सफ़र का अंत

मेरी सफ़र का अंत, अब दिख रहा  हैं मुझे,कोरा काग़ज़ देख रहा, हाथ मेन स्याह लिए, क्या अपने समवेदना को, अक्षर में पिरोता रहूँ,या सारे संसार से, अपनी वेदना को मैं छिपा लूँ, हर सुरुआत ना होता अनंत, मेरी कविताओं का भी हुआ  अब अंत, हर बोल अब निकले सिर्फ़ खुद के लिए, सोच मेरी होContinue reading “सफ़र का अंत”

मैं थोड़ा अजीब हूँ

मैं थोड़ा अजीब सा हूँ, खुद के लिए फ़क़ीर सा हूँ,मेरा दिल थोड़ा पागल हैं, विचर रहा अपने ख़्वाब में, जिसे अपनाया दिल से, उसे भूल क्यों मैं जी रहा जीवन,मजबूर हूँ तक़दीर से मैं, उसकी तस्वीर को भूल ना सका, मन विचलित पागल इक पंक्षि, उड़ने की चाहत  दिल में लिए,पर मेरी पर बंधीContinue reading “मैं थोड़ा अजीब हूँ”

वो आएगी क्या

वो आएगी क्या, मेरी तनहाई की रौनक़ कभी लौटा पाएगी,खुद पे यक़ीन अब ना रहा, पागलपन हैं ये क्या मेरी दीवानगी, समझ अब कुछ ना आ रहा, भँवरे सा आसमाँ में मँडरा रहा,लक्ष्य का कोई पता नहीं, फिर भी यादें में मैं दिन बिता रहा, सोच में सिर्फ़ तेरी याद बसी, बची ना तेरे बिनContinue reading “वो आएगी क्या”

उदास मन

मेरा उदास मन पुछ रहा, मेरी तनहाई का ये आलम,किसकी याद में जी रहा तनहा, जिसे तेरी कोई फ़िक्र नहीं, रास्ते की कठनाइयो से तुम, ना घबराते थे कभी,फिर क्यों दिल तेरा रो रहा, तेरे प्यार के चले जने से, सोच उसकी अदा होगी  जुदा, पर जुदा कर चली तुझे तुझसे,अब यादों के मंदिर मेंContinue reading “उदास मन”

खुद की दुनिया

मैं अलबेला जी रहा अकेला, बसा खुद की इक दुनिया,इस दुनिया का पात्र भी मैं, इक नयी कहानी लिखी मैंने, इस कहानी का सार अनूठा, पर कहानी का हर पात्र हैं झूठा,कल्पना की इस दुनिया में, सिर्फ़ एक सच हैं ये मेरी सच्चाई, इक दिन वो आयीं, मेरी दुनिया के  रौनक़ को लौटाई,सतरंगी सपनो मेंContinue reading “खुद की दुनिया”

अपराध बोध

दिल में लिए आपाध का बोध, जीने को हूँ मजबूर,अपनी सजा के लिए, इंतज़ार क्यों मैं करूँ हो अधीर, शायद मेरी मुलाक़ात, ना होगी कभी तुझसे,तेरा सामना करने की हिम्मत, नहीं हैं मुझमें, खुद के नज़र से नज़र, ना मिला पा रहा हूँ  मैं,आइने में खुद को देख, खुद से घृणा हो रही मुझे, मेरीContinue reading “अपराध बोध”

धुँध

काली घटा सा धुँध, अब छाया हैं मेरे मन पे,कुछ सोच ना पा रहा, क्या रखा मेरे जीवन में, मेरी राह दिखाने वाली, अब छोड़ चली हैं मुझे,राह की कठिनाइयाँ, अब खुद सहना हैं मुझे, मेरा सपना कही खो सा गया, इस धुँध के तले,अंधकार सा छा गयी हैं, मेरे जीवन के भविष्य पे, क्याContinue reading “धुँध”

मुबारक

ऐ मेरी ज़िंदगी, हो तुझे मुबारक तेरी हर खुशी, मेरे पास तुझे देने को मेरे अलावा अब कुछ नहीं, क्या खुद को मिटा कर, ख़ुशियाँ तेरी लौटा सकता, अगर हाँ ये हैं सही, तो हंसकर मिटने को तयार हूँ मैं, तेरी हर सोच को हैं मेरी नमन, हंश कर सह लूँगा अब,मेरी जीवन जीने की ये सजा,Continue reading “मुबारक”

हंशी

चेहरे पे हो हंशी, लिए मन में थोड़ी सी खुशी,ओ मेरे जीवन तुझसे, क्या मैं नाराज़ था कभी, तेरी तारिफ़ क्या करूँ, मुझे मुझसे क्या खूब जुदा की,खुद पे क्या यक़ीन ना थी, या थी मुझमें ही कोई कमी, तेरी सोच को सलाम मेरी, पर मेरी सोच से देखो दुनिया कभी,कौन हैं  सच्चा कौन हैंContinue reading “हंशी”

समय

खुद पे जब हो यक़ीन, विश्वास लिए मन में,खुदा भी नमन करे तुम्हें, समय हो तेरे बस में, ये दोष समय का नहीं, हैं विश्वास की थोड़ी सी जो कमी,हिम्मत कर जिगर से, तुझमें समय से लड़ने की जो हैं ताक़त, अब कोई फ़रक नहीं, चाहो तुम मुझे या नहीं,पर खुद के विश्वास पे, नाContinue reading “समय”

समझ नहीं आता

राह कठिन हैं, मैं अग्रशर हूँ जो अपने पथ पर,थोड़ा सहम सा गया, देख पनस अनेक पथ पे, पाव के छाले से बहता खून, अपनी दर्द बयान करता,समझ नहीं आता, क्यों समझा नहीं पता खुद को मैं, क्या रोक नहीं सकता खुद को, पनस भरी राह चलने को,या दर्द सहने की हो गयी आदत, अबContinue reading “समझ नहीं आता”

क्या खोया क्या पाया

क्या खोया क्या पाया, कभी समझ ना पाया,क्यों सच बोलना मुझे, इतना दिल से रुलाया, मैंने बस इतना चाहा, सुनो तुम मेरे  दिल की आवाज़,समझ मुझे संग बैठ, खोजे इक प्यार से  भरी संसार, ख़ुदगर्ज़ मैं नहीं कभी, दिल से अपना बनाया तुझे,तेरे जाने का ये ग़म, पर कभी मैं छुपा नहीं पाया, दिल से आज चाहा मैंने, भूल मुझे जी अपनी ख़ुशी, तेरी यादें ही काफ़ी है, बन अब मेरे जीवन की खुशी, जीने की कोई लालसा नहीं, मरने का  अब कोई ग़म नहीं,बस रब से यही माँग रहा, मरते वख्त बस तेरी ही याद रहे. कुणाल कुमार