क़ैद में है परिंदा

स्वतंत्रा और अभिमान लिए, ऊँचाइयों के शिखर पे,गगन को चूमने की चाहत, लिए उड़ता है परिंदा, हर ख़ुशी पंखों  तले, दुःख को झटक हवा में दे, ऊँचे गगन उड़ चली, बनाने अपनी नयी पहचान, अपने पथ पे अडिग, जीवन वृति में अग्रसर,हर ऊँचाइयों को छू, सफलता की छाँव तले, नज़र लगी अहेरी की,  लगी उड़ान पेContinue reading “क़ैद में है परिंदा”

आज़ादी

आज़ादी लिए मन, क्या हुए आज़ाद हम?अंग्रेज गए छोड़, कहने को आज़ाद हुए हम, कहने को मिली आज़ादी, पर क्या हुए आज़ाद हम,संकीर्ण मानसिकता को, क्या पार कर लिए हम, क्या मिली जीने की आज़ादी, क्या मिली सोच की आज़ादी,क्या जी सके खुल कर हम, या मर  रहे जी जी कर सब, क्या घूमे  यहाँContinue reading “आज़ादी”

तीसरी क़सम

कहते है ज़िंदगी के कुछ पल, याद रह जाते है,वक्त के साथ दिल में लगे, हर घाव भर जाते है, कुछ खट्टे कुछ मीठे, सिर्फ़ एहसास रह जाते है,कुछ पल सदा मेरे साथ, मेरे पास रह जाते है,  वो यादें कभी मुझे हँसाये, कभी मुझे रुलाए,दिल में बसे अरमान,  बस याद बन रह जाते है,Continue reading “तीसरी क़सम”

मेरा दफ़्तर

काम करूँ दिल लगा, मेरी कर्तव्य को देती परिणाम,एक प्यारी सी जगह है ये, कहते है इसको  दफ़्तर महान, मेरा दफ़्तर स्वर्ग समान, रखे ख़्याल सभी का यह,पर है यहाँ पे कुछ लोग, करते सदा अपने मन की, करने को काम बहुत, फिर भी काम नहीं करते ये लोग,अपना अपना क़िस्सा गाते, कमचोरि  के बनेContinue reading “मेरा दफ़्तर”

जीवन भ्रम

क्यूँ नहीं तुझे पता, एहसास मेरे दिल के दर्द की, क्यूँ मेरे दर्द को, अपने प्यार से तुम कम ना की, मैंने तो मौत जो देखा, अपने इतने क़रीब से, फिर भी जी रहा हूँ, बस  होने को तेरे क़रीब, नहीं बरदास्त कर पाऊँ मैं, अकेलेपन का ये दर्द,जब बाँट ना पाऊँ मैं, कुछ समय मेरे प्यारContinue reading “जीवन भ्रम”

तू कौन है

तू कौन है, जिसपर तड़पता है ये दिल मेरा,मिलन की आस लिए, जी रहा मजबूर सा, तू कौन है, किसने दिया है ये इजाज़त तुझे, मेरे दिल को खिलौना बना, तोड़ कर चली गयी, तू कौन है, तुमने इतना क्यों है रुलाया मुझे,अश्रु मेरा खून बन, अब जम गए तेरे याद में, तू कौन है,  क्योंContinue reading “तू कौन है”

नाराज़ दिल

नाराज़ दिल ढूँढे तुम्हें, सजा ख़्वाबों की जहां, कहने को बातें बहुत, दिल तोड़ने की दूँ सजा, गलती सारी थी मेरी, जो मैंने खुद पे किया भरोसा, भरोसा तोड़ कर, मुझे छोड़ जाने की है तेरी ये अदा, ख़ुदगर्ज़ सा होकर, खुद को क्यों अलग किया मुझसे,क्या कभी सोचा, कितना दर्द मिला मुझे तेरे दूर  जाने से,Continue reading “नाराज़ दिल”

नाराज़ दिल

नाराज़ दिल ढूँढे तुम्हें, सजा ख़्वाबों की जहां, कहने को बातें बहुत, दिल तोड़ने की दूँ सजा, गलती सारी थी मेरी, जो मैंने खुद पे किया भरोसा, भरोसा तोड़ कर, मुझे छोड़ जाने की है तेरी ये अदा, ख़ुदगर्ज़ सा होकर, खुद को क्यों अलग किया मुझसे,क्या कभी सोचा, कितना दर्द मिला मुझे तेरे दूर  जाने से,Continue reading “नाराज़ दिल”

तमस

जीवन की राह तमस भरी, जैसे सूरज को लगा ग्रहण, उज्ज्वल भविष्य डूब सा गया, अंधकार में ढल सा गया, मेरी ख़ुशियों का उदय,कब होगी तेरे तेज की लालिमा लिए,तेरे पास होने का एहसास लिए, भविष्य कब निखरेगा मेरा, जीवन का अहसास, ग़म में जी रहा लिए ख़ुशी की आस,आ जाओ ना तुम, बनकर मेरे जीवनContinue reading “तमस”

आईने की तस्वीर

सुबह सुबह खुद से पूछा, बता तेरी क्या है  मर्ज़ी,देखा आईने में खुद को, दिखा सिर्फ़ तेरी तस्वीर, साफ़ किया आईने को, सोचा हैं नज़रों की दोष,फिर भी  देखो दिखा मुझे, सिर्फ़ तेरी ही  तस्वीर, झटपट डॉक्टर से मिल आया, आँखों  का चश्मा बनवाया,चश्मा पहन आईना देखा फिरसे, सिर्फ़ दिखी तेरी ही तस्वीर, कैसा येContinue reading “आईने की तस्वीर”

कोरा काग़ज़

कोरा काग़ज़ सा हैं, मेरी ज़िंदगी के हर लम्हे,तन्हाई की दर्द समेटे, क्या लिखू इस दिल पे, ख़ुशी के वो लम्हे, सोचा था लिखू इस दिल पे,ग़म के निहरनी ने, वो ख़ुशी मिटा दिया दिल से, क्या यादों की ख़ुशियाँ,  लिख सकता अपने दिल पे,पर मेरे वादे ने कहा मुझसे, ना याद कर सकता मैंContinue reading “कोरा काग़ज़”

मध्यांतर या मध्य जीवन का अंतर

मध्यांतर हो या मध्य जीवन का कोई अंतर,जीवन बढ़े निरंतर, ख़ुशियाँ समेटे अपने अंदर,अपने अगले पथ पे अग्रसर, जी रही ज़िंदगी,ख़ुशी भरे हर लम्हे, या तन्हाई भरे अधूरे सपने, बचपन निश्चल, मन चंचल, उमंग भरे हर पल, समय बीते खेल कूद में, बीते समय हर मज़े में,ना कोई चिंता, ना कोई ग़म, याद रहे येContinue reading “मध्यांतर या मध्य जीवन का अंतर”