इंतज़ार

धुँध सा छा गयी, दिल के बगीचे में मेरे,तेरे क़रीब आने के इंतज़ार में,मेरी आँखे नम सी हो गयी,तेरे यूँ मुझे छोड़ चले जाने से, ना जाने क्यों दर्द सा हो रहा हैं तेरे दूर जाने से,पहले नहीं हुआ था कभी ये अहसास दिल में मेरे,फिर क्यों ये दर्द इतना तकलीफ़ सा  दे रहा मुझे,तुम दिल के पास रहो मेरे यहीं उम्मीद हैं मुझे तुमसे, इंतज़ार के दर्द का अहसास रुला दे रही हैं मुझे,पर क्या करूँ मेरी ख़ुशी भी है जो तेरी हर ख़ुशी,तेरी ये ख़ुशी देख हो रहा ख़ुश मेरा ये तनहा दिल,दर्द तो ये  तन्हाई का हैं जो ना समझ पाएगी तुम, क्यों रुला रही हो तुम  बनकर मेरी ज़िंदगी,क्यों मुझे रोता छोड़कर तुम्हें मिलती हैं ख़ुशी,यूँ अकेले रोने से अच्छा मैं ही छोड़ दूँ खुद की ख़ुशी,इक तारा बन शायद तुम्हारा साथ मुझसे बना रहे, तुम यूँ ही मुस्कुराते रहो, दर्द का साया ना छू पाए तुम्हें, तेरा साया बन साथ निभाऊँगा, यही उम्मीद हैं दिल मेरे,तुम्हें कुछ पता ना चलने दूँ, चुपके से दिल में समा कर तेरे,लिखेंगे हमारे प्यार की कहानी, ख़ुशी के शब्दों को पिरो, मेरे प्यार को तुम महसूस करो दिल से,इसकी गहराई शायद ना दिखेगी कभी तुझे,मैं तो ना जाने कब अकेला डूब सा गया तेरे प्यार में,अब तो ये तेरी समझ है, क्या कभी समझेगी मेरे प्यार को? के .के

इडली या डोसा

Originally posted on मधुर लघु काव्य संग्रह:
संध्या की वेला, मुझे भूक लगी ज़बरदस्त,समझ नहीं आता, खाऊ इडली या डोसा, गोल गोल इडली, देख मन ललचाया,साथ में साम्भर और चटनी भी ले आया, इधर देखूँ , डोसा मायूस नज़र आया,उसे जो लगा, उसे कोई भी नहीं खाया, मायूस डोसा का दर्द सह ना पाया,बड़े चाव से उसे माँग कर…

सुंदरता क्या है?

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दिल की खुशी? जब रिस्तो में? उतर? आये,हंशी? खुशी,? जो? जीवन में? बस जाए,हर पल हवा में उड़ता रहु, सपनो की सागर  में  गोते खाऊ,ढून्ढ  लाऊ  ख्वाब का वो पाल,ये पल, जो निश्चल, है सुंदर. कुणाल कुमार

सफ़ाई

लोगों की सोच का, क्यों दूँ सफ़ाई तुझे,मुझपे तुम भरोसा करो, या भूल जाओ मुझे, अच्छा लगता हैं सुन, मुझे लोगों ने याद किया,अच्छे बातों  में नहीं तो, बुरे वाक्यों में नाम लिया, क्यों दूँ मैं सफ़ाई तुझे, क्यों लू मैं तेरा नाम कभी,तुमने कभी याद किया मुझे, या छोड़ चली मरने को, कहने को तो हज़ार हैं बात, पर शब्दों को रोक ली मैंने,क्या फ़रक पड़ता हैं तुझको, मेरे कहे किसी बातों से, तुम करती जो अच्छा लगे हैं तुझे, क्या करूँ मैं भी,जो तेरी हर सोच को सम्मान दिया हैं दिल से मैंने. कुणाल कुमार