भूख लगी हैं

भूख लगी हैं ज़ोरों की,मेरा पेट करे आवाज़,भर पेट खाने का मन,पर साथ ना कोई मेरे पास, अकेला कुछ खाने की,आदत नहीं थी मुझे कभी,साथ निभाने वाले चले गए,भूखा छोड़ कर मेरा मन, मेरी भूख और बेचैनी,अकेलेपन का सुना अहसास,मेरी ख़ुशनुमा जीवन को,अंधकार से भर दी, कौन है ज़िम्मेदार यहाँ,मेरे तन्हाई भरे इस पल का,मेरी ये भूख और बेचैनी का दर्द, शायद हैं मेरी अपनी क्रोध. कुणाल कुमार 

क्रोध

यों क्रोध आ रहा है मुझे, क्यों नफ़रत सा हो गया जीने से,मन उदास ना लगे कही, अकेला था तन से अकेला हो गया मन से, सबने साथ छोड़ दिया, बन गए हो पराए,देखो आशु भी मेरा साथ छोड़,मेरे दर्द को किया पराया, अकेला खड़ा सड़क पर,दर्द के दरिया में डूब रहा ये दिल,ना कोई पहले बचाया,ना कोई अभी बचाएगा मुझे, तनहा जीवन लगे पहाड़,ना पार कर सकता इसे,साथ निभाने वाले पीछे छूटे,रह गया ये अकेला मन, क्या गलती थी मेरी, जो कोई समझ ना पाया मुझे,मेरे भावना का मज़ाक़ बना,ना कोई अपनाया मुझे दिल से, छोड़ो भी ये गम्भीर बातें,ना समझ सकता कोई इसे,डूब रहा मेरा दिल,टूट कर बिखर सा गया, मेरी क्रोध क्यों इतनी प्रबल,क्यों ना रोक कभी पाया इसे,सारे अपने छोड़ चले मुझे,मेरे इस क्रोध के चलते, शायद मेरे जीवन का अंत लिखा,मेरे क्रोध के शब्द से,भविष्य दिख रहा मुझे,मेरा अंत हैं मेरे क्रोध में, मेरे मित्रों आप समझ लो,कभी क्रोध ना लाओ दिल में,प्यार से संसार सुंदर,क्रोध से बने जीवन उजाड़, मेरा अब ना कोई अपना हैं,जो मेरा बन साथ निभाए,मेरे क्रोध को शांत करे,मुझे अपनी उँगली पकड़ जीना सिखाए. कुणाल कुमार 

बावरा मन

जब से देखा हूँ तुझे, खुद को भूल गया,तेरी याद पलकों पे बैठा, जीना सिख गया,धन्य है मेरे भाग्य, जिसने तुझसे मुझे मिलाया,मुझे मेरी इस ज़िंदगी जीने का मक़सद मिल गया, खुद को आईने में देखूँ तो मुझे तू नज़र आए,मुझ सा बदसूरत  भी अब खूबसूरत नज़र आए,यू बावरा सा दिखने लगा जैसे कोई बिखरा इंसान,अकेले तेरी याद में यू ही कभी हँसता तो कभी रो लेता हूँ, अच्छा लगा तेरा ये तोहफ़ा, जो बदल  दिया तुमने मुझे,मेरे ज़िंदगी की उदासीनता में बड़े शालीनता से ख़ुशी भर दी,मेरे मन की करवाहट में अपनी मधुरता घोल दी तुमने,मेरे वीरान ज़िंदगी को ख़ुशहाली का मार्ग दिखा गयी तुमने, धन्य हैं तेरे अपने जिन्हें मिले सदा तेरा साथ,इक अनमोल हीरा मिला बस सम्भालना हैं उनका काम,ख़ुश रहो तुम हमेशा रहे ख़ुश तेरे अपने,अगर पलट कर देखने का हो मन, पास पाओगी तुम मुझे. कुणाल कुमार 

आशाएँ

आँशुओ को पोंछ कर मैं चुप चाप हूँ खड़ा,सोच रहा क्या इतना निष्ठुर हैं ये दिल तेरा, मेरा दिल धड़क रहा लिए नाम तेरा हर साँस,तुमसे क्या उम्मीद रखूँ जो प्यार नही की तुम मुझसे, पर देखो तुम व्यथा मेरी दिया आज तुम्हें मैंने वचन,ख़ुश रहो तुम अपनों के संग ना बताऊँगा तुम्हें कभी अपना प्यार, इस वचन को दे तुझे दिया साथ मैंने अपना प्राण,याद रखोगी तुम सदा की मैंने तुझे दी ख़ुशी छिपा ग़म मेरे दिल, अब देखते है कितना दिन धड़कता है ये दिल बिना अपने धड़कन,जो होना हैं उसे अब ना बादल पाओगी कभी चाह कर तुम, ख़त्म हो गयी मेरी सारी इक्षाए  तुझे पाने की हर उम्मीद,जो तेरे अहम को पार ना पाया, हार गयी मेरी सारी आशाएँ. कुणाल कुमार 

अजीब सी उलझन हैं

जीवन मेरी इक अजीब सी उलझन हैं,सोचता हूँ भूल जाऊँ वो पल जब क़रीब थी तुम, पर क्या करूँ ये कमबख़्त  एहसास तेरी, याद बन कर बसी हैं बेचारे दिल में मेरे, तरस आती हैं मुझे खुद पर अभी,क्यों चाहा तुझे ये मेरा मजबूर दिल, कैसी ये मजबूरी मेरी,तुझे चाह कर भी समझा ना सकता कभी,Continue reading “अजीब सी उलझन हैं”

खुद को भूला कर जीने की कोशिश

खुद को भूला कर जीने की कोशिश मैंने शुरू कर लीखुद को भूलने का कष्ट सहने की ज़रूरत मैंने कर ली,सच्चाई को झुठलाना क्या यही तक़दीर मेरी,सच्चाई तो यही हैं नहीं पहचाना मेरे प्यार को तुमने कभी, शायद ये तक़दीर मेरी कहती हैं रहो हँशी ख़ुशी,मेरे प्यार की परिपूर्णता शायद लिखी भूलने में तुझे,शायद दर्दContinue reading “खुद को भूला कर जीने की कोशिश”

तोहफ़ा

मैंने चिढ़ाया तुझे, दिलाया थोड़ा सा ग़ुस्सा,ये ज़रूरी थी क्योंकि,तुम चाहती थी दूर जाना,जब भी मैंने कहीं दिल की बात, तुमने बोला छोड़ो,क्योंकि मुझसे ज़्यादा, थे वो तेरे दिल के क़रीब, गलती मेरी बस इतनी सी थी,चाहा तुझे मैंने खुद से बढ़कर,मेरे प्यार के बदले इनकार मिला,सब हंस कर सह ली मैंने, आज मुझे कुच देना हैं तोहफ़ा,मेरा वादा है तुझे ये तोहफ़ा,ना दिखाऊँगा मैं तुझे अपना प्यार,चाहे दिल डूबे आशुओ के समंदर में, तू रह जिसके संग तुझे मिले ख़ुशी,तुझे  ग़ुस्सा दिला मैं खुद को भूला दूँगा,आज मैंने सोच लिया दिल से,मिटा दूँगा अपना नाम तेरे दिल से. कुणाल कुमार