तमस

जीवन की राह तमस भरी, जैसे सूरज को लगा ग्रहण, 
उज्ज्वल भविष्य डूब सा गया, अंधकार में ढल सा गया,

मेरी ख़ुशियों का उदय,कब होगी तेरे तेज की लालिमा लिए,
तेरे पास होने का एहसास लिए, भविष्य कब निखरेगा मेरा,

जीवन का अहसास, ग़म में जी रहा लिए ख़ुशी की आस,
आ जाओ ना तुम, बनकर मेरे जीवन की एक नई सवेरा,

तेरी दर्शन की आस लिए, अब जी रहा हूँ जीवन ये बेकार,
छोड़ नहीं सकता प्राण, क्योंकि वो भी मैंने तेरे नाम किया,

बस अब इतना बता तू मुझे, क्या तू कभी अपनाओगी मुझे,
ना अगर है तो बोल मुझे, छोड़ चलु मैं इस जीवन की माया.

कुणाल कुमार 

आईने की तस्वीर

सुबह सुबह खुद से पूछा, बता तेरी क्या है  मर्ज़ी,
देखा आईने में खुद को, दिखा सिर्फ़ तेरी तस्वीर,

साफ़ किया आईने को, सोचा हैं नज़रों की दोष,
फिर भी  देखो दिखा मुझे, सिर्फ़ तेरी ही  तस्वीर,

झटपट डॉक्टर से मिल आया, आँखों  का चश्मा बनवाया,
चश्मा पहन आईना देखा फिरसे, सिर्फ़ दिखी तेरी ही तस्वीर,

कैसा ये धोखा हैं, या बस  गयी हो तुम मुझमें,
ये आईने की दोष है, या मेरे दिल में बसी सोच,

अब सोच बदल सकता नहीं, जीना संग लिए तेरी तस्वीर,
बस जो गयी हो तुम मुझमें, ना दूर कर सके कोई मुझे तुमसे.

कुणाल कुमार 

कोरा काग़ज़

कोरा काग़ज़ सा हैं, मेरी ज़िंदगी के हर लम्हे,
तन्हाई की दर्द समेटे, क्या लिखू इस दिल पे,

ख़ुशी के वो लम्हे, सोचा था लिखू इस दिल पे,
ग़म के निहरनी ने, वो ख़ुशी मिटा दिया दिल से,

क्या यादों की ख़ुशियाँ,  लिख सकता अपने दिल पे,
पर मेरे वादे ने कहा मुझसे, ना याद कर सकता मैं तुझे,

क्या सही हैं क्या ग़लत, नहीं पता हैं  ये मुझे अभी,
पर इतना जानू मैं, जीवन कोरा काग़ज़ हैं तेरे बिन.

कुणाल कुमार 

मध्यांतर या मध्य जीवन का अंतर

मध्यांतर हो या मध्य जीवन का कोई अंतर,
जीवन बढ़े निरंतर, ख़ुशियाँ समेटे अपने अंदर,
अपने अगले पथ पे अग्रसर, जी रही ज़िंदगी,
ख़ुशी भरे हर लम्हे, या तन्हाई भरे अधूरे सपने,

बचपन निश्चल, मन चंचल, उमंग भरे हर पल,
समय बीते खेल कूद में, बीते समय हर मज़े में,
ना कोई चिंता, ना कोई ग़म, याद रहे ये पल,
सुनहरे सपना नयन लिए, ये है प्यारा बचपन,

जवानी जीवन का वो पल, लगे सपनो सा सुंदर,
जीवन की इस वेला में, सुनहरे पल  नयन बसे,
वृति की  चिंता लिए, संग जिए प्यार के सपने,
अल्हड़पन भरी पल, दोस्तों के संग कटे ज़िंदगी,

जीवन अवस्था का है मध्य, समेटे जीवन का रहस्य,
छिपा बैठे कथानक मध्यांतर, जीवन चलचित्र की, 
यहाँ ख़ुशी वही रहे, जो समझ सके अपनापन का मूल्य, 
छोड़ घमंड ना मारो तंज, दिल में ना रखो कोई रंज,

जी लो ज़िंदगी, साथ लिए कुछ ख़ुशी और थोड़ा ग़म,
क्योंकि अगला पल है कठोर, निष्ठुर  निर्मोही  अभिमानी,
पता भी ना चले, कब छूट जाए जीवन जीने का संग,
जी लो ज़िंदगी हर पल, कभी लिए ख़ुशी तो कभी ग़म.

कुणाल कुमार 

टूटी सड़के, तंग गालियाँ

टूटी सड़के तंग गालियाँ,  लिए जीवन की बेबस घड़ियाँ,
मैं निराला इस सड़क पे, पिए जीवन को भर प्याला में,

अपनों को दिल में बिठाया, दिया  प्यार भरा संग,
जीवन दिया प्यार दी, दिया इज़्ज़त भरी संसार,

अपनी ख़ुशी त्याग, संग उसके दिल को लगाया,
अपना संसार समझ, उसके घर को अपना बनाया,

छोड़ आयी अपने माँ का घर, संग छूटे अपने प्यारे,
सोचा था अपना बना, बसा लूँ एक छोटा संसार,

माँ के समान सास को माना, पिता समान ससुर,
पति पूजा देवता सा, ख़्याल में ना था कोई दूजा, 

ख़ुशी भरी थी कुछ घड़ी, मेरे जीवन के पथ पे,
हर पल चंचल सा जीवन, समय गुजरे हंस के,

चिड़िया सीं उड़ती थी मैं, ऊँचाइयों को छूने की चाहत,
घर सवार चली मैं, अपने भविष्य को साथ लिए निखार,

लगी किसी की ग्रहण अजीब, खोटा  हुआ मेरा नसीब,
शक और संशय ने लिया जन्म, जीवन हुआ जीना दुर्भर.

सास ससुर की खिटपिट प्रबल, छोड़े वयंग भरे बाण,
जीवन की इस दुविधा में, कोई ना दिया मेरा साथ,

सबने चाहा घर पे बैठूँ, सुनूँ उनके वयँग भरे बात,
लगा के रोक  जीवन वृति पे, सदा सुनूँ उनके बकवास,

जी ना पाई उनके ढंग से, छोड़ी ना जीवन का अधिकार,
स्वतंत्रा जीवन का मूल मंत्र, ये कभी भूल ना सकी मैं,

अपने वृति पथ पे चलना, ये जो कर्तव्य है मेरा,
इतनी बात समझ ना सकी, कोई साथ दे क्यों मेरा,

स्वतंत्रा विचार के संग, अग्रसर अपने जीवन पथ पे,
टूटी सड़के तंग गालियाँ,  लिए जीवन की बेबस घड़ियाँ.

के.के

तू भी और निकली

मिला तुझसे अच्छा लगा, हुआ जो तुमसे प्यार,
सबसे अलग लगा मुझे, लगा एक कली खिली,

दिल के बगीचे में, तेरे नाम का एक कली खिली,
बनके फूल सुगंध भरी, महके मेरा मन जो तेरे संग,

खोजे नयन तेरी ख़ुशी, जो मेरे मन के द्वारे,
जीने के इस डगर पे, संग जीने को तुम्हारे,

कठोर किए मन, संझा किया मन की बात,
सोचा संग मिले मुझे, तेरे संग जीने की राह,

क्या पता तेरी ख़ुशी, है किसी और के संग, 
मुझे छोड़ चल परी, मेरी परी अपने के संग.

सोचा मैं ना था कभी, उसके पथ का राही, 
जीवन पथ पे उसने, अपनी राह चल पारी.

औरों की तरह, जो वो भी निकली,
तू भी मेरी कली, बस और निकली.

के.के.

बाइस्कोप

बाइस्कोप वाला आया, बाइस्कोप वाला आया,
गला फाड़ चिल्लाया, बाइस्कोप वाला आया,
ये बोल सुन, नन्हे मुन्ने बच्चों का मन ललचाया,
खेल कूद सब छोड़, दौर पड़े बाइस्कोप देखने,

बाइस्कोप की सुनहरी दुनिया, कहानी है अनेक.
पच्चीस पैसे का एक चक्र, देखे जो बच्चे मिलकर चार,
कभी कहानी उन वीरों की, कभी देश के क़िले महान,
कभी देखे मुंबई की शान, तो कभी देखे नेता महान,

कभी देखे राम की लीला, कृष्ण करे कभी रास लीला.
बचपन का मदमस्त जीवन, बाइस्कोप वाले के संग,
बच्चे जी ले अपना जीवन, अपने प्यारे ख़्वाबों के संग,
कभी बने झाँसी की रानी, कभी बने वो राजा महान,

कभी बने हीरो, तो कभी मुंबई के गलियों की शान.
खेल कूद में बीते जीवन, बाइस्कोप के संग संग,
अब ना मिले वो ख़ुशी, चाहे देखे कोई भी फ़िल्म,
अभी तो ये बचपन बीते, जो मोबाइल फ़ोन के संग,
खुशी ना मिली जो उन्हें, जीवन के ये प्यारे रंग.

के.के.

सुंदरता क्या है?

दिल की खुशी  जब रिस्तो में  उतर  आये,
हंशी  खुशी,  जो  जीवन में  बस जाए,
हर पल हवा में उड़ता रहु,

सपनो की सागर  में  गोते खाऊ,
ढून्ढ  लाऊ  ख्वाब का वो पाल,
ये पल, जो निश्चल, है सुंदर.

के.के.

चाहत

जीने की चाहत लिए, तेरी मिलन कि आस लिए,
जी रहा हूँ मैं हर पल, बस तेरी इंतज़ार में,
ज़िंदगी कुछ रंग दिखा, मुझे उसके संग मिला,
मेरी चाहत की मंजिल, बस मुझे अब उससे मिला,

कही मिलन में देर ना हो, अरमान सारे ढेर ना हो,
जीने की चाह मेरी,  अनजाने में ये अधेड़  ना हो,
बिखर सा रह जाऊँ, टूटे हुए मेरे दिल के साथ,
जब तुम ना हो मेरे साथ , जब तुम ना हो मेरे साथ .

कुणाल कुमार 

अकेला

अपने पथ पे अग्रसर, जीवन जी रहा अकेला,
ख़ुशियाँ जो बाँट सभी से,  ये ग़म सभी है मेरा,
तुम्हारी याद संग, जीवन  का ग़म संजोए,
जीने को मजबूर, दिल ये मेरा रोए.

फिर भी ये दिल मेरा, चाहे हर पल तुझे,
तेरी याद में, दिल अंधकार में उलझ,
उदासी के बादल जो उमरे, घनघोर घटा सा,
अश्रु बन वर्षा, इन नयनों से बह निकले.

तू जा मुझे भूल, तेरे जीवन के पथ पे अग्रसर,
ख़ुशियाँ तेरी कदम चूमे, यही जो ख़्वाब मेरे,
कामयाबी की मिसाल, लोग देख जो बोले,
भूल जा मुझे, कभी याद ना आऊँ मैं तेरे.

के.के.

यादें

मूर्ख बन जी रहा था, तेरी याद में 
सोचा कभी तो क़िस्मत, देगी साथ मेरे ।
पर किधर मालूम, ऊँची कितनी दिवार 
दिवार तेरे अहम का, पार ना कर पाया मैं।।

एक दिन ऐसा आएगा, जब  ढूँढोगे मुझे 
लोक लज्जा अहम त्याग, प्यार करोगी मुझे ।
साथ सदा पाओगी, बस मुड़ कर देख मुझे
खड़ा अकेला उत्शुक, तेरी याद मन लिए।।

के.के.

जीवन का उद्देश्य

रात्रि का ये अंधेरा, काली स्याह समान,
मेरे मौन जीवन ,  खोजे सूर्य यामनी प्रहर, 
मेरे साँस की ये गंगा, बहे अनवरत हर पल,
डूबे हुए मेरे जीवन, जो खोजे नई सवेरा.

बढ़ता रहा जो पथ पे, सच के दीप संग,
संघर्ष भरा जीवन, लिए अभिलाषा जीने की,
लोक लाज का झूठआडम्बर, सबछोड़पीछे, 
जीवनपथपेअग्रसर,  लिएख़ुशियाँ  मेरेसंग.

कही दूर से दिखे मुझे, एक किरण छोटी सी आशा, 
झूठ आडम्बर की बाधा तोड़, जीवनपथ पे अग्रसर, 
अन्यायी साथी संग, दिल में न्याय की उम्मीद सँजोए,
चलते रहा मैं अपने पथ पे, संग अभिलाषा जीने की.

निशा प्रहर अब डूबने को है, आगे  जो नई सवेरा,
उदासी की स्याह डूबे, उद्गम  हुई खुशियों  भरी वेला,
जैसे सोना तपे कुंदन बने,  बने  येज़िंदगी सम्पूर्ण, 
जीवन जीते रहो कर्म पथ पे, बनो मनुष्य परिपूर्ण.

के.के.