समझ…

अकेले ही भटक रहा मेरा दिल,
ना थी तमन्ना कुछ पाने की,
यादों की गलियों में उसे भूल,
अब तो तमन्ना थी अकेले जिए जाने की।

सागर सा है मेरा प्यार,
अब अंदर ना आना तुम मेरे कभी,
क्योंकि सागर कि फिदरत है ये,
किनारे कर देता जो ना होता उसका अपना।

आगे लिखता हूँ…

क्यों ना भूल सकता उसे दिल,
जिससे प्यार किया उसने हर दिन,
पर कुछ समय का प्यार था ये,
वो तो कही और ढूँढ रही थी अपनी मंजिल।

आसानी से मिला था उसे ये दिल,
इसीलिए भूल गयी थी वो अपनी मंजिल,
उसे क्यों याद करेगा अब मेरा दिल,
जो ख़्वाबों में किसी और के साथ बाँट रही थी अपनी ज़िंदगी।

आख़िर में…

कुछ पंक्तियाँ जो लिखी मैंने,
कोशिश की यादों को शब्द दे सकूँ,
पढ़ तो इसे सभी सकते है,
पर इसे समझना हैं बहुत मुश्किल।

ये शब्द नहीं ये मेरे अश्रु है,
जो सूख कर भाव बन गए हैं,
इन भावों को पिरोकर मैंने,
लिखी है ये लेखनी सिर्फ़ आपके लिए।

कुणाल कुमार
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कुछ कहना हैं…

कभी कभी समझ नहीं पता,
क्या थी मेरे प्यार में कमी,
करता रहा प्यार मेरा दिल तुमसे,
पर तुम मेरा प्यार नहीं समझ पाई कभी।

कहती हो दोस्ती है अपनी सच्ची,
तो क्यों नहीं बताई तुमने मुझे मेरी कमी,
साथ मिलकर ठीक कर लेता मैं अपनी कमी,
पर प्यार ना होने देता कम तुमसे कभी।

काश बात करती तुम मुझसे,
समझा पाती मुझे मेरी हर कमी,
या तो कर लेता मैं खुद को सही,
या भूल जाता मैंने प्यार की कभी।

कुणाल कुमार
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खोज रही हो ख़ुशियाँ,
क्यों तुम इधर उधर,
ज़रा दिल में झांक कर देखो तुम मुझे,
अपनी ख़ुशियाँ पाओगी मुझमें हर घड़ी।

कवि की कल्पना…

सोच रहा हूँ मैं,
ज़िंदगी तुम्हारे बिना अधूरी हैं,
साथ चाहता है ये दिल तुम्हारा,
पर ना जाने आपस में क्यों इतनी दूरी है।

काश समझ पाती तुम मुझको,
तुमको चाहना मेरी मजबूरी है,
तुम क्या समझो मेरे दिल की हाल,
क्योंकि तुमने प्यार मुझसे कभी नहीं की हैं।

एक बात कहूँ मैं दिल से,
अच्छा हुआ तुमने नहीं किया प्यार कभी मुझसे,
फिर भी माँ तुम्हें सत सत प्रणाम,
क्योंकि तुमने दिया मेरी लेखनी को जान।

शायद इसलिए कहते है नारी को प्रेरणा,
साथ रहे तो ज़िंदगी बने सुंदर,
दूर जाकर भी देती हो शक्ति … देवी,
अपने दिए ग़म से भर देती हो मेरी लेखनी।

दूरी हैं एक सुंदर अहसास,
जो दिल वाले को सिर्फ़ मिलती हैं,
उन्हें क्या पता जो पास रहकर भी,
बना रखे हैं दिलों से मिलो दूरी।

Last few lines…

रूठे दिल को मनाने की कला,
कोई मुझे भी ज़रा सिखा दे,
सालो बीत गयी उन्हें मनाने में,
पर अंत में मुझे मिली सिर्फ़ तन्हाई।

कुणाल कुमार

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मतलब…

मेरी कही हर बात में,
क्यों आपको मतलब दिखता है,
मेरा प्यार निश्चल कल भी था,
मेरा दिल साफ़ आज भी है।

मैं नहीं सोचता और कुछ,
क्योंकि सोच मेरी सिर्फ़ तुमसे ही हैं,
ये दिल कल भी तुम्हारा था,
और आज भी बस धड़कता है तुम्हारे लिए।

प्यार का अहसास अनूठा,
अगर करे कोई सच्चे दिल से,
जैसे फूल खिले बागों में,
काँटे का चुभना भी अच्छा लगे।

कुणाल कुमार

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सावन…

क्यों सावन अटक गए है,
मेरे नयनों की क्षितिज पर,
बारिश बन अश्रु बह निकले,
बस सिर्फ़ आपकी यादों में।

आँखों से उतर कर अश्रु,
मेरे दिल को सिंच कर जाती है,
हर बढ़ते दिन के साथ मेरा दिल,
आपको अपना बनाना चाहती है।

जनता हूँ आपकी मजबूरी,
पर कैसे समझाऊँ आपको मैं अपनी मजबूरी,
बस आपसे ही प्यार किया ये दिल,
और मजबूर हैं आपसे दूर रहने के लिए।

क्या बारिश ने रखी है कुछ उम्मीद,
धरती की प्यास बुझाने पर,
वैसे ही है मेरा प्यार हैं आपके लिए,
चाहता हूँ आपको दिल से पर पाने की उम्मीद नहीं हैं दिल में।

कुणाल कुमार

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ज़िंदगी…

दिन भर की कीच कीच,
जैसे अभिशाप बन गयी थी ज़िंदगी,
आज अकेले पहचाना मैं,
शांति से जीना ही हैं वरदान ज़िंदगी।

कुछ समय मैं सोच लूँ,
कुछ समय मुझे कोई समझ ले,
यादों के सहारे अब कट रही मेरी ज़िंदगी,
अब तमन्ना हैं यादों में ही कट जाए मेरी ज़िंदगी।

उनके पास जाने से डरता है ये ज़िंदगी,
पर उनके पास जाने को मचलता हैं मेरी ज़िंदगी,
सोचता हूँ क्या अपना लेगी वो मुझे,
पर डरता हूँ मेरे प्यार को वो गंदगी ना कह दे कही।

इसी उलझन में मैं जी रहा हूँ ज़िंदगी,
कभी हाँ कभी ना के तराज़ू पर तौल रहा हूँ अपनी मनःस्थिति,
आरज़ू हैं खुल कर जी लूँ अपनी ज़िंदगी,
लोगों को छोड़ो आप मुझे समझ पाओगी क्या कभी।

कुणाल कुमार

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अहसास, मेरे दिल की कही…

उसके दुःख में अगर ख़ुशी मनाऊँ,
स्वार्थी बनकर उसके पास जाऊँ,
उसे पाने के लिए सहानुभूति दिखाऊँ,
ये बात कुछ अच्छी नहीं और मुझे जँचती नहीं।

अगर तुम आती खुद से,
समझा पाता तुम्हें मैं खुद को,
पर दुखी मन को साथ चाहिए,
ना की साथ के लिए दुःखी मन के पास आप जाइए।

चाहता हूँ तुम्हें दिल से,
पर कह नहीं सकता अभी मैं ये बात तुमसे,
अभी तो बस इंतज़ार है तुम्हारे ख़ुश होने की,
पर कभी समझ पाओगी तुम दिल में बसी प्यार की कही।

कब तक तुम भगोगी खुदसे,
कभी तो प्यार करोगी तुम मुझसे,
बस इसी आशा में धड़क रहा ये दिल,
कभी तो दिल लगाओगी तुम मुझसे।

नम आँखें से सिंच रहा मैं दिल,
शायद अब ना मिल पाएगा मेरे प्यार को मेरा मंजिल,
पर अब बहुत खारा हो गया है मेरा दिल,
अब ना बना पाएगा किसी और को अपनी मंजिल।

कुणाल कुमार

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क्या लगता हैं आपको…

क्या लगता है आपको,
क्या मेरी चाहत अभी भी है आपके लिए,
अगर सच्चाई के आईना में ढूँढोगे आप मुझे,
तो आपमें ही दिखेगा आपके लिए मेरा प्यार।

क्या लगता है आपको,
क्यों बढ़ गयी है आपसे मेरी दूरी,
क्या ये है मेरा आपके लिए प्यार में कमी,
या हैं आपकी ज़िद्द या कोई मजबूरी।

क्या लगता है आपको,
भूल पाऊँगा मैं बीते पल को कभी,
शायद दुनिया के लिए भूल भी जाऊँ मैं,
पर आप थी, हैं और रहोगी बन कर ज़िंदगी मेरी।

क्या लगता है आपको,
क्या मेरा प्यार इज़हार करना आपको है ज़रूरी,
या आपसे दूर रहकर आपके यादों में,
आपकी ख़ुशियों की तमन्ना करना है ज़रूरी।

कुणाल कुमार

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ख़ूबसूरती…

आपके आँखें की ख़ूबसूरती अच्छी लगी,
जो हैं ज़िंदगी की सच्चाई समेटे,
सुनी जो आपके हँसी की खनक,
लगा जैसे समेटे हुए हैं आपके मासूमियत की महक।

आपकी ज़ुल्फ़ें घुंघराली,
जिसमें अटक कर रह गयी है दिल हमारी,
चाहने पर भी दूर नहीं पता खुद को,
दिल आपसे ही प्यार करता रहता हर घड़ी।

शायद आप नहीं समझ पाओगी कभी मुझे,
इसीलिए दूर किया मैंने आपको खुद से,
पर आप थी, हैं और रहोगी मेरे दिल में,
चाहे मैं नहीं रहूँगा कभी आपके दिल में।

कुणाल कुमार

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ख़ूबसूरती…

आपके आँखें की ख़ूबसूरती अच्छी लगी,
जो हैं ज़िंदगी की सच्चाई समेटे,
सुनी जो आपके हँसी की खनक,
लगा जैसे समेटे हुए हैं आपके मासूमियत की महक।

आपकी ज़ुल्फ़ें घुंघराली,
जिसमें अटक कर रह गयी है दिल हमारी,
चाहने पर भी दूर नहीं पता खुद को,
दिल आपसे ही प्यार करता रहता हर घड़ी।

शायद आप नहीं समझ पाओगी कभी मुझे,
इसीलिए दूर किया मैंने आपको खुद से,
पर आप थी, हैं और रहोगी मेरे दिल में,
चाहे मैं नहीं रहूँगा कभी आपके दिल में।

कुणाल कुमार

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दरखास्त…

ऐ समय तू ठहर जा ज़रा,
बिखरे यादों को सहेजने दे,
ज़रा मेरे प्यार की कली को,
खिल कर फूल बनने दे।

ऐ समय तू ठहर जा ज़रा,
दरखास्त है तुझसे मेरे दिल की,
अभी तो मिले थे उनसे,
अभी तो सासें भी एक नहीं हुई।

ऐ समय तू ठहर जा ज़रा,
मुझे और थोड़ा जीने दे,
प्यार तो किया उन्हें दिल से,
अब जुदाई का लम्हा भी जीने दे।

ऐ समय तू ठहर जा ज़रा,
मौत बनकर तू पास ना आ,
या तो मुझे मेरा प्यार लौटा,
या उन्हें भूलने की साहस मुझे दे।

कुणाल कुमार

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सोचता हूँ कभी कभी…

सोचता हूँ कभी कभी,
कर लूँ प्यार एक बार फिर,
शायद मिल जाए मुझे भी कही,
जिसके दिल में धड़के प्यार मेरे लिए।

चाहत हैं ख़ुशियाँ फिर से मेरे कदम चूमे,
मेरी चाहत प्यार बनकर तेरी बाँहों में मेरी फिर से झूले,
देखता हूँ सपना और जीता हूँ बस तेरे प्यार में,
पर तेरा सपना देखना क्या मना हैं मेरे लिए।

बस एक कमी है मुझमें,
लो आज बता देता हूँ मैं तुम्हें,
चाहत तो हैं दिल में सिर्फ़ तेरे लिए,
पर विश्वास नहीं हैं तुम्हारे कहे गए बात पे।

कुणाल कुमार

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