खंडर की ईंट

खंडर की हर ईंट बोले, इस क़िले  की कहानी,अपनी ही पहचान लिए,  बोले अपनी ज़ुबानी, कितने ही वीर देखे इसने, कितनी  ही लड़ाई,मातृभूमि के सपूतों को, ये ईंट करे अभिनंदन, इसने देखे राजा अनेक, कुछ नेक थे कुछ प्रचंड,सारी यादें संजोए दिल, करे इतिहास का वर्णन, इसने देखे प्यार भरे रंग,देखे छल करे अपने अपनोंContinue reading “खंडर की ईंट”

चेहरा दिल की पहचान

आपकी ये अनमोल  नयन, सागर सा गहराई लिए,डूब जाऊँ इस गहरे समुंदर में, जैसे विप्लव हो कश्ती, आपकी हँसी है अनोखी, जैसे कर्ण में परे  मोती,एक अनूठी एहसास मिले, सुने जब आपकी  हँसी, आपकी ज़ुल्फ़ों की क्या तारीफ़ करूँ, लहराते हर पल,देती शीतलता सदा मुझे, इस ऊष्ण किरण ध्युवन् की, आपकी मीठी बोली, मेरे कर्णContinue reading “चेहरा दिल की पहचान”

रंग

रंग जो जीवन का हो , या रंग से भरी हो जीवन, रंग बिरंगी ख़ुशियाँ, या काली घटा मासूमियत  भरी,रंग बताए मौसम का हाल, रंग से मालूम दिल का चाल,रंग से जुड़े हर ख़्वाब, सुनहरे सपना लिए नयन  में बसे, रंग का अभाव उनसे पूछो, जिसे मिले जीवन में अंधकार,सुनी माँगे लिए विधवा की पुकार, जीवनContinue reading “रंग”

द्वेष

मन में द्वेष लिए,  तेरे हर झूठे वादे संग,हर पल याद करे, दिल इस प्यारे दुश्मन को, जी चाहे तुझे भूला दु, खो अपने में सब भूल,कोरा कर जीवन पटल, मैं जी लू तेरे से दूर, इस द्वेष का हाल निराला, जी ना पाऊँ तुझे भूल,चाहे नफ़रत हो कितनी भी, प्यार करूँ दिल से,कभी ना सोचूँ Continue reading “द्वेष”

उल्टा बंदर … क्रमागत

उल्टा बंदर ने सूझ दिखाई, संग मालिक के पुँछ हिलाई,छोड़ अब सत्ता का लोभ, जा बैठा वो मालिक के गोद, वफ़ादारी की दी दुहाई, पुरानी याद मालिक को आई,उसकी उल्टी चाल को देख, मालिक भी ने उसे  गले लगाई, संग मिले सब होकर एक, बढ़ चले करने को खेल, बंदर अब नाच दिखा, विपक्ष के नेताओContinue reading “उल्टा बंदर … क्रमागत”

कवि का मन

कवि का भूला मन, बस तनहा जी रहा,यू अकेला जीवन में बैठ, कविता सी रहा, दिल में चाह अनेक, लेकिन राह बस एक,अपने मन की राह कवि, कविता सी रहा, याद बसी मीठी घड़ियाँ, यादों मैं जी रहा,इन यादों में कवि अकेला, कविता सी रहा, तेरे संग बीती यादें, जीने की है सार, इस सार कोContinue reading “कवि का मन”

रास्ते का फ़क़ीर

ज़िंदगी की तंग गलियों में, चल रहा निर्भीक पथ पे,लपेटे अरमानो की चादर, याद भरे पल दिल में बसा, अपनी  खुशियों की झोली लिए, चले अपने पथ  अडिग,सुनहरे सपने में खोया राही, बन गया रास्ते का फ़क़ीर, मेरे यादों की दीवार में, सिर्फ़ तेरा नाम लिख डाला, तेरे दिए हर दर्द भूल, अपने  पथ पे होContinue reading “रास्ते का फ़क़ीर”

बंद दरवाजा, खुली खिड़की

बंद दरवाजा खुली खिड़की, दिल के इस मन्दिर में,ग़ैरों को रोका यहाँ, अपनों के लिए खुली है खिड़की, हर उम्र की मोर पे, अपनों के लिए खुली है खिड़की,हवा के झरोखे संग, हर ख़ुशियाँ दिल में समा जाए,  जीवन की इन धूप छाँव में, साथ निभाए ये मेरी ख़ुशी,खुद में अकेला जी रहा, दिल कीContinue reading “बंद दरवाजा, खुली खिड़की”

मध्यांतर या मध्य जीवन का अंतर

मध्यांतर हो या मध्य जीवन का कोई अंतर,जीवन बढ़े निरंतर, ख़ुशियाँ समेटे अपने अंदर,अपने अगले पथ पे अग्रसर, जी रही ज़िंदगी,ख़ुशी भरे हर लम्हे, या तन्हाई भरे अधूरे सपने, बचपन निश्चल, मन चंचल, उमंग भरे हर पल, समय बीते खेल कूद में, बीते समय हर मज़े में,ना कोई चिंता, ना कोई ग़म, याद रहे येContinue reading “मध्यांतर या मध्य जीवन का अंतर”

रोटी दूध

रोटी संग दूध मिले, संग लिए शक्कर की मिठास,जीवन की भी मधुरता, जब जिए सब हो संग संग, जैसे दूध संग रोटी मिले, घुल मिले मिले हो एक,जीवन की संज्ञा हो,  जब सारे रिश्ते हो जो नेक, झूठ कपट ना लालच हो, ना हो मन में द्वेष क्लेश,तभी मिले जीवन उद्देश, राह मिले सुखी जीवनContinue reading “रोटी दूध”

दोस्त या टोस्ट

दोस्त हो या टोस्ट, रिश्ते है करारे,यादें कुछ खट्टी है तो कुछ यादें मीठे, कुरकुरे सी ये दोस्ती, लगे बरे प्यारे,यादें संझा कर, हँसके जीवन सँवारे, दोस्त हो या टोस्ट, लगे स्वाद ज़बरदस्त,जैसे चाय संग टोस्ट, जीवन खुश संग दोस्त, छोटी मोटी झगड़े, रिश्ते बनाए अच्छे, दोस्ती का अर्थ, अब लगे मुझे सच्चे, जीवन की गाड़ी,Continue reading “दोस्त या टोस्ट”

क़ैद में है परिंदा

स्वतंत्रा और अभिमान लिए, ऊँचाइयों के शिखर पे,गगन को चूमने की चाहत, लिए उड़ता है परिंदा, हर ख़ुशी पंखों  तले, दुःख को झटक हवा में दे, ऊँचे गगन उड़ चली, बनाने अपनी नयी पहचान, अपने पथ पे अडिग, जीवन वृति में अग्रसर,हर ऊँचाइयों को छू, सफलता की छाँव तले, नज़र लगी अहेरी की,  लगी उड़ान पेContinue reading “क़ैद में है परिंदा”