उल्टा बंदर … क्रमागत

उल्टा बंदर ने सूझ दिखाई, संग मालिक के पुँछ हिलाई,छोड़ अब सत्ता का लोभ, जा बैठा वो मालिक के गोद, वफ़ादारी की दी दुहाई, पुरानी याद मालिक को आई,उसकी उल्टी चाल को देख, मालिक भी ने उसे  गले लगाई, संग मिले सब होकर एक, बढ़ चले करने को खेल, बंदर अब नाच दिखा, विपक्ष के नेताओContinue reading “उल्टा बंदर … क्रमागत”

नेता

आज के ये नेता, खुद को  समझते है  अभिनेता,बुनियादो मुद्दे से दूर, राज करे वो हो अलबेला, जनता को भटका मत, इन्हें पता है सब कुछ,एक दिन ऐसा आएगा, तेरा राज पाठ होगा लूट, जनता अभी ठंडा, है अपने क़िस्मत पर शर्मिन्दा,ढूँडे अपनी क़िस्मत, रहने को वो मजबूर ज़िंदा, बुनियादी सुविधा नहीं, भूक मिटाने रोटीContinue reading “नेता”

इश्क़

इश्क़ है ज़रूरी? इसके बिना जीवन क्या पूरी?क्या ये है मजबूरी? या कहे ये दिलो कि दूरी, इश्क़ क्या मिलन की चाह? या दर्द भरी जीवन मेरी,क्या ये जीने की मजबूरी? या कोई चाह रह गई अधूरी, सच्ची इश्क़ रहे सदा अधूरी, मीठा मधुर मिलन की चाह,दिल संजोए विरह की आग, अश्रु आँखों  से बहेContinue reading “इश्क़”

उल्टा बंदर

देखो देखो बंदर आया, गुलाटिया मारे मन को भाया,नन्हे बच्चे खुश देख उन्हें, संग संग खूब  धूम मचाया, राजनीति का है ये बंदर, दिखे बड़ा ही मस्त कलंदर,कभी कूदे इस पार्टी, और कभी कूदे सत्ता के संग , मज़े से देखो उनकी शान, राजनीति के खिलाड़ी महान,ऊधम कूद मचा ये बंदर, अपनी कुर्सी का  जगहContinue reading “उल्टा बंदर”

क़ैद में है परिंदा

स्वतंत्रा और अभिमान लिए, ऊँचाइयों के शिखर पे,गगन को चूमने की चाहत, लिए उड़ता है परिंदा, हर ख़ुशी पंखों  तले, दुःख को झटक हवा में दे, ऊँचे गगन उड़ चली, बनाने अपनी नयी पहचान, अपने पथ पे अडिग, जीवन वृति में अग्रसर,हर ऊँचाइयों को छू, सफलता की छाँव तले, नज़र लगी अहेरी की,  लगी उड़ान पेContinue reading “क़ैद में है परिंदा”

आज़ादी

आज़ादी लिए मन, क्या हुए आज़ाद हम?अंग्रेज गए छोड़, कहने को आज़ाद हुए हम, कहने को मिली आज़ादी, पर क्या हुए आज़ाद हम,संकीर्ण मानसिकता को, क्या पार कर लिए हम, क्या मिली जीने की आज़ादी, क्या मिली सोच की आज़ादी,क्या जी सके खुल कर हम, या मर  रहे जी जी कर सब, क्या घूमे  यहाँContinue reading “आज़ादी”

तीसरी क़सम

कहते है ज़िंदगी के कुछ पल, याद रह जाते है,वक्त के साथ दिल में लगे, हर घाव भर जाते है, कुछ खट्टे कुछ मीठे, सिर्फ़ एहसास रह जाते है,कुछ पल सदा मेरे साथ, मेरे पास रह जाते है,  वो यादें कभी मुझे हँसाये, कभी मुझे रुलाए,दिल में बसे अरमान,  बस याद बन रह जाते है,Continue reading “तीसरी क़सम”

मेरा दफ़्तर

काम करूँ दिल लगा, मेरी कर्तव्य को देती परिणाम,एक प्यारी सी जगह है ये, कहते है इसको  दफ़्तर महान, मेरा दफ़्तर स्वर्ग समान, रखे ख़्याल सभी का यह,पर है यहाँ पे कुछ लोग, करते सदा अपने मन की, करने को काम बहुत, फिर भी काम नहीं करते ये लोग,अपना अपना क़िस्सा गाते, कमचोरि  के बनेContinue reading “मेरा दफ़्तर”

जीवन भ्रम

क्यूँ नहीं तुझे पता, एहसास मेरे दिल के दर्द की, क्यूँ मेरे दर्द को, अपने प्यार से तुम कम ना की, मैंने तो मौत जो देखा, अपने इतने क़रीब से, फिर भी जी रहा हूँ, बस  होने को तेरे क़रीब, नहीं बरदास्त कर पाऊँ मैं, अकेलेपन का ये दर्द,जब बाँट ना पाऊँ मैं, कुछ समय मेरे प्यारContinue reading “जीवन भ्रम”

तू कौन है

तू कौन है, जिसपर तड़पता है ये दिल मेरा,मिलन की आस लिए, जी रहा मजबूर सा, तू कौन है, किसने दिया है ये इजाज़त तुझे, मेरे दिल को खिलौना बना, तोड़ कर चली गयी, तू कौन है, तुमने इतना क्यों है रुलाया मुझे,अश्रु मेरा खून बन, अब जम गए तेरे याद में, तू कौन है,  क्योंContinue reading “तू कौन है”

नाराज़ दिल

नाराज़ दिल ढूँढे तुम्हें, सजा ख़्वाबों की जहां, कहने को बातें बहुत, दिल तोड़ने की दूँ सजा, गलती सारी थी मेरी, जो मैंने खुद पे किया भरोसा, भरोसा तोड़ कर, मुझे छोड़ जाने की है तेरी ये अदा, ख़ुदगर्ज़ सा होकर, खुद को क्यों अलग किया मुझसे,क्या कभी सोचा, कितना दर्द मिला मुझे तेरे दूर  जाने से,Continue reading “नाराज़ दिल”

नाराज़ दिल

नाराज़ दिल ढूँढे तुम्हें, सजा ख़्वाबों की जहां, कहने को बातें बहुत, दिल तोड़ने की दूँ सजा, गलती सारी थी मेरी, जो मैंने खुद पे किया भरोसा, भरोसा तोड़ कर, मुझे छोड़ जाने की है तेरी ये अदा, ख़ुदगर्ज़ सा होकर, खुद को क्यों अलग किया मुझसे,क्या कभी सोचा, कितना दर्द मिला मुझे तेरे दूर  जाने से,Continue reading “नाराज़ दिल”