बाइस्कोप

बाइस्कोप वाला आया, बाइस्कोप वाला आया,
गला फाड़ चिल्लाया, बाइस्कोप वाला आया,
ये बोल सुन, नन्हे मुन्ने बच्चों का मन ललचाया,
खेल कूद सब छोड़, दौर पड़े बाइस्कोप देखने,

बाइस्कोप की सुनहरी दुनिया, कहानी है अनेक.
पच्चीस पैसे का एक चक्र, देखे जो बच्चे मिलकर चार,
कभी कहानी उन वीरों की, कभी देश के क़िले महान,
कभी देखे मुंबई की शान, तो कभी देखे नेता महान,

कभी देखे राम की लीला, कृष्ण करे कभी रास लीला.
बचपन का मदमस्त जीवन, बाइस्कोप वाले के संग,
बच्चे जी ले अपना जीवन, अपने प्यारे ख़्वाबों के संग,
कभी बने झाँसी की रानी, कभी बने वो राजा महान,

कभी बने हीरो, तो कभी मुंबई के गलियों की शान.
खेल कूद में बीते जीवन, बाइस्कोप के संग संग,
अब ना मिले वो ख़ुशी, चाहे देखे कोई भी फ़िल्म,
अभी तो ये बचपन बीते, जो मोबाइल फ़ोन के संग,
खुशी ना मिली जो उन्हें, जीवन के ये प्यारे रंग.

कुणाल कुमार

सवेरा

ज़िंदगी के इस शाम में, मैं ढूंडू एक नयी सवेरा,
इस चाह में जी रहा, कोई बन जाए अपना मेरा,

सवार दे ये तनहा जीवन, अपना बन पास ,
अपने दिल में छिपा मुझे, जीवन की राह दिखा,

आएगी अब एक नयी सवेरा, हो उसका और मेरा,
संग साथ चलेंगे जीवन पथ पे, बनके सिर्फ़ तेरा,

तेरी हर ख़ुशी हो या ग़म, अब जी लेंगे संग,
तेरी पूजा करूँ जो मैं, अब होगी नयीं सवेरा.

कुणाल कुमार

सुंदरता क्या है?

दिल की खुशी  जब रिस्तो में  उतर  आये,
हंशी  खुशी,  जो  जीवन में  बस जाए,
हर पल हवा में उड़ता रहु,

सपनो की सागर  में  गोते खाऊ,
ढून्ढ  लाऊ  ख्वाब का वो पाल,
ये पल, जो निश्चल, है सुंदर.

कुणाल कुमार

समझ नहीं आता , हंसु या रो लूँ

समझ नहीं आता , हंसु या रो लूँ
ख़ुशी इतनी दूर, उदासी क्यों गहराई
कुछ बोलने का समय, दिया किसीने कब
जिसका भी साथ चाहा, सब यूँ दूर चले गए

नशीब मेरा खाता, यूँ लगता है अब
उदासी जो गहराई चादर में लिपटा हुआ सा
किस से थोड़ी बातें, थोड़ी हंसी बाँट लू
अब हर किसी में तन्हाइ नजर आता है

मेरी दर्द भी तेरी तरह निकला,
इक़रार से डरकर, अपनी पहचान छुपा बैठा
हर वख्त सोचता कल हमारा होगा
इस उम्मीद में अश्रु बनना भी भूल गया

कुणाल

जिंदिगी

जिंदिगी मे सदा मुस्कुराते रहो,
हर दर्द तो अपनी हँसी मे छुपाते रहो,
दिल का दर्द चेहरे पे   सके,
जिंदिगी को खुशनुमा बनाते रहो.

मेरे प्यार को इतना कमजोर समझ,
की तेरे दूर जाने से टूट जाये,
दिल में बसाया है, दिमाग मैं नहीं,
की तेरे दूर जाने से भूल जाऊ.


ज़िंदगी दूर ही सही, तेरी अहसास जो नजदीक है,
इस अहसास के सहारे, ज़िंदगी सवार लूंगा मैं,
तेरे साथ होने का गम, अपने ससो में छुपा लूंगा
इस जिंगदी मे अब जीने का मकसद, बस एक है
तेरी इंतज़ार में इस ज़िंदगी का सफ़र गुजार लूंगा मै.


तेरी खुशी हमेशा ऐसे ही रहे, ज़िंदगी,
तेरी हर गम तेरे से दूर रहे.
मेरी चाहत भी अब तेरी  खुशी में है, ज़िंदगी,
तेरी खुशी हमेशा ऐसे ही रहे.

सब्दो से भरी  मधुर आवाज में,
कभी डूबता चला गया, पता ही नहीं
सारे जहाँ को पीछे छोड़, सिर्फ तेरे इंतज़ार में
मैं ज़िंदगी को मुस्कुराते जीता चला गया, पता ही नहीं

मेरी ख़ुशी इतनी खामोश क्यों है,
मुझसे इतनी पढ़ेसान क्यों है.
क्या हुआ जो इंकार किया तुमने,
तेरे इंकार मैं भी, इंतज़ार की ख़ुशी है.

कुणाल कुमार

रुसवाई

तुम्हारी ये रुसवाई, अपना ना बनाने का जिद्द,
तुम्हारी ये ख़ामोशी, तुम्हारे दूर जाने का गम,
मेरे अश्रु भी सूख गए, ये अधूरेपन से,
इन तन्हाईयों से ज़रा पूछो, कितने सितम मेरे दिल पे हुए,
तेरी ये रुसवाई, अपना ना बनाने का जिद्द.

कुणाल कुमार

दीप

दीन जीवन के दुलारे
खो गये जो स्वप्न सारे,
ला सकोगे क्या उन्हें फिर खोज हृदय समीप?
गगन के जगमगाते दीप!

यदि मेरे स्वप्न पाते,
क्यों नहीं तुम खोज लाते,
वह घड़ी चिर शान्ति दे जो पहुँच प्राण समीप?
गगन के जगमगाते दीप!

यदि वह भी मिल रही है,
है कठिन पानासही है,
नींद को ही क्यों लाते खींच पलक समीप?
गगन के जगमगाते दीप!

लक्ष्य

चाहे डगर पे हो कितने पनस,
चाहे लोगो का हो ज्ञान तमस,
चाहे मुश्किल हो मेरा वख्त,
चाहे दिल में हो कसक,
अडिग अचल अपने पथ पे,
शीर्ष शिखर हैं मेरा लक्ष्य,
ना झुकुंगा अपन पथ पे,
अडिग अचल हर पल .. हर पल..

कुणाल कुमार

दूरी

कितना दर्द होता है आपके दूर जाने से,
एहसास मेरे रो पड़े आपके ना आने से,
यूं तन्हा सा लगता है मेरा ये जीवन,
आपके ना आने से …. आपके ना आने से….

कुणाल कुमार

क्यों?

क्यों उस पल से घृणा नहीं ?
जिस पल ने है छला मुझे.
क्यों जीने को हूँ मजबूर ?
जो तेरे बिना अधूरा हूँ.
क्यों  स्वपन मेरे अधूरे  है ?
जो तेरे मिलन को उत्सुक हूँ.
क्यों निर्दिष्ट  तेरे प्यार में ?
जो तेरे बिना अधूरा हूँ.

कुणाल कुमार

विकास

कमाई इतनी है नहीं,  फिर भी दिया समय पे कर,
देश की विकास में, सहयोग मेरा यह कर,
आशा लिए विकास, देश उत्थान  स्वप्नसंजोये,
बिना कोई डर, दिया समय पे मेरा कर,

विकास खोजने निकला मैं, अपनी स्वप्न  संजोये, 
ग़रीबीमजबूरीदेख, रुकगयासड़कपेखोय, 
सर नीची मेरा , लिए आँख में नमी,
सड़कों को निहार रहा, विकास के पथ पे, 
सड़कों में अभी काफ़ी गड्ढे, विकास की कमी,
ज़िंदगी सर्कस बन बैठा, इन गड्ढों के समीप,

क्या ये इच्छा शक्तिकीदूरी, याविकासकीमजबूरी, 
जो पथ भटक लक्ष्य को भूल,  विकास हुई ना पूरी,
पूछो इन पालक से, क्या थी इनकी मजबूरी,
जो विकास किया ना पूरी, जो विकास किया ना पूरी.

कुणाल कुमार 

संगनी

जीवन की मेरी संगनी, जीवन साथ निभाए,
अपना सा बना मुझे, जीने की राह दिखाए,
हर डगर पे, चले  जो वो साथ मेरे,
कभी साथी कभी शिक्षकबन, जीने की पाठ पढ़ाए, 
तेरी जन्मदिन हो मुबारक, लगी मेरी दुआयें, 
जीने की मेरी मक़सद, ओ तुझे मेरी उम्र लग जाए,
तेरी ये खुशी सदा, तेरा हर पल साथ निभाए.

कुणाल कुमार