यादें

मूर्ख बन जी रहा था, तेरी याद में 
सोचा कभी तो क़िस्मत, देगी साथ मेरे ।
पर किधर मालूम, ऊँची कितनी दिवार 
दिवार तेरे अहम का, पार ना कर पाया मैं।।

एक दिन ऐसा आएगा, जब  ढूँढोगे मुझे 
लोक लज्जा अहम त्याग, प्यार करोगी मुझे ।
साथ सदा पाओगी, बस मुड़ कर देख मुझे
खड़ा अकेला उत्शुक, तेरी याद मन लिए।।
कुणाल कुमार 

हँसी

मेरी ये हँसी,  अप्रतिम,  अनोखा, अलबेला,
साथ निभाए जीवन संग, हो अपनी ही बेला, 
रहे संग जो मेरे, कभी ना छोड़े मुझे अकेला ,
हँसी से मेरी दोस्ती, प्रगाढ़ मधुर अमी अनूठा.

अन्दाज़ मेरा निराला, हँसता  रहा जी भर ,
सभी को दिया , ये ख़ुशियाँ  से भरी पल, 
दुख दर्द सब भूल, हँसने की संज्ञा लागी, 
दूर मेरे से हँसी, होगी जब जीवन विगम.

कुणाल कुमार

जीवन का उद्देश्य

रात्रि का ये अंधेरा, काली स्याह समान,
मेरे मौन जीवन ,  खोजे सूर्य यामनी प्रहर, 
मेरे साँस की ये गंगा, बहे अनवरत हर पल,
डूबे हुए मेरे जीवन, जो खोजे नई सवेरा.

बढ़ता रहा जो पथ पे, सच के दीप संग,
संघर्ष भरा जीवन, लिए अभिलाषा जीने की,
लोक लाज का झूठआडम्बर, सबछोड़पीछे, 
जीवनपथपेअग्रसर,  लिएख़ुशियाँ  मेरेसंग.

कही दूर से दिखे मुझे, एक किरण छोटी सी आशा, 
झूठ आडम्बर की बाधा तोड़, जीवनपथ पे अग्रसर, 
अन्यायी साथी संग, दिल में न्याय की उम्मीद सँजोए,
चलते रहा मैं अपने पथ पे, संग अभिलाषा जीने की.

निशा प्रहर अब डूबने को है, आगे  जो नई सवेरा,
उदासी की स्याह डूबे, उद्गम  हुई खुशियों  भरी वेला,
जैसे सोना तपे कुंदन बने,  बने  येज़िंदगी सम्पूर्ण, 
जीवन जीते रहो कर्म पथ पे, बनो मनुष्य परिपूर्ण.

कुणाल कुमार 

ज़िंदगी

ना जाने क्यूँ अजीब सी है मेरी ज़िंदगी,
तेरे पास होने का एहसास, पर तू दूर खडी,
मैं तो हूँ यहाँ, पर मेरा मन बहुत दूर कहीं,
तेरी याद में बस, अब जीता हूँ  मेरी ज़िंदगी.

बहुत से रिश्ते दिए, पर प्यार मिली नहीं,
ज़िंदगी इम्तिहान बनी, प्रश्न  एक एहसास,
उत्तर खोजने को, निकला खुद को भूल,
हंसते हुए तुम, टाल गयी मेरे प्रश्न क्यों? 

क्या मेरे चाह में कमी, या थी राह दुर्गमी,
जो दो डगर साथ भी , दे  ना सकी तुम,
फिर भी क्यों, हर पल है तेरा इंतज़ार,
सोचूँ तेरी खुशी, और ग़म सारे हो मेरे.

कुणाल कुमार 

नम आँखे, भरी दिल

जिनकी उँगली पकड़ जो चलना शिखा मैं,
जिनसे थी मेरे बचपन की हँशी ख़ुशी की वेला,

जिनकी स्नेह के सहारे, कटी बचपन की घड़ी,
छोड़ चली मुझे अकेले, जीवन के इस पथ पे.

तनहा चुप चाप बैठा मैं, जो तेरी याद के सहारे,
अकेला इस दुःख के पल, जिए नम आँखे लिए.

अब दिल में  कोई आश नहीं, आऊँगा जल्द मैं,
तुमसे मिलने ये जीवन छोड़, स्वर्ग में अकेले. 

कुणाल कुमार 

प्यार की हद्द

ख़ुशी देती है ये मंजिल , रास्ते जो दर्द भरे,
उड़ने की चाहत संजोए, उड़ूँ गगन के पार,

पतंग सा मनचला, लहराता पवन के संग ,
पर क्या जानू, डोर बंधी क़िस्मत  के  संग,

ये जो दो पल का प्यार दिया,  तुमने मुझे तभी,
दिल में सम्भाल कर रखा, इज़्ज़त के सहित.

तेरे प्यार भरी ये छाया, एहसास भरी प्यारी आलिंगन,
जैसे भरा कोई मधुर प्याला,  अनूठा अमी स्वाद समान,

सुख दुःख एक चक्र, सुख के बाद दुःख का वक्त,
मेरा सुख छनिक  निकला, दुःख का बना पहाड़.

क़िस्मत क्या साथ देगी, तुम्हारे दूर चलें जाने से, 
कटी पतंग सा छोड़ मुझे, जीते जी मार जाने को,

समय थम सा गया,चाहत के बादल तले,
उमर घूमर काले बादल, बरसे नयन तले,

दर्द भरे मेरे नयन, उससे अश्रु टपके मोती समान,
दिल से आह निकले,  हुए दिल के टुकड़े हज़ार.

अब बस भी करो जान, एक बात मान भी लो मेरी,
संग आ जाओ मेरे, दे दो मेरे जीवन को नयी पहचान.

अब जीने का जी नहीं, बिन तेरे छाँव तले,
शीतलता प्यार भरी, मधुर स्वभाव समेटे.

ना आओगी अगर जीते जी, तो ले लो मेरी जान,
जी ना पाऊँ तेरे बिन, दे दो मुझे अग्नि को दान.

अगर तुमने से ना हो पाए, एक बार बोलो तो सही,
दे दूँगा मैं अपनी जान,  हँसते हुए तेरे प्यार में.

कुणाल कुमार