पत्थर दिल…

भावनाओं से परे,
अपनी ही सोच से,
अलग ही परिभाषा अपना,
सोचती हो तुम पत्थर दिल से।

कहती हो चाहत नहीं है,
सिर्फ़ अवसाद भरा है दिल में,
पर क्यों मायूस दिखती हो,
जब दूर जाती हो तुम मुझसे।

क्या ये पत्थर दिल तुम्हारा,
हैं सबके लिए एक समान,
फिर धड़कता क्यों हैं अपनों के लिए,
जिनसे चाहती हो तुम ढेर सारा प्यार।

शायद भूल क्यों गयी तुम मुझे,
जिसने चाहा है सिर्फ़ तुम्हें,
तुम कहती हो पत्थर दिल है तेरा,
पर इस पत्थर में प्यार बसा है मेरा।

शायद भूल जाओगी,
जब जाओगी तुम दूर मुझसे,
पर याद रखना अपने इस पत्थर दिल में,
एक आशिक़ है जो प्यार सिर्फ़ करता है तुमसे।

पर आज देखो,
पत्थर से हो गया है प्यार मुझे,
अपने अहसास के फूलो से सजा,
दिल के मंदिर में बसा रखा है तुम्हें।

कुणाल कुमार

सुनो ना…

सुनो ना,
कुछ कहना हैं मुझे,
अपने व्यस्त जीवन से,
कुछ समय निकलो ना मेरे लिए।

चाहता हूँ ढेर सारा,
बात करूँ सिर्फ़ तुमसे,
कुछ कहूँ दिल की बात,
महसूस करूँ तुम्हारी अहसास।

सुनो ना,
क्या कुछ ग़लत किया है मैंने,
चाहना अगर ग़लत है दिल से,
तो भूलने की कोशिश करूँगा मैं आज से।

कुणाल कुमार

दीपक…

दीपक सा बन मैं,
खुद को जलाता चला गया,
औरों को रोशनी दिखाई मैंने,
खुद डूबा रहा लांछन भरी कालिमा में।

कभी नहीं सोचा खुद का,
ना चाहत बची थी सोचने की,
बस खुद को जलाता चला गया,
औरों की ख़ुशियों के लिए।

हर घड़ी रहे रोशन तुम्हारी,
ख़ुशियों की उजाले से प्रज्वलित रहे दिन,
ग़म की कालिमा रहे दूर तुमसे,
चाहे जलना पड़े मुझे ग़म लिए दिल।

कुणाल कुमार

ये नयन मेरी…

ये नयन मेरी,
दर्पण मेरी अस्तित्व की,
ख़ुशी हो या ग़म,
गवाही देती है ये मेरे दिल की।

जाने से दूर तेरे,
छलक पड़ती है ये ग़म में,
पास आकर तेरे,
ख़ुशियाँ दिखती है इसमें ढेर सारी।

ये नयन मेरी,
कह रही है ये कहानी मेरी,
इंकार और इकरार का सफ़र,
देखी है ये बातें तुम्हारी कही।

कुणाल कुमार

समझ…

ये दिल हैं मेरा,
कोई किराये का घर नहीं,
जब मर्ज़ी हों तुम बस जाओ वहाँ,
और जब मर्ज़ी हो छोड़ चलो।

छोटी सी बात पर,
मनाने की ज़रूरत नहीं पड़ती,
अगर दिल में प्यार सच्चा हो,
प्यार को अपनाने में देर नहीं लगती।

मेरा दिल है एक कुसुम कली,
इसे सिंचना पड़ेगा तुम्हें हर घरी,
प्यार से और निखरेगा इसकी ख़ूबसूरती,
शब्दों के वाण से मुरझा जाएगी ये कली।

कुणाल कुमार

दर्पण…

ज़रा देख लो तुम खुद को,
मेरे दिल के दर्पण में,
जो सुंदरता थी कभी तुममें,
वो खो गयी है तुम्हारे किए से।

मुझे मासूम समझने की गलती ना कर,
मुझे सब पता है क्या है तुम्हारे दिल में,
पर यूँ चुप रहता हूँ मैं,
क्योंकि सच्चाई कभी थी हमारे रिश्ते में।

अगर सोच में तुम्हारे ना होती खोट,
तो तुम ना देती मुझे ऐसी चोट,
मुँह पे मिस्री सी बोल अब चुभती है,
जब पीछे सुनता हूँ तुम्हारे कहे बोल।

कुणाल कुमार

माँ…

सुबह हुई जब आँख खुली,
सुनी माँ की बोल तन्मयता घुली,
प्यार के चाशनी में था डूबा,
हर बोल था सुखद अनूठा।

माँ का दुलार,
आँखों में है बच्चों के लिए प्यार,
हर कष्ट उठाती हंसते हंसते,
ताकि बच्चे की परवरिश हो सके अच्छें।

माँ तुम्हारी कही हर बात,
अच्छें परवरिश की है शुरुआत,
आज भी कभी होती है दुविधा,
याद आता है तुम्हारा शिक्षा हर बार।

वैसे तो लोग आज,
आपके लिए दिन मनाते है,
पर माँ तुम्हारा दिया प्यार,
हर दिन मुझे याद आते हैं।

Happy Mothers Day.

कुणाल कुमार

Time…

There were time,
I felt bad for you,
And with time,
My feeling grew for you.

All had warned,
I was time-pass for you,
They also sweared right,
That you will leave me one day for you.

At time you also accepted,
My purity which was there for you,
But what perception makes you think,
That my love is not right for you.

Probably time knows,
What is there hidden as mystery,
But only thing I wish for you,
Tomorrow you should not miss me.

Kunal Kumear

सही और ग़लत…

हम अपने अपने परिपेक्ष्य में,
खुद को सही समझते है,
पर ये सोच तो हमारा है,
इसीलिए दूसरे हमें अक्सर ग़लत दिखते है।

तुम्हें लगा कोई छला तुम्हें,
इस बात से दुखी होती हो तुम,
पर तब क्यों ना था दुःख तुम्हें,
जब सहूलियत के लिए छोड़ चली थी तुम मुझे।

कहती थी प्यार है मुझसे,
पर अचानक से क्यों बदल गयी थी तुम,
क्या मेरा प्यार करना था ग़लत,
और तुम्हारा मुँह मोड़ना था सही।

कुणाल कुमार

System Error 0x0000007B

Now when I think of you,
My System shows error,
It asks me to reboot myself,
And free myself for ever.

All you said to others,
Was bad taste for me,
Why you do not have courage,
To speak all in front of me.

If your thought were bad,
It’s ok for me,
But you were my friend,
So you should have corrected me.

Hope I m making sense,
While writing this shit about me,
But I truly believe in one thing,
That I never did wrong to any.

Kunal Kumar

Perception

I need your outlook full of purity,
Expect some respect and little of sincerity,
Shed your convenience for petty things,
And grow in life like a queen.

There were days when I lived for you,
Always happy when I find myself near you,
But you have thought my love as my weakness,
And you judged me what your convenience says.

Lastly I understood your love for me,
It was full of your convenience rather than me,
All you were thinking what your perception says right,
Instead you loving me you always do what you think is right.

Now it’s time to think beyond your own self,
As there are people who follow what you says,
please do not give them your own selfishness,
Inspire them with right and not what your perception says.

Kunal Kumar

मतलब की जोड़…

रिश्ते की डोर में बांध उन्हें,
सम्भाल रखा था अपने दिल के क़रीब,
पर मुझे क्या पता था इस डोर में,
बंधी थी वो अपने मतलब की जोड़ से।

हर रिश्ते की अपनी ही कहानी,
थोड़ी खट्टी मीठी, थोड़ी नई पुरानी,
पर नहीं दिखता है यहाँ कोड़ी सच्चाई,
क्योंकि यहाँ भी दिखता है मतलब की परछाई।

शायद ही वो समझ सके,
निश्चल प्यार कि परिभाषा खुद से,
प्यार करने की ईक्षा है उनके दिल में,
पर खुद को बांध रखी है मतलब की जोड़ से।

कुणाल कुमार