ख़ुशी क्रमागत…

चल परा नई खोज को, ऊँची उड़ान भर गगन के पार, आज़ाद पंक्षि सा बन, बनाने  को अपनी नई दुनिया, मैं छोड़ कर सारी बातें, भूल कर तेरी हर यादें,ख़ुश हूँ अपनी दुनिया में, तोड़ कर बंधन प्यार की, इसी पल से सोच लिया, जीना है सिर्फ़ मेरे लिए,अब ना कोई तड़प बची, मेरे जीवन केContinue reading “ख़ुशी क्रमागत…”

नशा

हर दर्द भूल, झूम रहा हूँ तेरे ख़्वाब में,दवा है तेरा प्यार , या नशा मेरे प्यार का, प्रहर्ष रहु हर जो प्रहर, नशे के अंचल में सर  को छिपा,तेरे याद को गोद समझ, सो रहा लिए जीवन का आनंद, यादें तेरी मलहम समान, जुदाई की ज़ख़्म को लगा,हर ग़म को भूल चला, प्यार के Continue reading “नशा”

पल

सोचूँ क्यों फिसल गया, मैं तेरे प्यार में,एक पल का प्यार, कुछ पल का इकरार, वो हसीन लम्हे, जब साथ थी तुम मेरे,तेरे जाने का वो पल, जी रहा याद में, सच्चाई भरे वो पल, थे क्या सच्चे? थे  क्या झूठे?मैंने दिल से प्यार किया, निभाया क्यों नहीं तुमने? एक बार ज़रा बोल दो, दिलContinue reading “पल”

प्यार की हँसी

मंद मंद जो मुश्कुराए, मुझे कुछ समझ ना आए,खुद पर हंसा मैंने, फ़लसफ़ा क्या यही प्यार का, यादें जो सम्भाल कर रखा, उन हसीन पलो का,जब रिश्ते बन फ़रिश्ते, तेरे होंठो  से छलक जाए, दिल की ख़ुशी मिले, जब तू पास आए,तेरे दूर जाने से, नयन में अश्रु उतर जाए, अब मुझे तू याद नाContinue reading “प्यार की हँसी”

चिता

सफ़ेद चादर में लिपटी, देखो इस जनाज़े को,सजने को चली ये, किसी के ख़्वाबों की चिता, कभी किसी रिश्ते में थी बंधी, उसे पीछे छोड़,रिश्ते की डोर तोड़, सजी मेरे सपनों की चिता, मंद मंद मुस्कुरा कर, छोड़ मुझे अपने हाल पर, रिश्ते की जनाज़े लिए, जी रहा मैं अपने गली,  रिश्ता जो थोड़ा सा तंगContinue reading “चिता”

आग

आग के है रूप अनेक, कभी बुरे कभी नेक,आग दिल में लगे, तो ये रिश्ते को जलाए, आग चूल्हे की, जो भूखे को खाना खिलाए, आग नफ़रत की, अपनों को दूर कर जाए, आग मिलन की, अपनों को क़रीब ले आए,आग सर्दी में, जीवन में गरमाहट लेकर आए, आग गर्मी की, जीवन को झुलसा सा जाए,आग Continue reading “आग”

मिलन

मिलन की चाह लिए, जी रहा हूँ मैं,क्या वो दिन आएगा, जब मिल सकेंगे हम, या मैं था एक झूठ, तेरे जीवन के पथ पे,भूल मुझे बढ़ आगे, ख़ुश हो तुम खुद पे, क्या मैं भोला, समझ ना पाया,ये सब थी, तेरी ही माया, पर तेरी याद ने, मुझे इतना सताया,समझ ना पाया, कैसे हैContinue reading “मिलन”

समझ

वक़्त की ये मार, सागर के थपेड़ों समान,कभी ख़ुशी दे, जैसे सागर छू रही किनारा,कभी ग़म की साया, जैसे सागर से छूटा किनारा,समझ ना पाया मैं, ज़िंदगी की ये अजब है माया, समझ नहीं आता, क्यों खोजूँ मैं अपनी ख़ुशी,साथ जो  मिला तुम्हारा,  हर ख़ुशी अब हुई अपनी,समझ नहीं आता, क्यों दुखी है मेरा मन,दूरContinue reading “समझ”

अश्रु

दिल के क्षितिज पे, जब दुःख बादल बन गहराए ,विरह कि बिजली कड़क, नयन से अश्रु बरस जाए, अश्रु का तू मोल समझ, मोती की चमक होती फीकी,इसकी माला बना मैं, मेरे भगवान को करूँ सदा अर्पित, तेरी यादों को मैं भूला सकूँ, अश्रु धार से मिटा सकूँ,इस अनमोल रतन को मैं, तुम्हारी याद मेंContinue reading “अश्रु”

नफ़रत

ये नफ़रत की दुनिया, जो बसी मेरे दिल में ,जिसे चाहु दिल से, मिली नफ़रत मुझे उससे, एक साथी चाहा मैंने, जो समझ सके मुझे,कुछ यादें बाँट सकूँ मैं, जो दिल से मैं अपने, नफ़रत बने निराली, घनघोर घटा सी काली,सोच को ये करे गंदा, ये चरित्र को करे नंगा, सोचूँ  क्या मैं कभी ऐसाContinue reading “नफ़रत”

लोग क्या कहेंगे

पावन पथ पे चल रहा, दिल में बसा  कर प्रीत की रीत,जान से प्यारी है, मुझे मेरी जीवन की ये प्यारी सी संगीत, हँसता रहा दिल में बसाकर, उसे अपना याद बनाकर,फिर ठिठक रोने लगा, क्योंकि हंसा तो लोग क्या कहेंगे, काम नहीं है जीवन में, दूसरों का सदा खिंचे टांग,लोगों के व्यंग सुन अब,Continue reading “लोग क्या कहेंगे”

धंधा है मंदा

धंधा है मंदा, सोच सोच हम  पछताए, विपणन वाले यहाँ, सभी को उल्लू बनाए, झूट झूट बोल, सारे महीने गमाए,उल्लू बना मुझे, बिलिंग ना कर पाए, कलेक्शन का छोड़ो, धंधा भी गमाए,वेंडर ने ली, ऊपर से अपनी  भी मरवाए. कुणाल कुमार  … … … … … … … … … … … … … … …Continue reading “धंधा है मंदा”