क़ैद में है परिंदा

स्वतंत्रा और अभिमान लिए, ऊँचाइयों के शिखर पे,
गगन को चूमने की चाहत, लिए उड़ता है परिंदा,

हर ख़ुशी पंखों  तले, दुःख को झटक हवा में दे, 
ऊँचे गगन उड़ चली, बनाने अपनी नयी पहचान,

अपने पथ पे अडिग, जीवन वृति में अग्रसर,
हर ऊँचाइयों को छू, सफलता की छाँव तले,

नज़र लगी अहेरी की,  लगी उड़ान पे लगाम,
धीमे हुई वृति गति,  तंज  के चले अनेक बाण,

परिंदे की मयूशी देख, दिया ख़ुशी का दाना,
अहेरी ने क़ैद किया, परिंदे की ऊँची उड़ान.

कुणाल कुमार 

आज़ादी

आज़ादी लिए मन, क्या हुए आज़ाद हम?
अंग्रेज गए छोड़, कहने को आज़ाद हुए हम,

कहने को मिली आज़ादी, पर क्या हुए आज़ाद हम,
संकीर्ण मानसिकता को, क्या पार कर लिए हम,

क्या मिली जीने की आज़ादी, क्या मिली सोच की आज़ादी,
क्या जी सके खुल कर हम, या मर  रहे जी जी कर सब,

क्या घूमे  यहाँ बलात्कारी अनेक, क़ानून का सोया है विवेक,
क्या सब नेता भूले कर्म, बन सारे बेशर्म भूल गए अपना धर्म,

क्या निर्भया जी सकी, अपने निर्भय जीवन के संग,
क्या प्रियंका को मिली, अपने जीने की आज़ादी,

सच्ची आज़ादी से दूर, सभी है जीने को मजबूर,
जनता माँग रही आज़ादी, अपने जीने का हक़.

कुणाल कुमार 

तीसरी क़सम

कहते है ज़िंदगी के कुछ पल, याद रह जाते है,
वक्त के साथ दिल में लगे, हर घाव भर जाते है,

कुछ खट्टे कुछ मीठे, सिर्फ़ एहसास रह जाते है,
कुछ पल सदा मेरे साथ, मेरे पास रह जाते है, 

वो यादें कभी मुझे हँसाये, कभी मुझे रुलाए,
दिल में बसे अरमान,  बस याद बन रह जाते है,

कुछ एहसास बनी क़समें, जो ली मैंने ठान,
अब फिर कभी ना होने दे, दोबारा इसे जान,

पहली ज़ख़्म जो दिया तुमने, मुझे ग़लत बता,
मेरा दिल तोड़ कर बोला, ये जो है गंदी बात,

खाई क़सम जो मैंने, भूल कर भी किसी को,
अपना ना समझ कभी, ये सब है गंदी बात,

दूसरी क़सम जो खाई मैंने, ना कोशिश करूँ फिर कभी,
पत्थर दिल में प्यार भरी, फूल ना खिला सकूँ मैं कभी,

तीसरी क़सम है वो  ज़ख़्म, को दिया तुमने अभी,
किसी को अब मैं कभी सच्चा प्यार कारु नहीं.

कुणाल कुमार 

मेरा दफ़्तर

काम करूँ दिल लगा, मेरी कर्तव्य को देती परिणाम,
एक प्यारी सी जगह है ये, कहते है इसको  दफ़्तर महान,

मेरा दफ़्तर स्वर्ग समान, रखे ख़्याल सभी का यह,
पर है यहाँ पे कुछ लोग, करते सदा अपने मन की,

करने को काम बहुत, फिर भी काम नहीं करते ये लोग,
अपना अपना क़िस्सा गाते, कमचोरि  के बने मिसाल,

मैं मैं करते सारे लोग, ना कभी सोचे होने को एक,
एकजुटता की ताक़त भूल, अपना अपना करते लोग,

भूल बैठे एकता की ताक़त, अनेक बनकर रहते लोग,
सर्कस सा माहौल बना, हंश कर  देखो  ये जोकर लोग,

जब सब होकर करे कोई काम, होगा मेरे दफ़्तर का नाम,
प्यारे लोग समझो आप, काम करो सिर्फ़ छोड़ो बकवास.

कुणाल कुमार 

जीवन भ्रम

क्यूँ नहीं तुझे पता, एहसास मेरे दिल के दर्द की, 
क्यूँ मेरे दर्द को, अपने प्यार से तुम कम ना की,

मैंने तो मौत जो देखा, अपने इतने क़रीब से, 
फिर भी जी रहा हूँ, बस  होने को तेरे क़रीब,

नहीं बरदास्त कर पाऊँ मैं, अकेलेपन का ये दर्द,
जब बाँट ना पाऊँ मैं, कुछ समय मेरे प्यार के संग,

क्यों छीन ली मेरी ख़ुशियाँ सारी, तनहा क्यूँ बना डाला,
क्या तेरा प्यार सिर्फ़ दर्द भरा, एक एहसास का बसेरा है,

मुझे छोड़ क्या ज़िंदगी, आसान है जीना तेरे लिए,
जा छोड़ मुझे तू, मैं भी चलु तोड़ इस रिश्ते को.

कुणाल कुमार 

तू कौन है

तू कौन है, जिसपर तड़पता है ये दिल मेरा,
मिलन की आस लिए, जी रहा मजबूर सा,

तू कौन है, किसने दिया है ये इजाज़त तुझे, 
मेरे दिल को खिलौना बना, तोड़ कर चली गयी,

तू कौन है, तुमने इतना क्यों है रुलाया मुझे,
अश्रु मेरा खून बन, अब जम गए तेरे याद में,

तू कौन है,  क्यों तेरी यादें बसा मेरे दिल में,
जुदाई का ग़म, क्यों इतना सता रही है मुझे,

तू कौन है, क्यों ना कभी भूला पाऊँ मैं तुझे,
दिल चीर दिखाऊ तुझे, मेरे प्यार की सच्चाई.

कुणाल कुमार 

नाराज़ दिल

नाराज़ दिल ढूँढे तुम्हें, सजा ख़्वाबों की जहां, 
कहने को बातें बहुत, दिल तोड़ने की दूँ सजा,

गलती सारी थी मेरी, जो मैंने खुद पे किया भरोसा, 
भरोसा तोड़ कर, मुझे छोड़ जाने की है तेरी ये अदा,

ख़ुदगर्ज़ सा होकर, खुद को क्यों अलग किया मुझसे,
क्या कभी सोचा, कितना दर्द मिला मुझे तेरे दूर  जाने से,

मेरा घड़ी की आज भी, वक्त का काँटा रुक सा गया,
हर घड़ी समय को देखूँ, नयन में लिए तेरी तस्वीर लिए,

आस मिलन की दिल में सजा, जीने की सजा मिली मुझे,
ना है कोई ख़ुशी ना कोई ग़म, ये है मेरा वीरान सा जीवन.

कुणाल कुमार 

नाराज़ दिल

नाराज़ दिल ढूँढे तुम्हें, सजा ख़्वाबों की जहां, 
कहने को बातें बहुत, दिल तोड़ने की दूँ सजा,

गलती सारी थी मेरी, जो मैंने खुद पे किया भरोसा, 
भरोसा तोड़ कर, मुझे छोड़ जाने की है तेरी ये अदा,

ख़ुदगर्ज़ सा होकर, खुद को क्यों अलग किया मुझसे,
क्या कभी सोचा, कितना दर्द मिला मुझे तेरे दूर  जाने से,

मेरा घड़ी की आज भी, वक्त का काँटा रुक सा गया,
हर घड़ी समय को देखूँ, नयन में लिए तेरी तस्वीर लिए,

आस मिलन की दिल में सजा, जीने की सजा मिली मुझे,
ना है कोई ख़ुशी ना कोई ग़म, ये है मेरा वीरान सा जीवन.

कुणाल कुमार 

तमस

जीवन की राह तमस भरी, जैसे सूरज को लगा ग्रहण, 
उज्ज्वल भविष्य डूब सा गया, अंधकार में ढल सा गया,

मेरी ख़ुशियों का उदय,कब होगी तेरे तेज की लालिमा लिए,
तेरे पास होने का एहसास लिए, भविष्य कब निखरेगा मेरा,

जीवन का अहसास, ग़म में जी रहा लिए ख़ुशी की आस,
आ जाओ ना तुम, बनकर मेरे जीवन की एक नई सवेरा,

तेरी दर्शन की आस लिए, अब जी रहा हूँ जीवन ये बेकार,
छोड़ नहीं सकता प्राण, क्योंकि वो भी मैंने तेरे नाम किया,

बस अब इतना बता तू मुझे, क्या तू कभी अपनाओगी मुझे,
ना अगर है तो बोल मुझे, छोड़ चलु मैं इस जीवन की माया.

कुणाल कुमार 

आईने की तस्वीर

सुबह सुबह खुद से पूछा, बता तेरी क्या है  मर्ज़ी,
देखा आईने में खुद को, दिखा सिर्फ़ तेरी तस्वीर,

साफ़ किया आईने को, सोचा हैं नज़रों की दोष,
फिर भी  देखो दिखा मुझे, सिर्फ़ तेरी ही  तस्वीर,

झटपट डॉक्टर से मिल आया, आँखों  का चश्मा बनवाया,
चश्मा पहन आईना देखा फिरसे, सिर्फ़ दिखी तेरी ही तस्वीर,

कैसा ये धोखा हैं, या बस  गयी हो तुम मुझमें,
ये आईने की दोष है, या मेरे दिल में बसी सोच,

अब सोच बदल सकता नहीं, जीना संग लिए तेरी तस्वीर,
बस जो गयी हो तुम मुझमें, ना दूर कर सके कोई मुझे तुमसे.

कुणाल कुमार 

कोरा काग़ज़

कोरा काग़ज़ सा हैं, मेरी ज़िंदगी के हर लम्हे,
तन्हाई की दर्द समेटे, क्या लिखू इस दिल पे,

ख़ुशी के वो लम्हे, सोचा था लिखू इस दिल पे,
ग़म के निहरनी ने, वो ख़ुशी मिटा दिया दिल से,

क्या यादों की ख़ुशियाँ,  लिख सकता अपने दिल पे,
पर मेरे वादे ने कहा मुझसे, ना याद कर सकता मैं तुझे,

क्या सही हैं क्या ग़लत, नहीं पता हैं  ये मुझे अभी,
पर इतना जानू मैं, जीवन कोरा काग़ज़ हैं तेरे बिन.

कुणाल कुमार 

मध्यांतर या मध्य जीवन का अंतर

मध्यांतर हो या मध्य जीवन का कोई अंतर,
जीवन बढ़े निरंतर, ख़ुशियाँ समेटे अपने अंदर,
अपने अगले पथ पे अग्रसर, जी रही ज़िंदगी,
ख़ुशी भरे हर लम्हे, या तन्हाई भरे अधूरे सपने,

बचपन निश्चल, मन चंचल, उमंग भरे हर पल,
समय बीते खेल कूद में, बीते समय हर मज़े में,
ना कोई चिंता, ना कोई ग़म, याद रहे ये पल,
सुनहरे सपना नयन लिए, ये है प्यारा बचपन,

जवानी जीवन का वो पल, लगे सपनो सा सुंदर,
जीवन की इस वेला में, सुनहरे पल  नयन बसे,
वृति की  चिंता लिए, संग जिए प्यार के सपने,
अल्हड़पन भरी पल, दोस्तों के संग कटे ज़िंदगी,

जीवन अवस्था का है मध्य, समेटे जीवन का रहस्य,
छिपा बैठे कथानक मध्यांतर, जीवन चलचित्र की, 
यहाँ ख़ुशी वही रहे, जो समझ सके अपनापन का मूल्य, 
छोड़ घमंड ना मारो तंज, दिल में ना रखो कोई रंज,

जी लो ज़िंदगी, साथ लिए कुछ ख़ुशी और थोड़ा ग़म,
क्योंकि अगला पल है कठोर, निष्ठुर  निर्मोही  अभिमानी,
पता भी ना चले, कब छूट जाए जीवन जीने का संग,
जी लो ज़िंदगी हर पल, कभी लिए ख़ुशी तो कभी ग़म.

कुणाल कुमार