मेरा दर्द रो रहा

आज ना जाने क्यों मेरा दर्द रो रहा हैं,आँखों के झरोखे से मेरा अश्रु बोल रहा,अब नफ़रत को ना सह सकेगा ये दिल,कमजोर होकर टूट यूँ बिखर सा गया, बहुत देर कर दी समझने में तुम मुझे,अब तो समझ मेरी खुद पर रो रही,थोड़ा समझ तो लिया होता तुम मुझे,दिल मंदिर में सजा रखता भूलने की जगह, सभी सो रहे यहाँ पर मैं अपने दर्द पे रो रहा,शब्द रूपी मोती को दर्द के धागे में पिरो रहा,कविता लिख रहा हूँ पर मंज़िल भूल गया मैं,प्यार तो कर लिया मैंने पर निभाने में चूक गया. के. के.

अकेला

मैं अकेला बैठा सोच रहा था कैसी है ये मेरी मजबूरी,वो मुझे नहीं चाहती हैं फिर भी दिल में क्यों हैं उसकी छवि,इसीलिए कहते हैं प्यार अंधा होता हैं और समझ उसकी कुंठित,पर अब तो दिल ने ठान लिया है खोज लेगी वो उसमें अपनी मंज़िल, शायद तुम कभी समझ पाओगी क्या हैं तेरी अपनी ख़ुशी,मुझे छोड़ जीवन में कभी तुम खोज पाओगी अपनी ख़ुशी,जिस झूठ को तुम अपना समझ जी रही हो अपनी ज़िंदगी, वो झूठ ना सताए तुम्हें और बन जाए तुम्हारी दिल की ख़ुशी, के. के.

दो वक्त की कमाई

दो वक्त की कमाई से जो रोटी मुझे  मिलती थी,शकुन भरा जीवन और गहराई भरी मेरी नींद थी,चैन भरा जीवन गुज़र रहा था ख़ुशियों के पल समेटे, तभी कोरोना ने चुपके से मेरे जीवन में दस्तक दी,  काम काज सब छूटा हो गए घर बैठे बेकार बेरोज़गार,मेहनत करने की ईक्षा थी दिल में पर मेहनत नाContinue reading “दो वक्त की कमाई”

खंडर की ईंट

खंडर की हर ईंट बोले, इस क़िले  की कहानी,अपनी ही पहचान लिए,  बोले अपनी ज़ुबानी, कितने ही वीर देखे इसने, कितनी  ही लड़ाई,मातृभूमि के सपूतों को, ये ईंट करे अभिनंदन, इसने देखे राजा अनेक, कुछ नेक थे कुछ प्रचंड,सारी यादें संजोए दिल, करे इतिहास का वर्णन, इसने देखे प्यार भरे रंग,देखे छल करे अपने अपनोंContinue reading “खंडर की ईंट”

आईना

आईना दिखाए मुझे जीवन का चेहरा,दिखाए चेहरे में छिपा हर भाव का  रंग, कभी दिखे खिलता ख़ुशी, तो कभी  दिखे ग़म का राग,कभी दिखे खिलता प्यार, कभी बिरह की व्यथा अपार, कौन सच्चा कौन  झूठा, आईना इसकी पहचान बताए,सच्चे को मिली हर ख़ुशी, झूठा जिए दर्द लिए जीवन, आईना दिखाए मुझे मेरा बचपन, खेल कूदContinue reading “आईना”

मुद्दा

मुद्दा ये नहीं, ये मेरे देश की कमजोरी  है,भूक से तंग,  मेरे  ये जीने की मजबूरी है, शिक्षण की कमी,  हर ख़्वाब अधूरी है,जीवन में अंधकार, पर धर्म कर्म ज़रूरी है. आपस में नफ़रत फैलते, क्या राजनीति ज़रूरी है,हमें इस आडम्बर में, अब जीना क्या ज़रूरी है,   छोड़ो ये भेद भाव,  डगर है कठिन,देशContinue reading “मुद्दा”

नम आँखे, भरी दिल

जिनकी उँगली पकड़ जो चलना शिखा मैं,जिनसे थी मेरे बचपन की हँशी ख़ुशी की वेला, जिनकी स्नेह के सहारे, कटी बचपन की घड़ी,छोड़ चली मुझे अकेले, जीवन के इस पथ पे. तनहा चुप चाप बैठा मैं, जो तेरी याद के सहारे,अकेला इस दुःख के पल, जिए नम आँखे लिए. अब दिल में  कोई आश नहीं,Continue reading “नम आँखे, भरी दिल”

उल्टा बंदर … क्रमागत

उल्टा बंदर ने सूझ दिखाई, संग मालिक के पुँछ हिलाई,छोड़ अब सत्ता का लोभ, जा बैठा वो मालिक के गोद, वफ़ादारी की दी दुहाई, पुरानी याद मालिक को आई,उसकी उल्टी चाल को देख, मालिक भी ने उसे  गले लगाई, संग मिले सब होकर एक, बढ़ चले करने को खेल, बंदर अब नाच दिखा, विपक्ष के नेताओContinue reading “उल्टा बंदर … क्रमागत”

नेता

आज के ये नेता, खुद को  समझते है  अभिनेता,बुनियादो मुद्दे से दूर, राज करे वो हो अलबेला, जनता को भटका मत, इन्हें पता है सब कुछ,एक दिन ऐसा आएगा, तेरा राज पाठ होगा लूट, जनता अभी ठंडा, है अपने क़िस्मत पर शर्मिन्दा,ढूँडे अपनी क़िस्मत, रहने को वो मजबूर ज़िंदा, बुनियादी सुविधा नहीं, भूक मिटाने रोटीContinue reading “नेता”