ज़िंदगी…

कुछ लोग है,
जिनसे बनती है ज़िंदगी,
उनके पास आने से मिलती हैं ख़ुशी,
और दूर जाने से अश्रु हैं बह निकलती।

समझ से दूर,
अहसास से परे,
अपने ही सोच में डूबे हुए,
वो जी रहे है अपनी ज़िंदगी।

क्या ख़याल नहीं आया कभी,
या अहसास नहीं हुआ उन्हें मेरे तड़प की,
चल दिए मुँह मोड़ कर यूँ ही,
जब चाहत थी मेरे दिल में और बढ़ने लगी।

ये तो कड़वी सच्चाई है,
मेरे क़िस्मत में प्यार नहीं सिर्फ़ जुदाई है,
संग जीने की क़समें खाता हुआ दिल में,
दो कदम साथ नहीं चल पाया उनके कभी।

कुणाल कुमार
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प्यार और ममता…

ना जाने क्यों दिल मचल रहा है आज बार बार,
बस एक बार प्यार से तुम पुकार लो मेरा नाम,
अपने ममता के छाँव में पनाह दे दो तुम मुझे,
ताकि भूल जाऊँ वो दर्द जो जमाने ने दिए है मुझे।

मुझे याद हैं वो लम्हे,
जब जागी थी तुम रात भर,
अपने आँचल में छुपा कर,
मेरे हर दर्द को परे किए थे तुमने।

एक बार याद करके आज पुकार लो तुम मुझे,
भूलने की बीमारी से कुछ लम्हे चुरा लो मेरे लिए,
समेट लो मुझे अपने आलिंगन में तुम मेरी माँ,
मेरी सजा कम कर दो पास आ जाओ तुम मेरे।

जाने के बाद याद में तड़पता हैं ये दिल,
फिर पास रहने के लिए क्यों नहीं मचलता है ये दिल,
शायद पास रहने से अपनापन बढ़ता है,
इसीलिए पास आने से डरता है मेरा दिल।

एक ही तमन्ना हैं दिल में मेरे,
बस तुम ही माँ बनो हर जन्मों में मेरे,
तुम्हारी ममता से मुझे जीने की शक्ति मिले,
अपनों परायों को समझने के लायक़ जो बनाया हैं तुमने।

कुणाल कुमार
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इंसान…

इंसान के रूप में राक्षस देखा हैं मैंने,
मौत भरी दरिया से तैर निकला है मैंने,
पर आज भी आगे जब बढ़ते हैं मेरे कदम,
उन यादों के दर्द से अश्रु सैलाब बन बह निकलते है मेरे।

जब भी आगे बढ़ने की कोशिश करता है दिल,

यादें की जकड़ बेड़ियाँ बन जाती है,

अपने कहने वाले तो बहुतेरे मिले है मुझे,

पर मुझे समझने वाले नहीं मिला एक भी।

नहीं समझ हैं मुझे,
किस गलती की सजा हैं मिली,
मैंने तो सिर्फ़ इंसानियत देखनी चाही,
हैवानियत से भरा हिस्सा मेरे तक़दीर ने क्यों दी है मुझे।

अब बढ़ते रहना है मेरी नियति,
अपने भूत से दूर बनाना है भविष्य की निधि,
पर इस दौर में अकेला पड़ गया है मेरा मन,
अब ना कोई साथी है और ना रहा कोई हमदम।

कुणाल कुमार
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दूरी…

लोग दूरी मिलो में नापते है,
मैंने तो आपसे दूरी साँसों से नापी है,
आपसे दूरी सिर्फ़ कहने को था,
आप तो मेरे साँसों में बस चुकी है।

वचन से बंधा हूँ,
बोलूँगा मैं कुछ नहीं,
पर प्यार तो सिर्फ़ आपसे की है,
और शायद आपसे ही करता रहूँगा।

अब पास नहीं आऊँगा मैं,
नहीं तो लोग क्या कहेंगे,
मुझे लोगों से डर नहीं लगता कोई,
पर आपके सोच में खोट मंज़ूर नहीं।

कुणाल कुमार
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ख़ुश…

ख़ुश रहने की मशवरा,
मुझे देती हो आप बार बार,
पहले ख़ुश रहना सिख तो लो आप,
फिर मुझे ख़ुशी का मतलब समझाओ आप।

शिक्षा देना अच्छा हैं,
अमल करना हैं उतना ही मुश्किल,
अगर सच्चाई है आपकी कही,
तो एक बार आप दिखाओ अपनी ख़ुशी।

कुणाल कुमार
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मैं…

कितनी रातें मैं ना सोया था,
अपने अश्रु से बिस्तर भिगोया था,
बस आपकी यादें थी जीने का सहारा,
और ना लालसा थी दिल में कुछ पाने की।

कभी दिल में हसरतें थी अनेक,
आपके साथ जीने का इरादा था मेरा नेक,
पर शायद आपको ये ना था मंज़ूर,
कर लिया अपने दिल को मुझसे बहुत दूर।

अब तो जीता हूँ सिर्फ़ अपने लिए,
आपको भूलने की कोशिश करता हूँ अनेक,
पर शायद मैं ये भूल गया ना जाने क्यों,
क्योंकि आप तो बन गयी हो मेरे ख़्वाबों में मैं।

थोड़ा ख़ुदगर्ज़ सा हो गया हैं ये दिल,
अब तो जीता हैं दिल देखने को आपकी ख़ुशी,
हर एक स्वाँस लेता हूँ आपके लिए,
अब तो मौत ही मुझे मेरी स्वाँस से अलग कर पाएगी।

कुणाल कुमार
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आशा…

बस छोटी सी आशा लिए दिल,
खोज रही हैं अपनी मंजिल,
ज़्यादा नहीं थी इच्छा मेरी,
बस चाहता है आपकी ख़ुशी।

अनेक रूप देखे हैं आपके,
नहीं देखा कभी प्यार मेरे लिए,
पर क्या करूँ ये दिल समझता नहीं,
आपके तिरस्कार में भी प्यार दिखता है मुझे।

शायद आशा ही है मेरा जीवन,
जो सोचता रहता हैं सिर्फ़ आपकी ख़ुशी,
चाहे आपका साथ ना मिले मुझे,
आपका दामन भरा रहे ख़ुशियों के संग।

कुणाल कुमार
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समझ…

अकेले ही भटक रहा मेरा दिल,
ना थी तमन्ना कुछ पाने की,
यादों की गलियों में उसे भूल,
अब तो तमन्ना थी अकेले जिए जाने की।

सागर सा है मेरा प्यार,
अब अंदर ना आना तुम मेरे कभी,
क्योंकि सागर कि फिदरत है ये,
किनारे कर देता जो ना होता उसका अपना।

आगे लिखता हूँ…

क्यों ना भूल सकता उसे दिल,
जिससे प्यार किया उसने हर दिन,
पर कुछ समय का प्यार था ये,
वो तो कही और ढूँढ रही थी अपनी मंजिल।

आसानी से मिला था उसे ये दिल,
इसीलिए भूल गयी थी वो अपनी मंजिल,
उसे क्यों याद करेगा अब मेरा दिल,
जो ख़्वाबों में किसी और के साथ बाँट रही थी अपनी ज़िंदगी।

आख़िर में…

कुछ पंक्तियाँ जो लिखी मैंने,
कोशिश की यादों को शब्द दे सकूँ,
पढ़ तो इसे सभी सकते है,
पर इसे समझना हैं बहुत मुश्किल।

ये शब्द नहीं ये मेरे अश्रु है,
जो सूख कर भाव बन गए हैं,
इन भावों को पिरोकर मैंने,
लिखी है ये लेखनी सिर्फ़ आपके लिए।

कुणाल कुमार
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कुछ कहना हैं…

कभी कभी समझ नहीं पता,
क्या थी मेरे प्यार में कमी,
करता रहा प्यार मेरा दिल तुमसे,
पर तुम मेरा प्यार नहीं समझ पाई कभी।

कहती हो दोस्ती है अपनी सच्ची,
तो क्यों नहीं बताई तुमने मुझे मेरी कमी,
साथ मिलकर ठीक कर लेता मैं अपनी कमी,
पर प्यार ना होने देता कम तुमसे कभी।

काश बात करती तुम मुझसे,
समझा पाती मुझे मेरी हर कमी,
या तो कर लेता मैं खुद को सही,
या भूल जाता मैंने प्यार की कभी।

कुणाल कुमार
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खोज रही हो ख़ुशियाँ,
क्यों तुम इधर उधर,
ज़रा दिल में झांक कर देखो तुम मुझे,
अपनी ख़ुशियाँ पाओगी मुझमें हर घड़ी।

कवि की कल्पना…

सोच रहा हूँ मैं,
ज़िंदगी तुम्हारे बिना अधूरी हैं,
साथ चाहता है ये दिल तुम्हारा,
पर ना जाने आपस में क्यों इतनी दूरी है।

काश समझ पाती तुम मुझको,
तुमको चाहना मेरी मजबूरी है,
तुम क्या समझो मेरे दिल की हाल,
क्योंकि तुमने प्यार मुझसे कभी नहीं की हैं।

एक बात कहूँ मैं दिल से,
अच्छा हुआ तुमने नहीं किया प्यार कभी मुझसे,
फिर भी माँ तुम्हें सत सत प्रणाम,
क्योंकि तुमने दिया मेरी लेखनी को जान।

शायद इसलिए कहते है नारी को प्रेरणा,
साथ रहे तो ज़िंदगी बने सुंदर,
दूर जाकर भी देती हो शक्ति … देवी,
अपने दिए ग़म से भर देती हो मेरी लेखनी।

दूरी हैं एक सुंदर अहसास,
जो दिल वाले को सिर्फ़ मिलती हैं,
उन्हें क्या पता जो पास रहकर भी,
बना रखे हैं दिलों से मिलो दूरी।

Last few lines…

रूठे दिल को मनाने की कला,
कोई मुझे भी ज़रा सिखा दे,
सालो बीत गयी उन्हें मनाने में,
पर अंत में मुझे मिली सिर्फ़ तन्हाई।

कुणाल कुमार

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मतलब…

मेरी कही हर बात में,
क्यों आपको मतलब दिखता है,
मेरा प्यार निश्चल कल भी था,
मेरा दिल साफ़ आज भी है।

मैं नहीं सोचता और कुछ,
क्योंकि सोच मेरी सिर्फ़ तुमसे ही हैं,
ये दिल कल भी तुम्हारा था,
और आज भी बस धड़कता है तुम्हारे लिए।

प्यार का अहसास अनूठा,
अगर करे कोई सच्चे दिल से,
जैसे फूल खिले बागों में,
काँटे का चुभना भी अच्छा लगे।

कुणाल कुमार

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सावन…

क्यों सावन अटक गए है,
मेरे नयनों की क्षितिज पर,
बारिश बन अश्रु बह निकले,
बस सिर्फ़ आपकी यादों में।

आँखों से उतर कर अश्रु,
मेरे दिल को सिंच कर जाती है,
हर बढ़ते दिन के साथ मेरा दिल,
आपको अपना बनाना चाहती है।

जनता हूँ आपकी मजबूरी,
पर कैसे समझाऊँ आपको मैं अपनी मजबूरी,
बस आपसे ही प्यार किया ये दिल,
और मजबूर हैं आपसे दूर रहने के लिए।

क्या बारिश ने रखी है कुछ उम्मीद,
धरती की प्यास बुझाने पर,
वैसे ही है मेरा प्यार हैं आपके लिए,
चाहता हूँ आपको दिल से पर पाने की उम्मीद नहीं हैं दिल में।

कुणाल कुमार

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