रास्ते का फ़क़ीर

ज़िंदगी की तंग गलियों में, चल रहा निर्भीक पथ पे,लपेटे अरमानो की चादर, याद भरे पल दिल में बसा, अपनी  खुशियों की झोली लिए, चले अपने पथ  अडिग,सुनहरे सपने में खोया राही, बन गया रास्ते का फ़क़ीर, मेरे यादों की दीवार में, सिर्फ़ तेरा नाम लिख डाला, तेरे दिए हर दर्द भूल, अपने  पथ पे होContinue reading “रास्ते का फ़क़ीर”

बंद दरवाजा, खुली खिड़की

बंद दरवाजा खुली खिड़की, दिल के इस मन्दिर में,ग़ैरों को रोका यहाँ, अपनों के लिए खुली है खिड़की, हर उम्र की मोर पे, अपनों के लिए खुली है खिड़की,हवा के झरोखे संग, हर ख़ुशियाँ दिल में समा जाए,  जीवन की इन धूप छाँव में, साथ निभाए ये मेरी ख़ुशी,खुद में अकेला जी रहा, दिल कीContinue reading “बंद दरवाजा, खुली खिड़की”

मध्यांतर या मध्य जीवन का अंतर

मध्यांतर हो या मध्य जीवन का कोई अंतर,जीवन बढ़े निरंतर, ख़ुशियाँ समेटे अपने अंदर,अपने अगले पथ पे अग्रसर, जी रही ज़िंदगी,ख़ुशी भरे हर लम्हे, या तन्हाई भरे अधूरे सपने, बचपन निश्चल, मन चंचल, उमंग भरे हर पल, समय बीते खेल कूद में, बीते समय हर मज़े में,ना कोई चिंता, ना कोई ग़म, याद रहे येContinue reading “मध्यांतर या मध्य जीवन का अंतर”

रोटी दूध

रोटी संग दूध मिले, संग लिए शक्कर की मिठास,जीवन की भी मधुरता, जब जिए सब हो संग संग, जैसे दूध संग रोटी मिले, घुल मिले मिले हो एक,जीवन की संज्ञा हो,  जब सारे रिश्ते हो जो नेक, झूठ कपट ना लालच हो, ना हो मन में द्वेष क्लेश,तभी मिले जीवन उद्देश, राह मिले सुखी जीवनContinue reading “रोटी दूध”

दोस्त या टोस्ट

दोस्त हो या टोस्ट, रिश्ते है करारे,यादें कुछ खट्टी है तो कुछ यादें मीठे, कुरकुरे सी ये दोस्ती, लगे बरे प्यारे,यादें संझा कर, हँसके जीवन सँवारे, दोस्त हो या टोस्ट, लगे स्वाद ज़बरदस्त,जैसे चाय संग टोस्ट, जीवन खुश संग दोस्त, छोटी मोटी झगड़े, रिश्ते बनाए अच्छे, दोस्ती का अर्थ, अब लगे मुझे सच्चे, जीवन की गाड़ी,Continue reading “दोस्त या टोस्ट”

क़ैद में है परिंदा

स्वतंत्रा और अभिमान लिए, ऊँचाइयों के शिखर पे,गगन को चूमने की चाहत, लिए उड़ता है परिंदा, हर ख़ुशी पंखों  तले, दुःख को झटक हवा में दे, ऊँचे गगन उड़ चली, बनाने अपनी नयी पहचान, अपने पथ पे अडिग, जीवन वृति में अग्रसर,हर ऊँचाइयों को छू, सफलता की छाँव तले, नज़र लगी अहेरी की,  लगी उड़ान पेContinue reading “क़ैद में है परिंदा”

इश्क़

इश्क़ है ज़रूरी? इसके बिना जीवन क्या पूरी?क्या ये है मजबूरी? या कहे ये दिलो कि दूरी, इश्क़ क्या मिलन की चाह? या दर्द भरी जीवन मेरी,क्या ये जीने की मजबूरी? या कोई चाह रह गई अधूरी, सच्ची इश्क़ रहे सदा अधूरी, मीठा मधुर मिलन की चाह,दिल संजोए विरह की आग, अश्रु आँखों  से बहेContinue reading “इश्क़”

पानी पूरी

पानी पूरी  . पानी पूरी, इसके बिना ज़िंदगी अधूरी,बच्चे बड़े खाए इसे, इसके स्वाद के मज़े उड़ाए, साथ मिले एक मसला पूरी, ये करे स्वाद को पूरी,अधूरी ख़्वाबों का मंजर, ख़ुशी का है ये समंदर, तीखी पानी मीठी  पानी, साथ है जो रगड़ा सयानी,मिल साथ देते है स्वाद, जीवन का भी संग देते पाठ, जीवनContinue reading “पानी पूरी”

टूटी सड़के, तंग गालियाँ

टूटी सड़के तंग गालियाँ,  लिए जीवन की बेबस घड़ियाँ,मैं निराला इस सड़क पे, पिए जीवन को भर प्याला में, अपनों को दिल में बिठाया, दिया  प्यार भरा संग,जीवन दिया प्यार दी, दिया इज़्ज़त भरी संसार, अपनी ख़ुशी त्याग, संग उसके दिल को लगाया,अपना संसार समझ, उसके घर को अपना बनाया, छोड़ आयी अपने माँ काContinue reading “टूटी सड़के, तंग गालियाँ”

राजनीति

राजनीति के ये लड्डू, मोतीचूर समान,चिपके साथ पार्टी बने, करने को राज, सत्ता जो बने चासनी, रखे नेता साथ, बने लड्डू सत्ता का, नेता खाए साथ, कुर्सी लालच देख, नेता भागे साथ,टूटी लड्डू अनेक, हुए सब नेता एक, टूटी लड्डू देख, छोटी पार्टी सब रोए पल पल,बड़ी लड्डू एक संग, जनता सेवा करे हर पल, कुणालContinue reading “राजनीति”

तू भी और निकली

मिला तुझसे अच्छा लगा, हुआ जो तुमसे प्यार,सबसे अलग लगा मुझे, लगा एक कली खिली, दिल के बगीचे में, तेरे नाम का एक कली खिली,बनके फूल सुगंध भरी, महके मेरा मन जो तेरे संग, खोजे नयन तेरी ख़ुशी, जो मेरे मन के द्वारे,जीने के इस डगर पे, संग जीने को तुम्हारे, कठोर किए मन, संझाContinue reading “तू भी और निकली”

उल्टा बंदर

देखो देखो बंदर आया, गुलाटिया मारे मन को भाया,नन्हे बच्चे खुश देख उन्हें, संग संग खूब  धूम मचाया, राजनीति का है ये बंदर, दिखे बड़ा ही मस्त कलंदर,कभी कूदे इस पार्टी, और कभी कूदे सत्ता के संग , मज़े से देखो उनकी शान, राजनीति के खिलाड़ी महान,ऊधम कूद मचा ये बंदर, अपनी कुर्सी का  जगहContinue reading “उल्टा बंदर”