रास्ते का फ़क़ीर

ज़िंदगी की तंग गलियों में, चल रहा निर्भीक पथ पे,
लपेटे अरमानो की चादर, याद भरे पल दिल में बसा,

अपनी  खुशियों की झोली लिए, चले अपने पथ  अडिग,
सुनहरे सपने में खोया राही, बन गया रास्ते का फ़क़ीर,

मेरे यादों की दीवार में, सिर्फ़ तेरा नाम लिख डाला, 
तेरे दिए हर दर्द भूल, अपने  पथ पे हो मैं अग्रसर, 

सदा तेरी ख़ुशी की चाह, दिल संग संजोए तेरा प्यार,
सदा करूँ दिल से  दुआ, तुझे  मिले तेरी हर ख़ुशी,

बस एक रहम कर, मुझसे मत छीन मेरी ये यादें,
तेरे याद ही बस अब मेरे जीने की एकमात्र सहारा है,

फ़क़ीर सा बन चला, लिए प्रभु  का ध्यान,
गली गली भटकूँ मैं, खोजे प्रभु किए ध्यान,

मैं भोला थोड़ा देर समझ, जीवन का  ये ज्ञान,
तुम्हीं तो हो मेरे प्रभु, करना हर पल तेरा ध्यान.

सवार बैठूँ तुम्हें, अपने दिल के बसे मंदिर में,
नित्य दिन पूजा करूँ, शुरू  करूँ दिन तेरे नाम,

मेरी हर ख़ुशी से पहले तू, मेरा नाम हो तेरे से,
तू है मेरे दिल की मल्लिका, मैं हूँ रास्ते  फ़क़ीर.

कुणाल कुमार 

बंद दरवाजा, खुली खिड़की

बंद दरवाजा खुली खिड़की, दिल के इस मन्दिर में,
ग़ैरों को रोका यहाँ, अपनों के लिए खुली है खिड़की,

हर उम्र की मोर पे, अपनों के लिए खुली है खिड़की,
हवा के झरोखे संग, हर ख़ुशियाँ दिल में समा जाए, 

जीवन की इन धूप छाँव में, साथ निभाए ये मेरी ख़ुशी,
खुद में अकेला जी रहा, दिल की ख़ुशी ख़्वाब संग बसी,

ख़्वाबों भरे सुनहरे सपने, इसपे हक्क हो सिर्फ़ अपनों  का,
अपना जो दिल के क़रीब, के लिए खुली है दिल खड़की,

कठोर नहीं मैं हृदय का कभी, पर मैंने झूठ कभी ना सही,
दिल का दरवाजा बंद किया, पर खुली रही दिल की खिड़की.

कुणाल कुमार 

मध्यांतर या मध्य जीवन का अंतर

मध्यांतर हो या मध्य जीवन का कोई अंतर,
जीवन बढ़े निरंतर, ख़ुशियाँ समेटे अपने अंदर,
अपने अगले पथ पे अग्रसर, जी रही ज़िंदगी,
ख़ुशी भरे हर लम्हे, या तन्हाई भरे अधूरे सपने,

बचपन निश्चल, मन चंचल, उमंग भरे हर पल,
समय बीते खेल कूद में, बीते समय हर मज़े में,
ना कोई चिंता, ना कोई ग़म, याद रहे ये पल,
सुनहरे सपना नयन लिए, ये है प्यारा बचपन,

जवानी जीवन का वो पल, लगे सपनो सा सुंदर,
जीवन की इस वेला में, सुनहरे पल  नयन बसे,
वृति की  चिंता लिए, संग जिए प्यार के सपने,
अल्हड़पन भरी पल, दोस्तों के संग कटे ज़िंदगी,

जीवन अवस्था का है मध्य, समेटे जीवन का रहस्य,
छिपा बैठे कथानक मध्यांतर, जीवन चलचित्र की, 
यहाँ ख़ुशी वही रहे, जो समझ सके अपनापन का मूल्य, 
छोड़ घमंड ना मारो तंज, दिल में ना रखो कोई रंज,

जी लो ज़िंदगी, साथ लिए कुछ ख़ुशी और थोड़ा ग़म,
क्योंकि अगला पल है कठोर, निष्ठुर  निर्मोही  अभिमानी,
पता भी ना चले, कब छूट जाए जीवन जीने का संग,
जी लो ज़िंदगी हर पल, कभी लिए ख़ुशी तो कभी ग़म.

कुणाल कुमार 

रोटी दूध

रोटी संग दूध मिले, संग लिए शक्कर की मिठास,
जीवन की भी मधुरता, जब जिए सब हो संग संग,

जैसे दूध संग रोटी मिले, घुल मिले मिले हो एक,
जीवन की संज्ञा हो,  जब सारे रिश्ते हो जो नेक,

झूठ कपट ना लालच हो, ना हो मन में द्वेष क्लेश,
तभी मिले जीवन उद्देश, राह मिले सुखी जीवन की,

बचपन को वो पल समेटे, माँ का प्यार दिल में छिपा,
निशावार्थ जीवन जीने की, यही तो है  वो पहली पाठ,

प्यार देने का नाम, लेने का ना हो लालच कभी,
हँसी ख़ुशी जीवन की घड़ी, काटो सब मिल बाँट,

जैसे रोटी संग दूध मिले, जीवन में भरो मिठास, 
जीवन जीने का सच, जब जिए हम अपनोंसंग.

कुणाल कुमार 

दोस्त या टोस्ट

दोस्त हो या टोस्ट, रिश्ते है करारे,
यादें कुछ खट्टी है तो कुछ यादें मीठे,

कुरकुरे सी ये दोस्ती, लगे बरे प्यारे,
यादें संझा कर, हँसके जीवन सँवारे,

दोस्त हो या टोस्ट, लगे स्वाद ज़बरदस्त,
जैसे चाय संग टोस्ट, जीवन खुश संग दोस्त,

छोटी मोटी झगड़े, रिश्ते बनाए अच्छे, 
दोस्ती का अर्थ, अब लगे मुझे सच्चे,

जीवन की गाड़ी, अब जो दौरे सरपट,
दोस्त साथ निभाए, कुछ  ना हो खटपट,

दोस्त एक  मिले तो, जीवन कटे हँस हंस कर,
जीवनसाथी दोस्त बने तो, जीवन निखर सा जाए.

कुणाल कुमार 

क़ैद में है परिंदा

स्वतंत्रा और अभिमान लिए, ऊँचाइयों के शिखर पे,
गगन को चूमने की चाहत, लिए उड़ता है परिंदा,

हर ख़ुशी पंखों  तले, दुःख को झटक हवा में दे, 
ऊँचे गगन उड़ चली, बनाने अपनी नयी पहचान,

अपने पथ पे अडिग, जीवन वृति में अग्रसर,
हर ऊँचाइयों को छू, सफलता की छाँव तले,

नज़र लगी अहेरी की,  लगी उड़ान पे लगाम,
धीमे हुई वृति गति,  तंज  के चले अनेक बाण,

परिंदे की मयूशी देख, दिया ख़ुशी का दाना,
अहेरी ने क़ैद किया, परिंदे की ऊँची उड़ान.

कुणाल कुमार 

इश्क़

इश्क़ है ज़रूरी? इसके बिना जीवन क्या पूरी?
क्या ये है मजबूरी? या कहे ये दिलो कि दूरी,

इश्क़ क्या मिलन की चाह? या दर्द भरी जीवन मेरी,
क्या ये जीने की मजबूरी? या कोई चाह रह गई अधूरी,

सच्ची इश्क़ रहे सदा अधूरी, मीठा मधुर मिलन की चाह,
दिल संजोए विरह की आग, अश्रु आँखों  से बहे अनवरत,

इस दर्द का महसूस अनुपम, रहे सदा हृदय समीप,
मजबूरी नहीं बाटने का, अप्रतिम ये एहसास है ये मेरी,

इश्क़ की तान अनोखा, जैसे हो कर्णप्रिय मधुर संगीत,
जीवन उज्ज्वल कर दे ये, जीने की चाह भर मेरे राह,

मिलन नहीं प्यार की मजबूरी, इसके  बिना भी प्यार है पूरी,
इश्क़ भरा ये मधुर एहसास, है ये मेरी जीवन चक्र की धुरी.

कुणाल कुमार 

पानी पूरी

पानी पूरी  . पानी पूरी, इसके बिना ज़िंदगी अधूरी,
बच्चे बड़े खाए इसे, इसके स्वाद के मज़े उड़ाए,

साथ मिले एक मसला पूरी, ये करे स्वाद को पूरी,
अधूरी ख़्वाबों का मंजर, ख़ुशी का है ये समंदर,

तीखी पानी मीठी  पानी, साथ है जो रगड़ा सयानी,
मिल साथ देते है स्वाद, जीवन का भी संग देते पाठ,

जीवन भी है स्वाद समेटे, ख़ुशियाँ दुःख संग साथ लिए, 
ख़ुशी मीठी पानी समान, दुःख की घड़ी तीखी समान,

स्वाद हर घड़ी का अनूठा, अनमोल ये जीवन के स्वाद,
सुख दुःख संग जीलो, जैसे खाए मीठी तीखी पानी पूरी.

कुणाल कुमार 

टूटी सड़के, तंग गालियाँ

टूटी सड़के तंग गालियाँ,  लिए जीवन की बेबस घड़ियाँ,
मैं निराला इस सड़क पे, पिए जीवन को भर प्याला में,

अपनों को दिल में बिठाया, दिया  प्यार भरा संग,
जीवन दिया प्यार दी, दिया इज़्ज़त भरी संसार,

अपनी ख़ुशी त्याग, संग उसके दिल को लगाया,
अपना संसार समझ, उसके घर को अपना बनाया,

छोड़ आयी अपने माँ का घर, संग छूटे अपने प्यारे,
सोचा था अपना बना, बसा लूँ एक छोटा संसार,

माँ के समान सास को माना, पिता समान ससुर,
पति पूजा देवता सा, ख़्याल में ना था कोई दूजा, 

ख़ुशी भरी थी कुछ घड़ी, मेरे जीवन के पथ पे,
हर पल चंचल सा जीवन, समय गुजरे हंस के,

चिड़िया सीं उड़ती थी मैं, ऊँचाइयों को छूने की चाहत,
घर सवार चली मैं, अपने भविष्य को साथ लिए निखार,

लगी किसी की ग्रहण अजीब, खोटा  हुआ मेरा नसीब,
शक और संशय ने लिया जन्म, जीवन हुआ जीना दुर्भर.

सास ससुर की खिटपिट प्रबल, छोड़े वयंग भरे बाण,
जीवन की इस दुविधा में, कोई ना दिया मेरा साथ,

सबने चाहा घर पे बैठूँ, सुनूँ उनके वयँग भरे बात,
लगा के रोक  जीवन वृति पे, सदा सुनूँ उनके बकवास,

जी ना पाई उनके ढंग से, छोड़ी ना जीवन का अधिकार,
स्वतंत्रा जीवन का मूल मंत्र, ये कभी भूल ना सकी मैं,

अपने वृति पथ पे चलना, ये जो कर्तव्य है मेरा,
इतनी बात समझ ना सकी, कोई साथ दे क्यों मेरा,

स्वतंत्रा विचार के संग, अग्रसर अपने जीवन पथ पे,
टूटी सड़के तंग गालियाँ,  लिए जीवन की बेबस घड़ियाँ.

कुणाल कुमार 

राजनीति

राजनीति के ये लड्डू, मोतीचूर समान,
चिपके साथ पार्टी बने, करने को राज,

सत्ता जो बने चासनी, रखे नेता साथ, 
बने लड्डू सत्ता का, नेता खाए साथ,

कुर्सी लालच देख, नेता भागे साथ,
टूटी लड्डू अनेक, हुए सब नेता एक,

टूटी लड्डू देख, छोटी पार्टी सब रोए पल पल,
बड़ी लड्डू एक संग, जनता सेवा करे हर पल,

कुणाल कुमार 

तू भी और निकली

मिला तुझसे अच्छा लगा, हुआ जो तुमसे प्यार,
सबसे अलग लगा मुझे, लगा एक कली खिली,

दिल के बगीचे में, तेरे नाम का एक कली खिली,
बनके फूल सुगंध भरी, महके मेरा मन जो तेरे संग,

खोजे नयन तेरी ख़ुशी, जो मेरे मन के द्वारे,
जीने के इस डगर पे, संग जीने को तुम्हारे,

कठोर किए मन, संझा किया मन की बात,
सोचा संग मिले मुझे, तेरे संग जीने की राह,

क्या पता तेरी ख़ुशी, है किसी और के संग, 
मुझे छोड़ चल परी, मेरी परी अपने के संग.

सोचा मैं ना था कभी, उसके पथ का राही, 
जीवन पथ पे उसने, अपनी राह चल पारी.

औरों की तरह, जो वो भी निकली,
तू भी मेरी कली, बस और निकली.

कुणाल कुमार 

उल्टा बंदर

देखो देखो बंदर आया, गुलाटिया मारे मन को भाया,
नन्हे बच्चे खुश देख उन्हें, संग संग खूब  धूम मचाया,

राजनीति का है ये बंदर, दिखे बड़ा ही मस्त कलंदर,
कभी कूदे इस पार्टी, और कभी कूदे सत्ता के संग ,

मज़े से देखो उनकी शान, राजनीति के खिलाड़ी महान,
ऊधम कूद मचा ये बंदर, अपनी कुर्सी का  जगह बनाए,

इस बंदर का कमाल अनूठा, सबको ये बनाए झूठा,
झूठ बोले हर  घड़ी, अपनी ही ये बनाए घड़ी,

उसे क्या पता, क्या समय किसी का हुआ कभी,
उसकी घड़ी उल्टी पड़ी, अब पछताए उसका मन,

अब क्या करे ये बंदर, पछताए दुःख लिए अपने अंदर,
जाए किधर समझ ना पाए, घर छूटा सत्ता भी गमाए.

कुणाल कुमार