सवाल कई और हैं

मेरे सवालों का जवाब ढूँढ रहा ये दिल,
उसके बेरुख़ी पे हँस रहा हैं मेरा तक़दीर,
क्या तुम्हें प्यार कर गुनाह किया ये दिल,
या अपनी चाहत के हद्द पार किया ये दिल,

कैसी मजबूरी है ये की अब कुछ और नहीं भाता,
तेरे सिवा मेरा दिल अब कुछ और नहीं सोच पता,
क्यों बन गयी हो तुम मेरी ज़िंदगी की हर सुख चैन,
अब तेरे बिना तो दिल मेरा बेचैन सा  नज़र आता,

क्या कमी हैं मेरे प्यार में ज़रा तुम बताओ मुझे,
अपना नहीं सकती तो ज़रा मेरी गलती मुझे समझाओ,
सवाल कई और है मेरे ज़हन में पर मेरा जवाब सिर्फ़ एक,
ये सब हो रहा है क्योंकि ये दिल प्यार सिर्फ़ तुम्हीं से किया.

के.के.

शायरी की डायरी – K.K Original

हम तो चले थे जमाने से अपना मुक़्क़दर बनाने,
हमें क्या पता था ज़माना खुद को ही घर कर लेगा,
*********
तुम्हारी छोटी छोटी सी बातें माहौल को रंगीन बना देती है,
नहीं तो और भी दर्द हैं दिल में जनाब जो मुझे गमगीन कर देती है,
*********
प्यार में बेचारा दिल ने खुद को मजनू समझ बैठा,
पर भूल गया लैला तो किसी और से ब्याही गयी थी,
*********
कैसी हैं मजबूरी ये मेरे हाल ए दिल का,
रक्त के जगह पर यादें संचारित कर रहा,
*********
तुम्हारे इंकार करने से क्या कम होगा मेरा प्यार तुमसे,
तुम्हारे जाने का ग़म भूल जाएँगे तुम्हारे यादों के सहारे,
*********
वो कहती हैं मुझसे की दूर चला जाऊँ उससे,
इससे तो अच्छा होता वो मुझे मेरी जान माँग लेती,
*********
क्योंकि कोई ज़िंदा कैसे रह सकता है रूह के बिना,
जैसे शरीर नहीं जी सकता रक्त प्रवाह के बीना,
*********
तुम्हारे चाहत में एक अजीब सा नशा हैं मेरी जान,
एक पल ना सोचूँ तुम्हें तो मेरा दिल दर्द से भर जाता है,
*********
सुबह से शाम तक जुदाई का ग़म मेरे दर्द दिल को देता है,
पर रात कि तुम आकर मुझे मेरे सपने में प्यार कर जाती हो,
*********
तुम्हें भूलना तो चाहता हूँ मैं दिल से,
पर कम्बख़्त दिल तो मैंने तुम्हें दे दिया,
*********
मेरा मुक़्क़दर हैं दूर खड़ा कर रहा इंतज़ार तुम्हारा,
समेट लो मुझे अपने बाँहों में और दे दो मुझे मक़सद नया,
*********
कभी कभी हँसी आती है मुझे खुद के बेबसी पर,
तुम्हारा प्यार दिखता है मुझे तुम्हारे इंकार के पार,
*********
तुम्हारी ख़ूबसूरती मुझे रूहानी क्यों लगती हैं,
जैसे देवी खुद आ गयी तुम बनकर मुझे अपनाने के लिए,
*********
जान बनकर जान के क़रीब हो तुम मेरे,
कही जान बनकर जान ही ना ले लो तुम मेरे,
*********

War Zone

I see my mind and heart always fight,
As their principles are never in sync, 
Many of my relationships got sacrificed,
And the purpose of my life got compromised,

Sometime I try to introspect what my inner feeling says,
Why not mind listens to heart and find the reason for why,
I do not get the answer till the date but I see the differ always,
Still looking for someone who will suit my heart and mind.

K.K. 

मेरा दर्द रो रहा

आज ना जाने क्यों मेरा दर्द रो रहा हैं,
आँखों के झरोखे से मेरा अश्रु बोल रहा,
अब नफ़रत को ना सह सकेगा ये दिल,
कमजोर होकर टूट यूँ बिखर सा गया,

बहुत देर कर दी समझने में तुम मुझे,
अब तो समझ मेरी खुद पर रो रही,
थोड़ा समझ तो लिया होता तुम मुझे,
दिल मंदिर में सजा रखता भूलने की जगह,

सभी सो रहे यहाँ पर मैं अपने दर्द पे रो रहा,
शब्द रूपी मोती को दर्द के धागे में पिरो रहा,
कविता लिख रहा हूँ पर मंज़िल भूल गया मैं,
प्यार तो कर लिया मैंने पर निभाने में चूक गया.

केके.

Listen Dear Why You Fear,

O Listen my dear why you have a fear,
Please understand me and come near,
I know you wanted time to understand me,
But how much time do you need to know me,

I can wait for you till I lasts my presence,
But why you want me to wait for your presence,
As I know you understand my emotional feeling,
Are you waiting to be dumped to come near me,

Please forget to be opportunistic and be realistic,
Accept the prevailing situation and know real me,
I will ensure your happiness and respect you as mine,
Also will never break your trust till the time i will be alive.

K.K.

अकेला

मैं अकेला बैठा सोच रहा था कैसी है ये मेरी मजबूरी,
वो मुझे नहीं चाहती हैं फिर भी दिल में क्यों हैं उसकी छवि,
इसीलिए कहते हैं प्यार अंधा होता हैं और समझ उसकी कुंठित,
पर अब तो दिल ने ठान लिया है खोज लेगी वो उसमें अपनी मंज़िल,

शायद तुम कभी समझ पाओगी क्या हैं तेरी अपनी ख़ुशी,
मुझे छोड़ जीवन में कभी तुम खोज पाओगी अपनी ख़ुशी,
जिस झूठ को तुम अपना समझ जी रही हो अपनी ज़िंदगी
वो झूठ ना सताए तुम्हें और बन जाए तुम्हारी दिल की ख़ुशी,

केके.

दो वक्त की कमाई

दो वक्त की कमाई से जो रोटी मुझे  मिलती थी,
शकुन भरा जीवन और गहराई भरी मेरी नींद थी,
चैन भरा जीवन गुज़र रहा था ख़ुशियों के पल समेटे, 
तभी कोरोना ने चुपके से मेरे जीवन में दस्तक दी, 

काम काज सब छूटा हो गए घर बैठे बेकार बेरोज़गार,
मेहनत करने की ईक्षा थी दिल में पर मेहनत ना कर पाए,
अपनी फूटी क़िस्मत को कोस देख रहा अपने बच्चों को,
बैठे थे चुपचाप मगर चेरे पे थे उनके भूख की दर्द भरी छाप,

जो मेरी कमाई छूटी लगा जैसे मेरा तक़दीर हो मुझसे रूठी,
खाने को रोटी तो दूर भूखा पेट मेरी नींद भी साथ ना निभाई,
चैन तो जैसे खुद को मिटा लिया हो अदृश मेरे जीवन पथ से,
अब तो तेरा सहारा हैं मालिक पार लगा दे हमारा इस बंदी से.

के. के.

While I am Alive

While I am alive, till that time I have my life,
So I forget all fears to die and live for a while,
I believe we can overcome the CORONA fears, 
So you all please do shoo away all your tears,

I believe one day all has to rest in peace,
Then why not greet humanity instead of greed,
Probably that is why we all are made as humans,
We have a power to think in a ways where humanity links.

Friends try to understand one think as a universal link,
If you do good to others you will always reap great future,
As what you do here will be repaid here only for sure,
As cycle of Moksha is impelled by the law of your karma.

K.K.

खंडर की ईंट

खंडर की हर ईंट बोले, इस क़िले  की कहानी,
अपनी ही पहचान लिए,  बोले अपनी ज़ुबानी,

कितने ही वीर देखे इसने, कितनी  ही लड़ाई,
मातृभूमि के सपूतों को, ये ईंट करे अभिनंदन,

इसने देखे राजा अनेक, कुछ नेक थे कुछ प्रचंड,
सारी यादें संजोए दिल, करे इतिहास का वर्णन,

इसने देखे प्यार भरे रंग,देखे छल करे अपने अपनों के  संग,
कभी सुनी बच्चों की किलकारी, कभी युद्ध की बिगुल भारी,

इसपे बैठ प्रेमी जोड़े, इसपे लिखे अपनी प्यार भरी बोल,
क़ैद किए अपनी पहचान, लिखे दो बोल अपने जान के नाम.

के.के

आईना

आईना दिखाए मुझे जीवन का चेहरा,
दिखाए चेहरे में छिपा हर भाव का  रंग,

कभी दिखे खिलता ख़ुशी, तो कभी  दिखे ग़म का राग,
कभी दिखे खिलता प्यार, कभी बिरह की व्यथा अपार,

कौन सच्चा कौन  झूठा, आईना इसकी पहचान बताए,
सच्चे को मिली हर ख़ुशी, झूठा जिए दर्द लिए जीवन,

आईना दिखाए मुझे मेरा बचपन, खेल कूद मज़े भरा क्षण,
कभी दिखे मेरी जवानी, जो समेटे मधुर एहसास अपने संग,

वो वक्त भी दिखे अभी, जब ना  हो कोई मेरे संग,
अकेलापन भारी पड़े, ना कोई बाँटे सके मेरा दुःख,

आगे दिखे बुढ़ापे की पीड़ा, लगे जीवन सिर्फ़ सुनसान,
जीने की अब ईक्षा नहीं, फिर भी  निकले ना मेरा प्राण.

के.के.

मुद्दा

मुद्दा ये नहीं, ये मेरे देश की कमजोरी  है,
भूक से तंग,  मेरे  ये जीने की मजबूरी है,

शिक्षण की कमी,  हर ख़्वाब अधूरी है,
जीवन में अंधकार, पर धर्म कर्म ज़रूरी है.

आपस में नफ़रत फैलते, क्या राजनीति ज़रूरी है,
हमें इस आडम्बर में, अब जीना क्या ज़रूरी है,  

छोड़ो ये भेद भाव,  डगर है कठिन,
देश की विकास पथ, सबका संग ज़रूरी.

कुणाल कुमार 

नम आँखे, भरी दिल

जिनकी उँगली पकड़ जो चलना शिखा मैं,
जिनसे थी मेरे बचपन की हँशी ख़ुशी की वेला,

जिनकी स्नेह के सहारे, कटी बचपन की घड़ी,
छोड़ चली मुझे अकेले, जीवन के इस पथ पे.

तनहा चुप चाप बैठा मैं, जो तेरी याद के सहारे,
अकेला इस दुःख के पल, जिए नम आँखे लिए.

अब दिल में  कोई आश नहीं, आऊँगा जल्द मैं,
तुमसे मिलने ये जीवन छोड़, स्वर्ग में अकेले. 

के.के.