बाइस्कोप

बाइस्कोप वाला आया, बाइस्कोप वाला आया,गला फाड़ चिल्लाया, बाइस्कोप वाला आया,ये बोल सुन, नन्हे मुन्ने बच्चों का मन ललचाया,खेल कूद सब छोड़, दौर पड़े बाइस्कोप देखने, बाइस्कोप की सुनहरी दुनिया, कहानी है अनेक.पच्चीस पैसे का एक चक्र, देखे जो बच्चे मिलकर चार,कभी कहानी उन वीरों की, कभी देश के क़िले महान,कभी देखे मुंबई की शान,Continue reading “बाइस्कोप”

सवेरा

ज़िंदगी के इस शाम में, मैं ढूंडू एक नयी सवेरा,इस चाह में जी रहा, कोई बन जाए अपना मेरा, सवार दे ये तनहा जीवन, अपना बन पास आ,अपने दिल में छिपा मुझे, जीवन की राह दिखा, आएगी अब एक नयी सवेरा, हो उसका और मेरा,संग साथ चलेंगे जीवन पथ पे, बनके सिर्फ़ तेरा, तेरी हरContinue reading “सवेरा”

सुंदरता क्या है?

दिल की खुशी  जब रिस्तो में  उतर  आये,हंशी  खुशी,  जो  जीवन में  बस जाए,हर पल हवा में उड़ता रहु, सपनो की सागर  में  गोते खाऊ,ढून्ढ  लाऊ  ख्वाब का वो पाल,ये पल, जो निश्चल, है सुंदर. कुणाल कुमार

समझ नहीं आता , हंसु या रो लूँ

समझ नहीं आता , हंसु या रो लूँख़ुशी इतनी दूर, उदासी क्यों गहराईकुछ बोलने का समय, दिया किसीने कबजिसका भी साथ चाहा, सब यूँ दूर चले गए नशीब मेरा खाता, यूँ लगता है अबउदासी जो गहराई चादर में लिपटा हुआ साकिस से थोड़ी बातें, थोड़ी हंसी बाँट लूअब हर किसी में तन्हाइ नजर आता हैContinue reading “समझ नहीं आता , हंसु या रो लूँ”

जिंदिगी

जिंदिगी मे सदा मुस्कुराते रहो,हर दर्द तो अपनी हँसी मे छुपाते रहो,दिल का दर्द चेहरे पे  न आ सके,जिंदिगी को खुशनुमा बनाते रहो. मेरे प्यार को इतना कमजोर न समझ,की तेरे दूर जाने से टूट जाये,दिल में बसाया है, दिमाग मैं नहीं,की तेरे दूर जाने से भूल जाऊ. ज़िंदगी दूर ही सही, तेरी अहसास जोContinue reading “जिंदिगी”

रुसवाई

तुम्हारी ये रुसवाई, अपना ना बनाने का जिद्द,तुम्हारी ये ख़ामोशी, तुम्हारे दूर जाने का गम,मेरे अश्रु भी सूख गए, ये अधूरेपन से,इन तन्हाईयों से ज़रा पूछो, कितने सितम मेरे दिल पे हुए,तेरी ये रुसवाई, अपना ना बनाने का जिद्द. कुणाल कुमार

दीप

दीन जीवन के दुलारेखो गये जो स्वप्न सारे,ला सकोगे क्या उन्हें फिर खोज हृदय समीप?ओ गगन के जगमगाते दीप! यदि न मेरे स्वप्न पाते,क्यों नहीं तुम खोज लाते,वह घड़ी चिर शान्ति दे जो पहुँच प्राण समीप?ओ गगन के जगमगाते दीप! यदि न वह भी मिल रही है,है कठिन पाना–सही है,नींद को ही क्यों न लातेContinue reading “दीप”

लक्ष्य

चाहे डगर पे हो कितने पनस,चाहे लोगो का हो ज्ञान तमस,चाहे मुश्किल हो मेरा वख्त,चाहे दिल में हो कसक,अडिग अचल अपने पथ पे,शीर्ष शिखर हैं मेरा लक्ष्य,ना झुकुंगा अपन पथ पे,अडिग अचल हर पल .. हर पल.. कुणाल कुमार

दूरी

कितना दर्द होता है आपके दूर जाने से,एहसास मेरे रो पड़े आपके ना आने से,यूं तन्हा सा लगता है मेरा ये जीवन,आपके ना आने से …. आपके ना आने से…. कुणाल कुमार

क्यों?

क्यों उस पल से घृणा नहीं ?जिस पल ने है छला मुझे.क्यों जीने को हूँ मजबूर ?जो तेरे बिना अधूरा हूँ.क्यों  स्वपन मेरे अधूरे  है ?जो तेरे मिलन को उत्सुक हूँ.क्यों निर्दिष्ट  तेरे प्यार में ?जो तेरे बिना अधूरा हूँ. कुणाल कुमार

विकास

कमाई इतनी है नहीं,  फिर भी दिया समय पे कर,देश की विकास में, सहयोग मेरा यह कर,आशा लिए विकास, देश उत्थान  स्वप्नसंजोये,बिना कोई डर, दिया समय पे मेरा कर, विकास खोजने निकला मैं, अपनी स्वप्न  संजोये, ग़रीबीमजबूरीदेख, रुकगयासड़कपेखोय, सर नीची मेरा , लिए आँख में नमी,सड़कों को निहार रहा, विकास के पथ पे, सड़कों में अभी काफ़ी गड्ढे,Continue reading “विकास”

संगनी

जीवन की मेरी संगनी, जीवन साथ निभाए,अपना सा बना मुझे, जीने की राह दिखाए,हर डगर पे, चले  जो वो साथ मेरे,कभी साथी कभी शिक्षकबन, जीने की पाठ पढ़ाए, तेरी जन्मदिन हो मुबारक, लगी मेरी दुआयें, जीने की मेरी मक़सद, ओ तुझे मेरी उम्र लग जाए,तेरी ये खुशी सदा, तेरा हर पल साथ निभाए. कुणाल कुमार