इश्क़

इश्क़ है ज़रूरी? इसके बिना जीवन क्या पूरी?क्या ये है मजबूरी? या कहे ये दिलो कि दूरी, इश्क़ क्या मिलन की चाह? या दर्द भरी जीवन मेरी,क्या ये जीने की मजबूरी? या कोई चाह रह गई अधूरी, सच्ची इश्क़ रहे सदा अधूरी, मीठा मधुर मिलन की चाह,दिल संजोए विरह की आग, अश्रु आँखों  से बहेContinue reading “इश्क़”

पानी पूरी

पानी पूरी  . पानी पूरी, इसके बिना ज़िंदगी अधूरी,बच्चे बड़े खाए इसे, इसके स्वाद के मज़े उड़ाए, साथ मिले एक मसला पूरी, ये करे स्वाद को पूरी,अधूरी ख़्वाबों का मंजर, ख़ुशी का है ये समंदर, तीखी पानी मीठी  पानी, साथ है जो रगड़ा सयानी,मिल साथ देते है स्वाद, जीवन का भी संग देते पाठ, जीवनContinue reading “पानी पूरी”

टूटी सड़के, तंग गालियाँ

टूटी सड़के तंग गालियाँ,  लिए जीवन की बेबस घड़ियाँ,मैं निराला इस सड़क पे, पिए जीवन को भर प्याला में, अपनों को दिल में बिठाया, दिया  प्यार भरा संग,जीवन दिया प्यार दी, दिया इज़्ज़त भरी संसार, अपनी ख़ुशी त्याग, संग उसके दिल को लगाया,अपना संसार समझ, उसके घर को अपना बनाया, छोड़ आयी अपने माँ काContinue reading “टूटी सड़के, तंग गालियाँ”

राजनीति

राजनीति के ये लड्डू, मोतीचूर समान,चिपके साथ पार्टी बने, करने को राज, सत्ता जो बने चासनी, रखे नेता साथ, बने लड्डू सत्ता का, नेता खाए साथ, कुर्सी लालच देख, नेता भागे साथ,टूटी लड्डू अनेक, हुए सब नेता एक, टूटी लड्डू देख, छोटी पार्टी सब रोए पल पल,बड़ी लड्डू एक संग, जनता सेवा करे हर पल, कुणालContinue reading “राजनीति”

तू भी और निकली

मिला तुझसे अच्छा लगा, हुआ जो तुमसे प्यार,सबसे अलग लगा मुझे, लगा एक कली खिली, दिल के बगीचे में, तेरे नाम का एक कली खिली,बनके फूल सुगंध भरी, महके मेरा मन जो तेरे संग, खोजे नयन तेरी ख़ुशी, जो मेरे मन के द्वारे,जीने के इस डगर पे, संग जीने को तुम्हारे, कठोर किए मन, संझाContinue reading “तू भी और निकली”

उल्टा बंदर

देखो देखो बंदर आया, गुलाटिया मारे मन को भाया,नन्हे बच्चे खुश देख उन्हें, संग संग खूब  धूम मचाया, राजनीति का है ये बंदर, दिखे बड़ा ही मस्त कलंदर,कभी कूदे इस पार्टी, और कभी कूदे सत्ता के संग , मज़े से देखो उनकी शान, राजनीति के खिलाड़ी महान,ऊधम कूद मचा ये बंदर, अपनी कुर्सी का  जगहContinue reading “उल्टा बंदर”

राजनीति

राजनीति के ये लड्डू, मोतीचूर समान,चिपके साथ पार्टी बने, करने को राज, सत्ता जो बने चासनी, रखे नेता साथ, बने लड्डू सत्ता का, नेता खाए साथ, कुर्सी लालच देख, नेता भागे साथ,टूटी लड्डू अनेक, हुए सब नेता एक, टूटी लड्डू देख, छोटी पार्टी सब रोए पल पल,बड़ी लड्डू एक संग, जनता सेवा करे हर पल, कुणालContinue reading “राजनीति”

साथ

वो साथ मेरे बैठे, ज़रा सा मुश्कुराय,उसकी ये अदा, मुझे जो बड़ा भाए, हर ग़म भूल, उनकी हँसी में खोने का मज़ा,स्वर्ग की कोई अप्सरा वो मुझे नज़र आए, मेरे ये दो नयन, उनकी मासूमियत पे अटके,उनके अप्रतिम सौंदर्य के सागर में गोते खाए, थम सा गया समय, जो उनकी मासूमियत निहारे,मिले जिनको उनका साथ,Continue reading “साथ”

इडली या डोसा

संध्या की वेला, मुझे भूक लगी ज़बरदस्त,समझ नहीं आता, खाऊ इडली या डोसा, गोल गोल इडली, देख मन ललचाया,साथ में साम्भर और चटनी भी ले आया, इधर देखूँ , डोसा मायूस नज़र आया,उसे जो लगा, उसे कोई भी नहीं खाया, मायूस डोसा का दर्द सह ना पाया,बड़े चाव से उसे माँग कर मैं खाया, पेटContinue reading “इडली या डोसा”

नेता

आज के ये नेता, खुद को  समझते है  अभिनेता,बुनियादो मुद्दे से दूर, राज करे वो हो अलबेला, जनता को भटका मत, इन्हें पता है सब कुछ,एक दिन ऐसा आएगा, तेरा राज पाठ होगा लूट, जनता अभी ठंडा, है अपने क़िस्मत पर शर्मिन्दा,ढूँडे अपनी क़िस्मत, रहने को वो मजबूर ज़िंदा, बुनियादी सुविधा नहीं, भूक मिटाने रोटीContinue reading “नेता”