सजा मुझे मिली, इसीलिए आप मुझे मेरे हाल पे छोड़ चले। वैसे मैंने देखाContinue reading “विश्वास…”

आत्म काव्य…

लिख रहा हूँ जीवन के, कुछ अनकहे अनसुने सच, मेरे दर्द से भरे ज्वालामुखी से, कर रहा हूँ सच का प्रवाह। काल चक्र के अनोखे रंग, बचपन जवानी और बुढ़ापे रूप में जी रहे हम, हर मोड़ पर हमें साथी मिले, नाम हैं उसका सुख और दुःख। जीवन कि धारावाहिक में, हर एक प्रकरण काContinue reading “आत्म काव्य…”

प्यार…

कुछ लोग याद हमें, कभी कभी करते है, पर सच्चाई से चाहने वाले, हर धड़कन में अपने प्यार को करते है। क्या प्यार भी फ़ुर्सत से कही करते हैं, अपने बनाए शर्तों में प्यार को क्या करते है, प्यार तो दिल का वो अहसास है, जिसका अहसास हम हर घड़ी करते हैं। प्यार करती होContinue reading “प्यार…”

सोचा ना था…

सोचा ना था कभी, दूर हो जाओगी तुम मुझसे, फूल तो मिली मुझे काग़ज़ की, पर सुगंध किसी और के लिए थी। सोचा ना था कभी, तुम बस जाओगी ख़्वाब में मेरे, प्यार तो दिल करता है सिर्फ़ तुम्हें, पर इकरार की ख़ुशी किसी और को मिली। सोचा ना था कभी, तुम्हारे प्यार में काटूँContinue reading “सोचा ना था…”

रात…

यहाँ सभी रात काटते हैं, सुबह के किरण के लिए, मैं तो इसीलिए सोता हूँ, ताकि सुबह देख सकूँ तुम्हें। दिल की बेचैनी हैं सिर्फ़, तेरे पास ना आने से, दूर रहकर भी दिल धड़क रहा, बस तेरे दिए याद के सहारे। क्या कभी सच समझोगी तुम, या यूँ रहोगी सिर्फ़ अपने बनाए ख़्वाब में,Continue reading “रात…”

प्यार की समझ…

कुछ लोग प्यार को, अपनी सहूलियत से करते है, जब समय मिले खुद से, तो प्यार करने का दिखावा करते है। क्या प्यार याद करने की चीज़ है, जो कभी कभी लोग याद की दिखावा करते है, हम तो यहाँप्यार में जीते है, अपनी हर साँस में उसे याद करते हैं। अब तो ये उसकीContinue reading “प्यार की समझ…”

कैसी है दिल कि मजबूरी…

सोचता हूँ कभी कभी, क्यों समझ नही पाई आप मुझे, क्या कुछ ग़लत किया प्यार कर मैंने, या आप समझना नहीं चाहती हो मेरी कही। काश समझ पाती हाल ए दिल कि कही, बनकर रह जाता मैं आपका आपके क़रीब, पर देखो कैसी है दिल कि मजबूरी, जो चाहता हैं आपको दिल से पर नहींContinue reading “कैसी है दिल कि मजबूरी…”