उल्टा बंदर

देखो देखो बंदर आया, गुलाटिया मारे मन को भाया,
नन्हे बच्चे खुश देख उन्हें, संग संग खूब  धूम मचाया,

राजनीति का है ये बंदर, दिखे बड़ा ही मस्त कलंदर,
कभी कूदे इस पार्टी, और कभी कूदे सत्ता के संग ,

मज़े से देखो उनकी शान, राजनीति के खिलाड़ी महान,
ऊधम कूद मचा ये बंदर, अपनी कुर्सी का  जगह बनाए,

इस बंदर का कमाल अनूठा, सबको ये बनाए झूठा,
झूठ बोले हर  घड़ी, अपनी ही ये बनाए घड़ी,

उसे क्या पता, क्या समय किसी का हुआ कभी,
उसकी घड़ी उल्टी पड़ी, अब पछताए उसका मन,

अब क्या करे ये बंदर, पछताए दुःख लिए अपने अंदर,
जाए किधर समझ ना पाए, घर छूटा सत्ता भी गमाए.

कुणाल कुमार 

राजनीति

राजनीति के ये लड्डू, मोतीचूर समान,
चिपके साथ पार्टी बने, करने को राज,

सत्ता जो बने चासनी, रखे नेता साथ, 
बने लड्डू सत्ता का, नेता खाए साथ,

कुर्सी लालच देख, नेता भागे साथ,
टूटी लड्डू अनेक, हुए सब नेता एक,

टूटी लड्डू देख, छोटी पार्टी सब रोए पल पल,
बड़ी लड्डू एक संग, जनता सेवा करे हर पल,

कुणाल कुमार 

साथ

वो साथ मेरे बैठे, ज़रा सा मुश्कुराय,
उसकी ये अदा, मुझे जो बड़ा भाए,

हर ग़म भूल, उनकी हँसी में खोने का मज़ा,
स्वर्ग की कोई अप्सरा वो मुझे नज़र आए,

मेरे ये दो नयन, उनकी मासूमियत पे अटके,
उनके अप्रतिम सौंदर्य के सागर में गोते खाए,

थम सा गया समय, जो उनकी मासूमियत निहारे,
मिले जिनको उनका साथ, है नसीब उसके भारी.

चाहा मन गले लगा लू, समेट लू उन्हें बहो में,
चूम लू उनको, दिल में भरे अपने एहसासों से,

अपने ख़्वाबों में भटक, ज़रा सहम सा गया,
यह क्या मैं अपने ख़्वाब पे, क्यों अटक गया,

दिल नादान उसे समझाया, प्यार से उसे मनाया,
ख़्वाब होते है सपने, जो बनते कभी नहीं अपने.

जीने की बस यही एक हक़ीक़त है,
ख़्वाब के आगे भी एक सुनहरा जीवन है.

कुणाल कुमार

इडली या डोसा

संध्या की वेला, मुझे भूक लगी ज़बरदस्त,
समझ नहीं आता, खाऊ इडली या डोसा,

गोल गोल इडली, देख मन ललचाया,
साथ में साम्भर और चटनी भी ले आया,

इधर देखूँ , डोसा मायूस नज़र आया,
उसे जो लगा, उसे कोई भी नहीं खाया,

मायूस डोसा का दर्द सह ना पाया,
बड़े चाव से उसे माँग कर मैं खाया,

पेट मैं हुई गुड गुड, हज़म ना कर पाया,
मैं ये सोचूँ, दोनो साथ मैं क्यों खाया.

इडली या डोसा ने मिल मज़ा चखाया,
पेटू बना मैं, बड़ा पछताया.. बड़ा पछताया.

कुणाल कुमार

नेता

आज के ये नेता, खुद को  समझते है  अभिनेता,
बुनियादो मुद्दे से दूर, राज करे वो हो अलबेला,

जनता को भटका मत, इन्हें पता है सब कुछ,
एक दिन ऐसा आएगा, तेरा राज पाठ होगा लूट,

जनता अभी ठंडा, है अपने क़िस्मत पर शर्मिन्दा,
ढूँडे अपनी क़िस्मत, रहने को वो मजबूर ज़िंदा,

बुनियादी सुविधा नहीं, भूक मिटाने रोटी नहीं,
तन ढकने को कपड़ा नहीं, जीते है वो अकेला,

पर वो दिन दूर नहीं, जब होगी जनता की बेला,
एकजुट हो निकल पड़े, माँगे अपने जीने का हक्क,

अब आए जनता की अयन, डर तुम आज के नेता,
तुमसे सब छिन, तुम हो जाएगा मजबूर अकेला.

कुणाल कुमार 

बाइस्कोप

बाइस्कोप वाला आया, बाइस्कोप वाला आया,
गला फाड़ चिल्लाया, बाइस्कोप वाला आया,
ये बोल सुन, नन्हे मुन्ने बच्चों का मन ललचाया,
खेल कूद सब छोड़, दौर पड़े बाइस्कोप देखने,

बाइस्कोप की सुनहरी दुनिया, कहानी है अनेक.
पच्चीस पैसे का एक चक्र, देखे जो बच्चे मिलकर चार,
कभी कहानी उन वीरों की, कभी देश के क़िले महान,
कभी देखे मुंबई की शान, तो कभी देखे नेता महान,

कभी देखे राम की लीला, कृष्ण करे कभी रास लीला.
बचपन का मदमस्त जीवन, बाइस्कोप वाले के संग,
बच्चे जी ले अपना जीवन, अपने प्यारे ख़्वाबों के संग,
कभी बने झाँसी की रानी, कभी बने वो राजा महान,

कभी बने हीरो, तो कभी मुंबई के गलियों की शान.
खेल कूद में बीते जीवन, बाइस्कोप के संग संग,
अब ना मिले वो ख़ुशी, चाहे देखे कोई भी फ़िल्म,
अभी तो ये बचपन बीते, जो मोबाइल फ़ोन के संग,
खुशी ना मिली जो उन्हें, जीवन के ये प्यारे रंग.

कुणाल कुमार

सवेरा

ज़िंदगी के इस शाम में, मैं ढूंडू एक नयी सवेरा,
इस चाह में जी रहा, कोई बन जाए अपना मेरा,

सवार दे ये तनहा जीवन, अपना बन पास ,
अपने दिल में छिपा मुझे, जीवन की राह दिखा,

आएगी अब एक नयी सवेरा, हो उसका और मेरा,
संग साथ चलेंगे जीवन पथ पे, बनके सिर्फ़ तेरा,

तेरी हर ख़ुशी हो या ग़म, अब जी लेंगे संग,
तेरी पूजा करूँ जो मैं, अब होगी नयीं सवेरा.

कुणाल कुमार

सुंदरता क्या है?

दिल की खुशी  जब रिस्तो में  उतर  आये,
हंशी  खुशी,  जो  जीवन में  बस जाए,
हर पल हवा में उड़ता रहु,

सपनो की सागर  में  गोते खाऊ,
ढून्ढ  लाऊ  ख्वाब का वो पाल,
ये पल, जो निश्चल, है सुंदर.

कुणाल कुमार

समझ नहीं आता , हंसु या रो लूँ

समझ नहीं आता , हंसु या रो लूँ
ख़ुशी इतनी दूर, उदासी क्यों गहराई
कुछ बोलने का समय, दिया किसीने कब
जिसका भी साथ चाहा, सब यूँ दूर चले गए

नशीब मेरा खाता, यूँ लगता है अब
उदासी जो गहराई चादर में लिपटा हुआ सा
किस से थोड़ी बातें, थोड़ी हंसी बाँट लू
अब हर किसी में तन्हाइ नजर आता है

मेरी दर्द भी तेरी तरह निकला,
इक़रार से डरकर, अपनी पहचान छुपा बैठा
हर वख्त सोचता कल हमारा होगा
इस उम्मीद में अश्रु बनना भी भूल गया

कुणाल

जिंदिगी

जिंदिगी मे सदा मुस्कुराते रहो,
हर दर्द तो अपनी हँसी मे छुपाते रहो,
दिल का दर्द चेहरे पे   सके,
जिंदिगी को खुशनुमा बनाते रहो.

मेरे प्यार को इतना कमजोर समझ,
की तेरे दूर जाने से टूट जाये,
दिल में बसाया है, दिमाग मैं नहीं,
की तेरे दूर जाने से भूल जाऊ.


ज़िंदगी दूर ही सही, तेरी अहसास जो नजदीक है,
इस अहसास के सहारे, ज़िंदगी सवार लूंगा मैं,
तेरे साथ होने का गम, अपने ससो में छुपा लूंगा
इस जिंगदी मे अब जीने का मकसद, बस एक है
तेरी इंतज़ार में इस ज़िंदगी का सफ़र गुजार लूंगा मै.


तेरी खुशी हमेशा ऐसे ही रहे, ज़िंदगी,
तेरी हर गम तेरे से दूर रहे.
मेरी चाहत भी अब तेरी  खुशी में है, ज़िंदगी,
तेरी खुशी हमेशा ऐसे ही रहे.

सब्दो से भरी  मधुर आवाज में,
कभी डूबता चला गया, पता ही नहीं
सारे जहाँ को पीछे छोड़, सिर्फ तेरे इंतज़ार में
मैं ज़िंदगी को मुस्कुराते जीता चला गया, पता ही नहीं

मेरी ख़ुशी इतनी खामोश क्यों है,
मुझसे इतनी पढ़ेसान क्यों है.
क्या हुआ जो इंकार किया तुमने,
तेरे इंकार मैं भी, इंतज़ार की ख़ुशी है.

कुणाल कुमार