खिलौना टूटा साथ छूटा

इक आधा खिलौना टूटे,तो क्यों रुककर शोक मनाए हम,बस बढ़ चले हम अपने धुन में,सुख दुःख को हृदय से लगाकर हम, खिलौना छूटा साथ छूटी हो गए हम समझदार,अब नहीं रोएँगे दिल से टूटे हम खिलौने के लिए,क्या खिलौने को दिल होता हैं,जो समझ सके मेरे दिल का दर्द, छोड़ो बेकार की बातें जीवन ना करे हम व्यर्थ,क्यों तोड़े दिल अपना टूटे खिलौने के लिए हम,बन समझदार आगे बढ़ चले हम,खिलौना में नहीं भावना हम व्यर्थ क्यों रोए, पर क्या जीवन की सच्चाई समझ सकता मेरा दिल,टूट गया ये दिल बनकर टुकड़े हज़ार,तेरे यूँ चले जाने से हैं बेक़रार मेरा दिल,पर क्या करूँ किस हक्क से मैं रोक लूँ तुझे, तुझे चाहने का हक्क नहीं दिया तुमने मुझे,ना पुकार सकता तुझे तेरे चले जाने के बाद,बस इक बार मुड़ का तू ज़रा सा देख मुझे,बिलखता बालक सा सहमा मैं लिया टूटा दिल अपना. कुणाल कुमार 

जीवन का सत्य

कौन सच है कौन कहे यहाँ  झूठ,क्यों मतलबी हैं सारी दुनिया सोचे अपना सुख,समझ की हैं कमी या ख़ुदगर्ज़ी हैं भरी,ये झूठी दुनिया ही  हैं जीवन का सत्य, उलझन में यहाँ फँसे हैं यहाँ सारे,लिए मन में दूसरों के लिए खोट,सच्चा दिल क्यों उदास खुद से,क्यों खोजे वो जीवन का सत्य, जाने क्यों इंसान नफ़रतContinue reading “जीवन का सत्य”

चाहत और कर्तव्य

चाहत दिल में लिए चल रहा अपने कर्तव्र्ग पथ पर,सोच रहा चाहत बड़ी या हैं कर्तव्य मुझसे बढ़कर,उधेड़ बुन और अफ़रा तफ़री में काट रहा ये  जीवन,क्यों ये कर्तव्य हैं अलग मेरी चाहत से इस जीवन में, शायद ये मेरा नसीब अच्छा जिसे मिली  सिर्फ़ कर्तव्य,चाहत तो सबको मिलती जिसका जीवन है सर्फ़ पाना,कर्तव्य करेContinue reading “चाहत और कर्तव्य”

लक्ष्य की ज़िद्द

मेरा लक्ष्य तुम्हीं हो,जीने की चाहत बन,इक दिन तुम मुझे चाहोगी,दिल में बसा लोगी तुम मुझे, मुझे मेरी लक्ष्य को पाना है,सपने को सच बनाना है,चाहत लक्ष्य का दिल लिए, कर्तव्य पथ पर बढ़े चलो तुम, चाहे रास्ते में हो कितने पनस,कठिनाइयाँ हो कितनी भी बड़ी,चाहे पैर हो निर्बल पथ पर,निश्चय को निर्बल ना करना, अपनेContinue reading “लक्ष्य की ज़िद्द”

तेरा साथ

तेरा साथ इक मधुर सा अहसास, बन गयी हो तुम मेरी दिल और जान,उफ़्फ़ तेरी ये ख़ूबशूरती तेरा ये अन्दाज़,घायल कर गयी मेरी रूह लूट गयी मेरी जवानी, तेरे नयनों की  गहराई,दिल करे डूबता ही रहु,तेरे लबों की मधुरता, जैसे खो जाऊँ इस सुंदरता, जाने क्यों समा गयी हो तुम दिल में मेरे,मेरे सोच अब है तेरी सोच से,कभी सोचा ना था चाहूँगा तुझे इतना,मेरा दिल ढूँढेगा खुद को तेरे दिल में, शायद मेरी चाहत में हैं कोई कमी,ना अहसास दिला पाया चाहत का तुझे,इक बार इकरार कर देती,बन जाती तुम मेरी ख़ुशी. कुणाल कुमार 

मेरी याद में रहोगी तुम

तुझे चाहा दिल से, ना समझा कभी अपने से अलग,पर देखो तेरी ये ज़िद्द,इकरार ना करने का हठ, रोया मैं खुद में पर हँसी भी आई मुझे,तेरे इस हठ का क्या करूँ मैं,जान बनकर जान ले चली तुम,शायद मेरी है ये नसीब पर मेरी याद में रहोगी तुम, मुझपे कभी विश्वास ना था,या ना थी भरोसा खुद पे,क्यों डर थी इकरार करने में,क्या खो देती तुम खुद को मुझमें, अगर तेरा दिल खोता मुझमें, ढूँढ लाता मैं खोज उसे,ना कुछ होने देता तुझे,जब तक तुम दिल से ना होती मेरी, दर्द इस बात का हैं,मेरे प्यार को ना मिली मंजिल,अपना माना मैंने तुम्हें दिल से,पर तेरे दिल में मुझे जगह ना मिली. कुणाल कुमार 

अनजान

अनजान  सा हूँ  मैं अपने ख़ुशी के लिए,डूबा डूबा सा रहता हूँ ग़म में तेरे जाने से, आँखे   नाम सा हुआ दिल में दर्द हैं छाई,मेरी अहसास मेरी पहचान बन गयी दर्द की, तेरी हर छोटी सी ख़ुशी हैं बनी मेरी पहचान,लब पे फीकी सी मुस्कान बस तेरे ख़ुशी  के लिए, अनजान सा हूँ मैं रहूँ अनजान अब तेरे लिए,तूँ ख़ुश रहे अपने दिल से हो मुझे भूलकर, शायद मेरी पहचान बनना  ना गवारा है तुम्हें,अपनी पहचान मुझे देकर यूँ क्यों चली तुम. कुणाल कुमार 

चुप्पी

छोड़ो उसे जो ना करती हो तुमसे प्यार,आगे बढ़ जाओ तुम भी छोड़ कर उसका साथ,पर क्या करूँ इस बेचारे दिल का अब मैं,जो हर हाल में प्यार तुम्हीं से करता है, ना जाने कब बन गयी हो तुम मेरी पहचान,धीरे धीरे तुम बन गयी हो मेरी जान,अब चाहती हो मय तुम्हें भूल जाऊँ,क्या जान बग़ैर ये ज़िंदगी जी पाएगा? चलो मन ली तेरी ये बातें,ना बोलूँगा तुझे, हैं कितना प्यार तुमसे,मेरी चुप्पी से अगर मिलेगी ख़ुशी तुम्हें,मैं रह लूँगा अकेला बनकर तुमसे अनजान. कुणाल कुमार 

दिल दरवाजा बंद खिड़की

दिल तेरा है कोमल, देखो जगह हैं यहाँ मेरे लिए,पर क्या करूँ देखो दरवाज़े पे तेरे सोच ने ताला लगा दिया,पर मैं भी चित चोर ना छोड़ूँगा कभी ज़िद मेरा,इक दिन ऐसा लाऊँगा जब तोड़ ताला तुम आओगी मेरे आग़ोश, माफ़ करो अगर लगी ये बात मेरी तुम्हें थोड़ी कड़वी,पर मैं भी मजबूर दिल के हाथ क्या करूँ तुम बता मुझे,जब भी सोचा करोगी तुम इकरार अपना कर मेरा प्यार,तुमने मुझे यू छोड़ दिया जैसे नहीं करती हो तुम प्यार मुझे, जाने दो किस आशा में जी रहा ये बेचारा दिल, दिल तोड़ने वाली से इसने लगा बैठा अपना दिल,कुछ खट्टी कुछ मीठी यादें दिल में मैं लिए,जीवन के पथ पे मैं अकेला चल पड़ा अपनी सोच संग लिए, पर इक बात तुम ध्यान रखना अपने भविष्य के लिए,प्यार करना आसान नहीं वो भी अपना दिल देकर,मैंने तुमसे प्यार किया अपने से बढ़कर,इकरार करती तो बनती इक रूहानी प्यार की निशानी. कुणाल कुमार