समझ नहीं आता

राह कठिन हैं, मैं अग्रशर हूँ जो अपने पथ पर,थोड़ा सहम सा गया, देख पनस अनेक पथ पे, पाव के छाले से बहता खून, अपनी दर्द बयान करता,समझ नहीं आता, क्यों समझा नहीं पता खुद को मैं, क्या रोक नहीं सकता खुद को, पनस भरी राह चलने को,या दर्द सहने की हो गयी आदत, अबContinue reading “समझ नहीं आता”

क्या खोया क्या पाया

क्या खोया क्या पाया, कभी समझ ना पाया,क्यों सच बोलना मुझे, इतना दिल से रुलाया, मैंने बस इतना चाहा, सुनो तुम मेरे  दिल की आवाज़,समझ मुझे संग बैठ, खोजे इक प्यार से  भरी संसार, ख़ुदगर्ज़ मैं नहीं कभी, दिल से अपना बनाया तुझे,तेरे जाने का ये ग़म, पर कभी मैं छुपा नहीं पाया, दिल से आज चाहा मैंने, भूल मुझे जी अपनी ख़ुशी, तेरी यादें ही काफ़ी है, बन अब मेरे जीवन की खुशी, जीने की कोई लालसा नहीं, मरने का  अब कोई ग़म नहीं,बस रब से यही माँग रहा, मरते वख्त बस तेरी ही याद रहे. कुणाल कुमार 

मेरा क्या क़सूर

मेरे दर्द की कोई दवा नहीं, जीना है अब इसके संग,क्या मेरे भाग्य में खुशी नहीं, कैसा हैं मेरा ये जीवन, क्यों हँसता  रहता हूँ हर पल, कोशिश सदा खुश रहने की,दिल के अंदर वसा बैठा मैं, मेरे दुखो का इक छोटा संसार, दिखने को सब ठीक लगे,  पर गहरी सुन्नता भरी मेरे दिल में,देखोContinue reading “मेरा क्या क़सूर”

ज़िंदगी

आहिस्ता चल मेरी ज़िंदगी,अभी कई क़र्ज़ चुकाना बाक़ी है,कुछ दर्द मिटाना बाक़ी है, कुछ फ़र्ज़ निभाना बाक़ी है, रफ़्तार में तेरे चलने से,कुछ रूठ गए, कुछ छूठ गए,रूठो को मानना बाक़ी है,रोतों को हँसाना बाक़ी है, कुछ हसरतें अभी अधूरी है,कुछ काम भी और ज़रूरी है,ख़्वाहिसे जो घुट गयी इस दिल में,उसे दफ़ना अभी बाक़ी है,Continue reading “ज़िंदगी”

जनमदिन

मेरे जनमदिन के इस अवसर पर, ख़ुस रहो तुम मुझे भूल,यही दुआ है मेरी, हो मेरी सारी ख़ुशियाँ रहे बनकर तुम्हारी, कौन सच्चा और कौन झूठा,ये सोचने का अब वख्त नहीं,जनमदिन के अवसर पर मुझे मिली, तुम्हारे झूठ का तोहफ़ा, ये अच्छा है जो मुझे भूल गयी, कोई यादें ना कभी तुझे सताई,मेरा तोहफ़ा तुम्हारे लिए, जाContinue reading “जनमदिन”

नहीं और ना

नहीं और ना मेरे दो वो प्यारे साथी,साथ निभाने में हैं ये दोनो बड़े महारथी, जब कुछ चाहा मैंने, ना से मिली ना मुझे,हंशने की इजाज़त भी नहीं, नहीं ने दी मुझे, दिल से रो रहा, अब अश्रु निकलने की ना ने ना दी इजाज़त,अपने दर्द बयान नहीं कर सकता, नहीं ने दी इजाज़त नहीं,Continue reading “नहीं और ना”

क्यों तुझे चाहा

इस जीवन की राह में, मैं  जी रहा था अकेला,इंतज़ार लिए मन में, अपनी अंतिम विदाई का, फिर मुलाक़ात हुई जो तुमसे, भूल बैठा खुद को,मेरे समझ को लगा ग्रहण, चाह बैठा जो तुझको, तेरी हंशी ने दिखाई, मेरे जीवन के वो रंग,जिसे भूल बैठा था, अपने जीवन में जो मैंने, समझ नहीं आता मुझे,Continue reading “क्यों तुझे चाहा”

क्या फ़रक पड़ता है

कोई मुझे समझ ना पाए, या समझ कर ना समझने की क़सम  खाए,मेरी इक छोटी से चाहत को, अपने पैरो तले रौंद कर चली जाए, दिल की निश्छलता ना समझ, सिर्फ़ अपनी ही मन की चलाए,उसके लिए मैं मात्र, सिर्फ़ इक  मनोरंजन का साधन होकर रह जाए, क्या फ़रक पड़ता है, मैं ख़ुस रहूँ या अपने ग़म में डूब करContinue reading “क्या फ़रक पड़ता है”

भूलना

भूलना इतना आसान होता है क्या? कोई सीखे ये तुमसे,खुद को सही समझ चली तुम, हम जो ग़लत थे तुम्हारे लिए, भूलना आसान होता अगर, काश हम भी सिख लेते ये तुमसे,तुम्हें भूल अपने जीवन में, नयी सवेरा को क्यों ना ढूँढ  लेते, कोशिश ज़रूर की हमने भी बहुत, तुम्हें भूल जी सकने की,पर क्याContinue reading “भूलना”

याद

क्या कभी सोचा था, कभी छोड़ जाओगी तुम मेरा साथ,हर लम्हे को संजो रखा, कोई चुरा ना सकेगा मेरा याद, मेरे हर लम्हे में जो बसी हो तुम, लू हर साँस बस तेरे नाम,क्या सूरज भूल सकता है, उदय होना है बस उसका काम, चाँद देख अब लगता है, मेरी हर ख़ुशी का  हो रहाContinue reading “याद”

नया साल मुबारक

नया साल हो आपको मुबारक, रहे ख़ुशियाँ साथ और ग़मों  से हो दूरी, आपकी हर इक्षा  हो पूरी, अपनों का साथ मिले ना बने किसीसे  दूरी, नया साल लाए नयी उमंग, दिल में भर दे ख़ुशियों की तरंग,आपकी हर हँसी और खिल जाए,जैसे कली खिल फूल बन निखर उठे, ना हो कोई ग़म, रहो तुम सदा अपनों के संग,जीवनContinue reading “नया साल मुबारक”

समझ

तुम कौन हो, और तुम्हें क्या चाहिए,अपनों का साथ, या पराए का प्यार, पसंद करना है तुम्हें आज, दो ख़ुशी का साथ,या काट लो अपनी ज़िंदगी अब खुद के बिना, चाहेंगी तुम्हें सभी, ये दुआ है मेरे दिल की,तुम जिसे चाहोगी, सारे सपनों हो उसकी पूरी, ना करो तुम कोई विचार, मुझे पता है मेराContinue reading “समझ”